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शेख हसीना के तख्तापलट की प्लानिंग में था विदेशी पत्रकार का हाथ, यूनुस को दिया था संदेश

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Source :- LIVE HINDUSTAN

बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से हटाने को लेकर नया खुलासा हुआ है। यूनुस के प्रेस सचिव रहे आलम ने खुलासा किया है कि हसीना के तख्तापटल के पहले उनके पत्रकार साथी ने छात्रों और यूनुस के बीच में पुल का काम किया था। इसके बाद तख्तापलट की योजना बनाई गई।

शेख हसीना के तख्तापलट की प्लानिंग में था विदेशी पत्रकार का हाथ, यूनुस को दिया था संदेश

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को गिराने के लिए चलाए गए अभियान को लेकर नया खुलासा हुआ है। सामने आई जानकारी के मुताबिक आरक्षण विरोधी अभियान से शुरू हुए छात्र आंदोलन ने शेख हसीना को सत्ता से हटाने का प्लान काफी पहले ही बना लिया था। तख्तापलट के दो दिन पहले ही नोबेल विजेता मोहम्मद युनूस और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत हुई। यहीं पर पूरे तख्तापलट और आगे की स्थिति के बारे में योजना बनाई गई। इस पूरी प्लानिंग में एक विदेशी पत्रकार ने अहम भूमिका निभाई थी।

इस आंदोलन के समय ढाका में AFP के ब्यूरो प्रमुख और बाद में यूनुस सरकार में प्रेस सचिव बने शफीकुल आलम ने पूरे घटनाक्रम के बारे में अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे प्रदर्शन के समय छात्र मोहम्मद युनूस से संभालने की अपील कर रहे थे। इस दौरान AFP के पत्रकार कादरुद्दीन शिशिर ने उनकी मदद की थी। आलम ने बताया,”जब छात्र नेताओं ने नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस से संपर्क करना चाहा और उन्हें हसीना के बाद बनने वाली अंतरिम सरकार का प्रमुख बनने के लिए आमंत्रित करना चाहा, तो उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जिस पर भरोसा किया जा सके। कदरुद्दीन शिशिर ने आगे आकर यह अहम भूमिका निभाई।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आलम ने कहा कि शिशिर ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों और नोबेल विजेता के बीच में पुल की तरह काम किया। इसके बाद युनूस बांग्लादेश आए और उन्होंने सत्ता संभाली।

ऑपरेशन फेल होता, तो ‘आइनाघर’ में पहुंच जाती पूरी टीम- आलम

बता दें, शफीकुल आलम एक ऐसे घटनाक्रम के बारे में बात कर रहे हैं, जिसमें एक देश के प्रधानमंत्री को हटाने और किसी दूसरे को उसकी जगह पर बैठाने की प्लानिंग चल रही थी। शेख हसीना के सत्ता में जाने से पहले ही एक पत्रकार दो गुटों के बीच सेतू बन रहा था। इस पूरे घटनाक्रम में होने वाले जोखिम की जानकारी इन सभी को थी।

इस पूरे घटनाक्रम के बारे में बात करते हुए आलम ने इसे एक बहुत जोखिम भरा ऑपरेशन करार दिया। उन्होंने लिखा कि भले ही हसीना सरकार उस समय अपने अंतिम दौर में थी। लेकिन अगर इसकी जानकारी उन्हें लग जाती तो शिशिर और एएफपी की पूरी टीम को ‘आइनाघर’ में पहुंचा दिया जाता। आइनाघर एक ऐसी जगह को कहा जाता है, जहां पर क्रूर यातना देने का काम किया जाता है।

बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ शुरू हुए कथित छात्र आंदोलन ने ढाका में बड़े स्तर पर हिंसा फैला दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अगस्त 2024 में हसीना को अपनी सत्ता छोड़कर भारत आना पड़ा। इसके बाद से वह भारत में ही रह रही हैं। दूसरी तरफ बांग्लादेश में अब तक काफी परिवर्तन हो चुके हैं। हसीना के भारत आने के बाद यूनुस ने आकर सत्ता संभाली। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेशी संविधान और राजनीतिक स्तर पर काफी बदलाव किए। हसीना की पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद हुए चुनाव में बीएनपी ने जीत हासिल की और तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बने। भारत ने उनके साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक मामला जमा नहीं है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN