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भारतीयों को बड़ा झटका देने की तैयारी में US, H-1B वीजा पूरी तरह हो जाएगा खत्म?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

H-1B वीजा को लेकर अमेरिकी सरकार पहले से ही सख्ती बरत रही है। फीस कई गुना ज्यादा बढ़ा दी गई है और कई तरह के रिस्ट्रिक्शन लगाए गए हैं। अब अमेरिकी सरकार क्या करने की तैयारी में है?

अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आ रही है। खबर है कि ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा को लेकर बड़ी तैयारी कर रहा है। इसके तहत अब नियमों को और सख्त बनाया जाएगा। वहीं कहा जा रहा है कि H-1B वीजा को हमेशा के लिए खत्म भी किया जा सकता है। यही नहीं अमेरिका की ओर से हथकड़ी वाली चेतावनी भी आई है।

अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने हाल ही में इसके संकेत दिए हैं। एक पोस्टकास्ट में उन्होंने चेतावनी दी है कि अगले 365 दिनों में H-1B वीजा व्यवस्था का रूप पूरी तरह बदल जाएगा और धोखाधड़ी करने वाले एम्प्लॉयर्स के खिलाफ कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।

भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को झटका

H-1B वीजा प्रोग्राम पर किसी भी तरह की आंच का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ता है। अमेरिकी आईटी कंपनियों, टेक सेक्टर और कॉरपोरेट जगत में काम करने वाले कुल H-1B वीजा धारकों में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अकेले भारतीय पेशेवरों की होती है। अगर अमेरिका इस प्रोग्राम को पूरी तरह बंद करता है तो हजारों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों और वहां जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के करियर को बहुत बड़ा झटका लगेगा। वहीं पहले से अमेरिका में मौजूद भारतीयों के लिए वीजा रिन्यूअल और ग्रीन कार्ड की राह में नई रुकावटें खड़ी हो सकती हैं।

365 दिनों में बदल जाएगा पूरा नियम

अमेरिकी कमेंटेटर और यूट्यूबर बेनी जॉनसन को दिए एक इंटरव्यू में इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने अमेरिका की रणनीति को लेकर स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि जांच अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वीजा के नाम पर धांधली और शेल कंपनियों के जरिए फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर गिरफ्तारी की तैयारी है। डी’एस्पोसिटो ने कहा, “मुझे लगता है कि विदेशी श्रम वीजा प्रोग्राम आज से 365 दिनों के भीतर पूरी तरह से अलग नजर आएगा।” उन्होंने बताया कि अमेरिकी सरकार H-1B वीजा प्रोग्राम से जुड़ी धोखाधड़ी, कर्मचारियों के शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की जांच कर रहा है।

दिग्गज कंपनियां निशाने पर

जांच एजेंसियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितता बरतने वाली दिग्गज कंपनियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे पहले आपराधिक जांच की वजह से टेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों कॉग्निजेंट और क्लाउडेरा से जुड़े H-1B वीजा आवेदनों को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, जांच अधिकारियों ने दर्जनों समन जारी किए हैं और कई ठिकानों पर सर्च वारंट जारी कर छापेमारी की है।

क्या है प्रोजेक्ट फायरवॉल?

अमेरिका में विदेशी पेशेवरों के बजाय अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों को प्राथमिकता देने के लिए कई नए नियम लागू किए जा रहे हैं। सितंबर 2025 में अमेरिकी सरकार प्रोजेक्ट फायरवॉल ले कर आई थी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य हाइली स्किल्ड अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, अधिकारों और नौकरी के अवसरों की रक्षा करना है, ताकि एंप्लॉयर्स विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के बजाय पहले योग्य अमेरिकियों को काम पर रखें।

इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने श्रम, होमलैंड सिक्योरिटी और विदेश विभाग को निर्देश दिया है कि किसी भी कंपनी के H-1B आवेदन की समीक्षा करते समय यह जरूर जांचा जाए कि उस कंपनी ने हाल ही में उसी पद पर काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी तो नहीं की है। इसके साथ ही अमेरिका ने H-1B वीजा श्रेणी के तहत कुछ विशेष वीजा धारकों के अमेरिका में प्रवेश पर लगी पाबंदी को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है।

क्या है H-1B वीजा और इसका कोटा?

H-1B वीजा एक नॉन-इमीग्रेंट वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां आईटी और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले विदेशी कुशल कर्मचारियों को अपने यहां नौकरी देती हैं। अमेरिकी कानून के तहत हर वित्त वर्ष में केवल 65,000 नए H-1B वीजा जारी किए जाते हैं। वहीं अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों से मास्टर या पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले विदेशी छात्रों के लिए 20,000 अतिरिक्त कोटा तय होता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN