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शायद उनके शव भी कभी नहीं मिलेंगे; नेपाल त्रासदी में लापता लोगों को लेकर बड़ा दावा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नेपाल बाढ़ में लापता लोगों को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट ने दावा किया है कि शायद नेपाल में लापता हुए लोगों के शव भी कभी न मिलें। उन्होंने कहा कि 2011 की जापान सुनामी के पीड़ितों के शव अभी तक सामने आते हैं।

Nepal floods: नेपाल की भीषण बाढ़ की वजह से अभी भी हजारों की संख्या में लोग लापता हैं। इनके लिए लगातार बचाव दल चलाया जा रहा है। 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और उनके शवों को पहचानने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इसी बीच एक ऐसा दावा किया गया है, जिससे इस बाढ़ में लापता हुए लोगों के मिलने या उनके शवों को पहचाने जाने की संभावना को झटका लग सकता है। दरअसल, एक जाने-माने वैज्ञानिक ने दावा किया है कि हालात इतने भयावह थे कि इस आपदा में मारे गए लोगों के शव भी शायद कभी न मिलें।

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक मेलबर्न की मोनाश यूनिवर्सिटी के फोरेंसिक विभाग के प्रमुख प्रोफेसर रिचर्ड बास्ड ने नेपाल त्रासदी को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अभी तक जो शव मिले हैं या जो मिलेंगे। शायद उनकी पहचान ही न हो पाए। इसके अलावा कई ऐसे लापता लोग होंगे, जो शायद कभी मिलें ही न।

नेपाल में लापता लोगों के शव शायद कभी न मिलें- प्रोफेसर बास्ड

अपनी बात को साबित करने के लिए तर्क देते हुए बास्ड ने कहा, “वे शव कहीं भी जा सकते हैं। वह बहकर आगे निकल सकते हैं या कीचड़ में गहराई में दब सकते हैं। मुझे लगता है कि कई ऐसे लोग भी होंगे, जिनके शव भी शायद कभी न मिलें। इतना ही नहीं, जब तक यह बचाव अभियान चलेगा और फिर उसके बाद भी लगभग 1 साल तक शवों के मिलने का क्रम जारी रहेगा।” उन्होंने बताया कि 2011 में जापान में आई सुनामी के पीड़ितों के शव आज भी मिलते रहते हैं। ऐसे में नेपाल के लिए इन शवों को खोजना और इनका मिलना आसान नहीं होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई फॉरेंसिक साइंटिस्ट ने 2004 की थाईलैंड सुनामी और 2009 में विक्टोरिया में लगी भीषण आग के पीड़ितों के शवों की जांच करने में अहम भूमिका निभाई थी। इतना ही नहीं उन्होंने 2004 और 2011 की जापान सुनामी के ऊपर भी रिचर्स की थी।

नेपाल में बचाव अभियान जारी

तमाम चर्चा के बीच नेपाल में भारत और चीन समेत कई देशों के इंजीनियर लगातार काम कर रहे हैं। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से लोगों को निकालने का काम किया जा रहा है। त्रिशुली की 3ए हाइड्रोपावर सुरंग से दो लोगों को बचाया गया है। इनकी पहचान संजय शाह और कबीर महारजन के रूप में हुई है। यह पिछले 9 दिनों से इस टनल में फंसे हुए थे। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार महामंत्र का जाप करते रहे।

बता दें, 26 अगस्त को तिब्बत नेपाल बॉर्डर से आई इस बाढ़ में नेपाल के एक बड़े हिस्से को प्रभावित किया था। बाढ़ के साथ आए मलबे ने कई मकानों और गांवों को धराशायी कर दिया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस बाढ़ की वजह से अभी तक 1259 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5000 से ज्यादा लोग लापता हैं। पिछले 9 दिनों से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। शवों की पहचान के लिए पीड़ित परिवारों से डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN