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HUL के शेयर 2026 में 20% टूटे, 22 साल की सबसे बड़ी गिरावट का खतरा; अब खरीदें या बेचें?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

देश की दिग्गज FMCG कंपनियों में शामिल HUL (Hindustan Unilever) के शेयरों पर इस साल दबाव बना हुआ है। 2026 में अब तक शेयर करीब 20% गिर चुका है। अगर यह गिरावट साल के अंत तक बनी रहती है, तो कंपनी के शेयर 2004 के बाद अपना सबसे खराब सालाना प्रदर्शन दर्ज कर सकते हैं। उस साल शेयर में करीब 30% की गिरावट आई थी। HUL के शेयरों में कमजोरी की वजह सिर्फ कंपनी का प्रदर्शन नहीं है। पूरे FMCG सेक्टर में महंगे कच्चे माल, उपभोक्ताओं की मांग को लेकर चिंता और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

हालांकि, कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजों में रेवेन्यू और बिक्री की मात्रा में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके बावजूद कुछ कारोबारों के मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि क्या शेयर में आई गिरावट खरीदारी का मौका है या अभी और इंतजार करना चाहिए?

HUL के शेयर में 20% की गिरावट

2026 में हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) के शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, शेयर करीब ₹1,858 तक फिसल गया और कंपनी का मार्केट कैप ₹4.5 लाख करोड़ से नीचे आ गया। शेयर पिछले पांच महीनों से हर महीने गिरावट के साथ बंद हुआ है। अक्टूबर में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। इसी महीने शेयर कुछ समय के लिए 2019 के बाद के सबसे निचले स्तर तक भी पहुंचा, हालांकि इसके बाद थोड़ी रिकवरी देखने को मिली।

अगर साल के अंत तक शेयर में सुधार नहीं होता है, तो 2026 इसका 22 साल में सबसे कमजोर सालाना प्रदर्शन बन सकता है। इससे पहले 2004 में शेयर करीब 30% गिरा था। 2024 में भी इसमें सालाना आधार पर दो अंकों की गिरावट दर्ज हुई थी।

सिर्फ HUL नहीं, पूरे FMCG सेक्टर में कमजोरी

शेयर बाजार में दबाव केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) तक सीमित नहीं है। Nifty FMCG इंडेक्स की 15 कंपनियों में से 12 के शेयर 2026 में अब तक करीब 20% से 40% तक गिर चुके हैं। इनमें ITC, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट (Godrej Consumer Products), डॉबर इंडिया (Dabur India), कोलगेट-पामोलिव (Colgate-Palmolive), ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज (Britannia Industries) और नेस्ले इंडिया (Nestlé India) जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इस गिरावट के पीछे कई वजहें हैं।

  • कच्चे माल की बढ़ती कीमतें:- क्रूड ऑयल और पाम ऑयल जैसे इनपुट महंगे होने से कंपनियों की लागत बढ़ रही है।
  • मुनाफे पर दबाव:- लागत बढ़ने के बावजूद कंपनियां हर बार उत्पादों की कीमत उतनी नहीं बढ़ा सकतीं, जितनी जरूरत होती है।
  • खपत की रफ्तार को लेकर चिंता:- निवेशकों को आशंका है कि उपभोक्ताओं की मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी, तो कंपनियों की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
  • वैल्यूएशन में कमी:- सेक्टर की भविष्य की कमाई को लेकर सतर्कता बढ़ने से निवेशक FMCG शेयरों को पहले के मुकाबले कम वैल्यूएशन देने लगे हैं, यानी HUL के शेयर में गिरावट को समझने के लिए पूरे सेक्टर के हालात पर भी नजर रखना जरूरी है।

Q2 में HUL का प्रदर्शन कैसा रहा?

