Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- Success Story: जिस रसोई को कभी सिर्फ घर की जिम्मेदारी समझा गया, वही रसोई एक दिन करोड़ों के कारोबार की नींव बन गई
- 16 साल की उम्र में शादी के बाद 25 लोगों के लिए खाना बनाने वाली देवनी देवी ने 20 रुपये के टिफिन से शुरुआत की
Success Story: जिस रसोई को कभी सिर्फ घर की जिम्मेदारी समझा गया, वही रसोई एक दिन करोड़ों के कारोबार की नींव बन गई। 16 साल की उम्र में शादी के बाद 25 लोगों के लिए खाना बनाने वाली देवनी देवी ने 20 रुपये के टिफिन से शुरुआत की। परिवार की नाराजगी झेली, पति ने छह महीने तक बात नहीं की, लेकिन उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा। 65 साल की उम्र में उनकी ‘अम्मा किचन’ की कहानी आज हजारों लोगों के लिए मिसाल बन चुकी है। आज उनका कारोबार करीब 2.5 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच गया है और उनके बिजनेस से 30 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है।
16 साल की उम्र में शादी, 25 लोगों के परिवार की जिम्मेदारी
देवनी देवी की कहानी किसी कॉरपोरेट ऑफिस या बिजनेस स्कूल से शुरू नहीं हुई थी। महज 16 साल की उम्र में शादी के बाद वह बिहार के एक बड़े संयुक्त परिवार का हिस्सा बनीं, जहां करीब 25 लोगों के लिए रोज खाना बनाना उनकी जिम्मेदारी थी।
सुबह से रात तक रसोई संभालते हुए उन्होंने बिना किसी बिजनेस ट्रेनिंग के एक ऐसी कला सीखी, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। कम लागत में बड़ी संख्या में लोगों के लिए स्वादिष्ट और घर जैसा खाना तैयार करना।
साल 2002 में बच्चों की पढ़ाई के लिए वह पटना आईं। यहीं उनकी नजर एक मेडिकल छात्र के लंचबॉक्स पर पड़ी। खाना उन्हें ताजा और घर जैसा नहीं लगा। देवनी देवी को लगा कि घर से दूर रहने वाले छात्रों को सस्ता और साफ-सुथरा घर का खाना मिलना चाहिए। यहीं से उनके बिजनेस का आइडिया निकला।
20 रुपये के एक टिफिन से हुई शुरुआत
देवनी देवी ने छात्रों के लिए घर का खाना बनाकर सिर्फ 20 रुपये में एक प्लेट देना शुरू किया। उनके पहले ग्राहकों में मेडिकल छात्र सौरभ भी शामिल थे, जिन्होंने उन्हें टिफिन और मेस सर्विस की जरूरत समझने में मदद की। शुरुआत में खाना बनाना, पैक करना और पहुंचाना। सब काम वह खुद करती थीं। धीरे-धीरे छात्रों के बीच उनके खाने की चर्चा होने लगी और ग्राहक बढ़ने लगे। छात्र उन्हें प्यार से ‘अम्मा’ कहने लगे। यही नाम आगे चलकर उनके ब्रांड की पहचान बन गया।
हालांकि, परिवार में उनके कारोबार शुरू करने के फैसले को लेकर हर कोई खुश नहीं था। उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा। एक समय उनके पति ने करीब छह महीने तक उनसे बात तक नहीं की। लेकिन देवनी देवी ने काम नहीं छोड़ा।
80 हजार रुपये से खरीदे 8 रिक्शे
कमाई बढ़ने लगी तो उन्होंने पैसे को सिर्फ खर्च करने के बजाय उसे दोबारा लगाने का फैसला किया। उन्होंने करीब 80 हजार रुपये बचाकर आठ रिक्शे खरीदे और उनसे कमाई का एक नया जरिया तैयार किया। इसके बाद साल 2009 में उन्होंने अपनी पोती के नाम पर समृद्धि गर्ल्स हॉस्टल शुरू किया। उनके टिफिन कारोबार से जुड़े कुछ छात्र बाद में इसी हॉस्टल में रहने लगे।
कोरोना में भी नहीं बंद हुई ‘अम्मा’ की रसोई
कोरोना महामारी ने उनके कारोबार को बड़ा झटका दिया। छात्र अपने घर लौट गए और हॉस्टल बंद हो गए। लेकिन देवनी देवी ने खाना बनाना बंद नहीं किया। उन्होंने डॉक्टरों के हॉस्टल तक खाना पहुंचाना जारी रखा। उस दौर में जब स्वास्थ्यकर्मियों को भरोसेमंद खाने की जरूरत थी, उनकी रसोई लगातार चलती रही। इसी दौरान देवनी देवी खुद भी कोरोना संक्रमित हो गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन छात्रों ने उनकी देखभाल की, जिन्हें उन्होंने सालों तक खाना खिलाया था।
2022 में ऑनलाइन हुई ‘अम्मा किचन’
कारोबार में बड़ा बदलाव साल 2022 में आया। उनके बेटे ने उन्हें बिजनेस को ऑनलाइन ले जाने की सलाह दी। इसके बाद अम्मा किचन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कदम रखा। ऑनलाइन आने के बाद ग्राहकों का दायरा तेजी से बढ़ा। धीरे-धीरे कारोबार ने डाइन-इन आउटलेट का रूप भी ले लिया। आज यहां करीब 100 से 300 रुपये की कीमत में खाना उपलब्ध कराया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पटना में अम्मा किचन के दो डाइन-इन आउटलेट हैं और कंपनी में 30 से ज्यादा लोग काम करते हैं। कारोबार का सालाना रेवेन्यू करीब 2.5 करोड़ रुपये है। रोजाना ऑनलाइन ऑर्डर की संख्या करीब 350 तक पहुंचने की भी रिपोर्ट है।
जिस बेटे को भरोसा नहीं था, वही बना कारोबार का हिस्सा
देवनी देवी के बड़े बेटे जयशंकर शुरुआत में उनके काम को लेकर आश्वस्त नहीं थे। लेकिन जब कारोबार बढ़ा तो उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर मां के बिजनेस में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। आज 65 साल की उम्र में देवनी देवी की कहानी बताती है कि बिजनेस शुरू करने के लिए हमेशा बड़ी पूंजी, MBA की डिग्री या कोई बड़ा स्टार्टअप आइडिया जरूरी नहीं होता। कई बार सालों से सीखा हुआ साधारण हुनर और लोगों की जरूरत को पहचानने की क्षमता ही कारोबार की नींव बन सकती है।
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