Source :- LIVE HINDUSTAN
बलूचिस्तान की आजादी के लिए आवाज उठा रही युवा कार्यकर्ता फराह बलूच ने भारत से मदद की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रही कार्यकर्ता फराह बलूच ने भारत से मदद की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में वह अपनी मां के साथ भारतीय तिरंगा थामे दिख रही हैं। फराह वीडियो में ‘भारत माता की जय, नमस्ते हिंदुस्तान’ कहती हुई अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना लोगों पर जुल्म कर रही है। इसलिए भारत और दुनिया को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए।
मानवाधिकार कार्यकर्ता फराह बलूच ने भारतीय नागरिकों और दुनिया से बलूचिस्तान के लोगों के साथ खड़े होने की सीधी अपील की है। 14 साल की यह कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अपनी मां के साथ वीडियो जारी कर भारत के लोगों से चुप्पी तोड़ने की अपील की। फराह ने कहा कि आज मैं, फराह बलूच, कब्जे वाले बलूचिस्तान की बेटी, अपनी मां के साथ हर नागरिक से गुजारिश करती हूं कि वे हमारी आवाज बनें और बलूचिस्तान के लोगों का साथ दें। हिंदुस्तान, आपकी आवाज और आपका साथ बलूचिस्तान के बेजुबान लोगों के लिए बहुत मायने रखता है।
यह अपील ऐसे समय में आई है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा और शासन को लेकर लगातार बवाल हो रहा है। आये दिन हिंसक घटनाएं होती रहती हैं। कार्यकर्ता अक्सर सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जबरन गायब किए गए लोगों और सेना के दखल की बात करते रहे हैं। हालांकि भारत सरकार अब तक इस मामले में सतर्क रुख अपनाती रही है। कभी-कभी भारतीय अधिकारी पाकिस्तान से बलूच लोगों की लोकतांत्रिक और मानवीय मांगें पूरी करने की बात करते हैं। यही कारण है कि फराह ने कहा कि अगर भारत आवाज उठाए तो दुनिया का ध्यान बलूचिस्तान के आम लोगों की मुश्किलों पर जा सकता है।
बलूचिस्तान अशांत क्यों?
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। यहां गैस, सोना और तांबा जैसे खनिज काफी मात्रा में हैं। फिर भी यह इलाका देश के सबसे पिछड़े इलाकों में गिना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां के संसाधनों का फायदा केंद्र सरकार और दूसरे प्रांतों को जाता है, जबकि यहां के लोग गरीब रह जाते हैं।
कार्यकर्ता और संगठन आरोप लगाते हैं कि पाकिस्तानी सेना इलाके में भारी सैन्य तैनाती करती है। लोगों को जबरन गायब करने, बिना मुकदमे के हत्याएं करने और राजनीतिक विरोध को दबाने के आरोप लगते रहे हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और ग्वादर बंदरगाह जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से स्थानीय लोगों का गुस्सा और बढ़ा है। कई लोग कहते हैं कि इन परियोजनाओं से मूल निवासियों को फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे सशस्त्र समूह ज्यादा स्वायत्तता या पूरी आजादी की मांग करते हैं। ये समूह समय-समय पर सुरक्षा बलों और परियोजनाओं पर हमले भी करते रहे हैं।
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