सितंबर तिमाही यानी Q2 में HUL ने रेवेन्यू के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया। आइसक्रीम कारोबार के अलग होने के प्रभाव को समायोजित करने के बाद कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 15% बढ़कर ₹18,070 करोड़ रहा। यह आंकड़ा Motilal Oswal के ₹17,490 करोड़ के अनुमान से भी ज्यादा था। कंपनी ने पिछले 14 तिमाहियों में सबसे तेज रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की।

कंपनी की अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ यानी उत्पादों की बिक्री की मात्रा में बढ़ोतरी 7% रही। हालांकि, चाय और साबुन की कुछ कैटेगिरी में बिक्री की रफ्तार कमजोर रही, जबकि बाकी पोर्टफोलियो में वॉल्यूम ग्रोथ बेहतर हुई।

प्रमुख आंकड़ा Q2 प्रदर्शन
कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹18,070 करोड़
रेवेन्यू ग्रोथ 15%
अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ 7%
ग्रॉस मार्जिन 48%
EBITDA मार्जिन 22.4%

रेवेन्यू में मजबूती के बावजूद कंपनी की लागत और मार्जिन से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

किस कारोबार में कितनी ग्रोथ हुई?

HUL के अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कुछ कारोबारों में रेवेन्यू और मुनाफा दोनों बढ़े, जबकि कुछ में लागत के दबाव ने मुनाफे की ग्रोथ को सीमित कर दिया।

1- Home Care: रेवेन्यू 21% बढ़ा, लेकिन मार्जिन पर दबाव

होम केयर (Home Care) कारोबार का रेवेन्यू सालाना आधार पर 21% बढ़ा। इस सेगमेंट में बिक्री की मात्रा में भी दो अंकों की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, EBIT यानी ब्याज और टैक्स से पहले के ऑपरेटिंग मुनाफे में सिर्फ 3% की वृद्धि हुई। इस कारोबार का EBIT मार्जिन 300 बेसिस पॉइंट घटकर 16.2% रह गया, जो पिछले 16 तिमाहियों का सबसे निचला स्तर था। इसकी प्रमुख वजह कच्चे माल की ऊंची लागत मानी जा रही है।

2- ब्यूटी एंड वेलबींग:- रेवेन्यू और मुनाफे में 16% की वृद्धि

ब्यूटी एंड वेलबींग (Beauty and Wellbeing) सेगमेंट ने अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन किया। इसका रेवेन्यू 16% बढ़ा और EBIT में भी 16% की वृद्धि हुई। यह कारोबार कंपनी के उन सेगमेंट में शामिल रहा, जहां बिक्री के साथ ऑपरेटिंग मुनाफे की ग्रोथ भी बनी रही।

3- पर्सनल केयर:- रेवेन्यू बढ़ा, मुनाफा घटा

पर्सनल केयर (Personal Care) कारोबार का रेवेन्यू 8% बढ़ा, लेकिन EBIT में 9% की गिरावट आई। इससे संकेत मिलता है कि बिक्री बढ़ने के बावजूद लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा।

4- फूड एंड रिफ्रेशमेंट: मुनाफे की ग्रोथ रेवेन्यू से तेज

फूड एंड रिफ्रेशमेंट (Food and Refreshment) सेगमेंट में रेवेन्यू 9% बढ़ा, जबकि EBIT में 16% की वृद्धि हुई। इस कारोबार में ऑपरेटिंग मुनाफे की बढ़ोतरी रेवेन्यू ग्रोथ से ज्यादा रही।

HUL के मार्जिन पर दबाव क्यों बढ़ा?

HUL के नतीजों में सबसे अहम बात ग्रॉस मार्जिन में गिरावट रही। सितंबर तिमाही में कंपनी का ग्रॉस मार्जिन सालाना आधार पर 400 बेसिस पॉइंट घटकर 48% रह गया। यह Motilal Oswal के 50% के अनुमान और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के 49.5% मार्जिन से भी कम था।

ग्रॉस मार्जिन में गिरावट का मतलब है कि उत्पाद बनाने और बेचने से जुड़ी प्रत्यक्ष लागत के बाद कंपनी के पास पहले के मुकाबले कम हिस्सा बचा। हालांकि, EBITDA मार्जिन में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही। यह सालाना आधार पर 130 बेसिस पॉइंट घटकर 22.4% रहा। कंपनी को विज्ञापन और प्रमोशन पर कम खर्च तथा दूसरी लागतों में बचत से कुछ मदद मिली।

मैनेजमेंट ने मीडियम टर्म के लिए 22% से 24% EBITDA मार्जिन का अपना लक्ष्य बरकरार रखा है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कच्चे माल की कीमतों का दबाव कम होता है या नहीं और कंपनी अपनी लागत को कितनी अच्छी तरह संभाल पाती है।

HUL के शेयर पर ब्रोकरेज की क्या राय है?

शेयर में तेज गिरावट के बावजूद कई ब्रोकरेज फर्मों ने HUL पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। कुछ ने खरीदारी की रेटिंग बरकरार रखी है, जबकि कुछ का मानना है कि गिरावट के बाद शेयर का रिस्क-रिवॉर्ड पहले से बेहतर हुआ है।

मोतीलाल ओसवाल:- ब्रोकरेज ने शेयर पर Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹2,150 का टारगेट दिया है।

JM फाइनेंशियल:- कंपनी के नए CEO के नेतृत्व में कामकाज को लेकर ब्रोकरेज सकारात्मक है। हालांकि, सेक्टर के वैल्यूएशन में आई कमी को देखते हुए इसने अपने वैल्यूएशन मल्टीपल को 45 गुना से घटाकर 40 गुना कर दिया। इसके साथ टारगेट प्राइस ₹2,315 से घटाकर ₹2,225 किया गया है।

एक्सिस सिक्योरिटीज:- शेयर में तेज गिरावट के बाद ब्रोकरेज ने इसकी रेटिंग Buy कर दी। इसके अनुसार, मौजूदा स्तरों पर संभावित रिटर्न और जोखिम का संतुलन बेहतर हुआ है, हालांकि मार्जिन पर दबाव अभी भी चिंता का विषय है।

जेफरीज (Jefferies):- ब्रोकरेज ने Buy रेटिंग के साथ ₹2,350 का टारगेट दिया है। यह उसके आकलन के मुताबिक पिछले बंद भाव से लगभग 29.4% संभावित बढ़त का संकेत देता है।

नोमुरा:- इस ब्रोकरेज ने भी Buy रेटिंग बरकरार रखी है और ₹2,100 का टारगेट दिया है। उसके अनुमान के मुताबिक, इसमें पिछले बंद भाव से करीब 15.7% की संभावित बढ़त हो सकती है।

ध्यान रहे कि ये ब्रोकरेज के अनुमान हैं, शेयर के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं। टारगेट प्राइस में बदलाव हो सकता है और शेयर में आगे गिरावट भी आ सकती है।

क्या HUL के शेयर में आई गिरावट खरीदारी का मौका?

HUL के शेयर में करीब 20% की गिरावट के बाद वैल्यूएशन पहले के मुकाबले आकर्षक लग सकता है। कंपनी के सितंबर तिमाही के रेवेन्यू और वॉल्यूम ग्रोथ के आंकड़े भी सकारात्मक रहे हैं। यही वजह है कि कई ब्रोकरेज फर्में शेयर पर सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं।

लेकिन निवेशकों को कुछ जोखिम भी ध्यान में रखने चाहिए:

  • कच्चे माल की कीमतें ऊंची रहने से मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।
  • साबुन और चाय जैसी श्रेणियों में कमजोर वॉल्यूम ग्रोथ चिंता का विषय है।
  • FMCG सेक्टर के शेयरों में व्यापक गिरावट के कारण वैल्यूएशन पर दबाव बना रह सकता है।
  • ब्रोकरेज के टारगेट और वास्तविक बाजार भाव में अंतर हो सकता है।

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी की ब्रांड ताकत, बिक्री की ग्रोथ, मुनाफे और मार्जिन में सुधार की क्षमता को देखना जरूरी है। वहीं, छोटी अवधि में निवेश करने वालों को शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव और सेक्टर के रुझान को ध्यान में रखना चाहिए।

गिरावट के बाद नजर रखें इन संकेतों पर

HUL के शेयरों में 2026 के दौरान आई कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। हालांकि, कंपनी के सितंबर तिमाही के रेवेन्यू और वॉल्यूम ग्रोथ के आंकड़े बताते हैं कि कारोबार में पूरी तरह सुस्ती नहीं है। असली चुनौती बढ़ती लागत के बीच मुनाफे और मार्जिन को संभालने की है।

कई ब्रोकरेज फर्मों ने शेयर पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है और मौजूदा भाव से ऊपर के टारगेट दिए हैं। फिर भी निवेश का फैसला केवल गिरावट या टारगेट प्राइस देखकर नहीं करना चाहिए। कच्चे माल की कीमतें, वॉल्यूम ग्रोथ, मार्जिन और कंपनी के अगले नतीजे शेयर की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

डिस्क्लेमर:- यह स्टोरी केवल जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN