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नोएडा के होमबायर को बड़ी राहत! बिल्डर ने 13 साल लटकाया फ्लैट की पजेशन, अब देगा 2.5 लाख रुपये और ब्याज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Noida Flat Case: नोएडा में फ्लैट की पजेशन के लिए करीब 13 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले होमबायर को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने बिल्डर पर 2.5 लाख रुपये की लागत लगाई है। साथ ही, फ्लैट की पजेशन में हुई देरी पर 24 फीसदी सालाना ब्याज देने के आदेश को भी बरकरार रखा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला उन हजारों होमबायर्स के लिए अहम माना जा रहा है, जो बिल्डर से फ्लैट की पजेशन मिलने में देरी के कारण लंबे समय से परेशान हैं। यह मामला मैक्स गार्डेनिया डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और होमबायर प्रतिभा गुप्ता से जुड़ा है।

35.90 लाख रुपये देकर खरीदा था फ्लैट

प्रतिभा गुप्ता ने नोएडा के सेक्टर 75 स्थित गोल्फ सिटी प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया था। इसके लिए उन्होंने करीब 35.90 लाख रुपये का पेमेंट किया था। अप्रैल 2011 में हुए एग्रीमेंट के मुताबिक बिल्डर को जून 2013 तक फ्लैट की पजेशन देनी थी। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी बिल्डर फ्लैट की पजेशन नहीं दे सका।

इसके बाद होमबायर ने गौतमबुद्ध नगर रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी रेरा (RERA) का रुख किया। जुलाई 2018 में अथॉरिटी ने बिल्डर को फ्लैट की पजेशन देने और 30 जून 2013 से 24 फीसदी सालाना ब्याज का पेमेंट करने का आदेश दिया।

बिल्डर के खिलाफ जारी हुआ रिकवरी सर्टिफिकेट

रेरा के आदेश का पालन नहीं होने पर मार्च 2019 में करीब 41.21 लाख रुपये का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया। बिल्डर ने इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल का रुख किया, लेकिन उसकी अपील सुनवाई में पेश न होने के कारण खारिज हो गई।

मामला आगे इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा। होमबायर ने रिकवरी सर्टिफिकेट लागू कराने के लिए भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां तक कि आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्रवाई भी शुरू हुई। बैंक खातों पर कार्रवाई के बाद दिसंबर 2022 में बिल्डर ने 67.78 लाख रुपये जमा किए।

24% ब्याज पर कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने बिल्डर की उस दलील को भी नहीं माना जिसमें कोविड-19 महामारी के कारण हुई परेशानियों का हवाला दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि बिल्डर यह साबित नहीं कर पाया कि उसने अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए उचित प्रयास किए थे।

कोर्ट ने 24 फीसदी सालाना ब्याज के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने यह भी माना कि अगर एग्रीमेंट में होमबायर की देरी से पेमेंट की स्थिति में एक निश्चित ब्याज दर तय है, तो पजेशन में देरी होने पर बिल्डर की देनदारी में भी वही दर लागू की जा सकती है।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जरूरी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बिना पजेशन को पूरी पजेशन नहीं माना जा सकता। इस फैसले से होमबायर्स को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट का संदेश साफ है कि बिल्डर लंबे समय तक मुकदमेबाजी के जरिए रेरा के आदेशों से बच नहीं सकते। बिल्डर को पजेशन में देरी के लिए उन्हें भारी ब्याज और एक्स्ट्रा कानूनी लागत भी चुकानी पड़ सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN