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बच्चों को अनजाने में जिद्दी बना रही पैरेंट्स की ये आदत, आज से फौरन रोक दें

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Source :- LIVE HINDUSTAN

आपका बच्चा जिद्दी हो गया है तो इसके लिए कहीं ना कहीं पैरेंट्स ही जिम्मेदार हैं। अगर अपने बड़े होते बच्चे के साथ इनमे से एक या दो हरकतें भी आप कर रहे हैं तो फौरन बंद कर दें नहीं तो वो जिद्दी हो जाएगा।

बच्चों को हेल्दी पैरेंटिंग का माहौल देना अच्छा है। उन्हें प्यार से समझाना और सिखाना सभी पैरेंट्स चाहते हैं। लेकिन इसी प्यार के चक्कर में कई बार बच्चे जिद्दी हो जाते हैं और पैरेंट्स को इस बात का अंदाजा भी नहीं लगता। जब ये जिद किसी बड़ी चीज के लिए होती है तब पैरेंट्स को अंदाजा लगता है कि उनके बच्चे को उसकी पसंद की चीज ही चाहिए और फिर उसके व्यवहार को ठीक करना मुश्किल हो जाता है। अगर आप अपने 3-4 साल के बच्चे के साथ इस तरह की हरकतें करते हैं तो आज से ही बंद कर दें क्योंकि आपकी यहीं आदते ही उसे जिद्दी बना रही हैं।

बच्चे के रोने के बाद उसकी बात मान लेना

अगर आपका छोटा सा बच्चा जो करीब 3-4 का है उसने किसी चीज की डिमांड की और रोने लगा। पहले तो आपने मना किया लेकिन उसका रोना देखकर फौरन उस चीज को मान गए और बच्चे का कहना मान लिया। तो बच्चे को ये सीख मिल जाती है कि जब वो रोएगा, चिल्लाएगा और नखरे दिखाएगा तो उसके मां-बाप उसकी डिमांड को पूरी कर देंगे। अगली बार वो और स्ट्रांग तरीके से अपनी बात मनवाने के लिए रोएगा, टैंट्रम दिखाएगा क्योंकि उसे पता है कि ऐसा करने से उसकी बात मान ली जाएगी।

बच्चे को बहुत सारे ऑप्शन देना

बच्चे से कोई काम करवाना है और आपने कई सारे ऑप्शन दे दिए। जैसे खाने में जो बना है बच्चा अगर उसे खाने से मना करे तो आप फौरन उसका दूसरा ऑप्शन खोजकर लाते हैं। फल, फ्रूट और फिर जो उसकी मनचाही चीज है उसे खाने को दे देते हैं। इस तरह से वो सीखता है कि उसे जो चाहिए वो थोड़े से नखरे के बाद पा ही जाएगा और फिर वो कभी आपकी बात को नहीं मानेगा जब तक उसे कई तरह के ऑप्शन ना दिए जाएं और उसमे से वो अपने मनपसंद चीजों को ना चुन लें।

रूटीन फॉलो ना करवाना

छोटे से बच्चे के रूटीन को अक्सर लोग इग्नोर करते हैं लेकिन यहीं रूटीन की हैबिट उसे हर काम को टाइम पर करना सिखाती है। जब आप उसके नहाने, ब्रश करने, खाने के टाइम को फिक्स नहीं करती हैं तो उसे फील होता है कि वो जब चाहे कोई भी काम कर सकता है। इसलिए बच्चे के रूटीन को कभी भी इग्नोर ना करें। ये बच्चे को सिखाती है कि हर काम का एक जरूरी समय होता है अगर वो बीत जाए तो उस काम का महत्व कम हो जाता है। बच्चे के माइंड को प्रिडिक्टिबिलिटी पसंद होती है। जब बच्चे को पता होता है कि आगे उसे क्या करना है तो वो शांत होता है और उस काम को करने में दिलचस्पी दिखाता है। वहीं अगर बच्चे को पता ही नहीं कि आगे क्या करना है तो कई बार बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि करना क्या है। इसलिए कुछ चीजों के लिए बच्चे का डेली टाइम और रूटीन जरूर फॉलो करवाएं।

बार-बार इंस्ट्रक्शन देना

बच्चे को आप एक ही काम बार-बार करने को बोलते हैं तो इस आदत को बंद कर दें। साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मिमांसा कश्यप बताती हैं कि बच्चे को एक बार में किसी चीज का इंस्ट्रक्शन दें नहीं तो बच्चे का माइंड इस चीज को एक्सेप्ट कर लेता है कि उसे एक बार में मम्मी-पापा की बात सुनने की जरूरत नहीं है। जब पापा या मम्मी चिल्लाएंगी और गुस्सा करेंगी उसके बाद ही वो उस बात को सुनेगा और करेगा। इसलिए बच्चे को पूरे दिन बार-बार एक ही चीज को करने के लिए ना कहें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN