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CEO का इस्तीफा…भरभरा कर 25% गिरे इस कंपनी के शेयर; ₹69 से ₹52 पर आया भाव

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Equitas स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर गुरुवार को दिन के हाई लेवल ₹69.65 से गिरकर ₹52.04 तक पहुंच गए और 20% लोअर सर्किट पर बंद हुए
  • बैंक के MD & CEO पीएन वासुदेवन के पद छोड़ने की खबर से शेयर पर दबाव आया
  • आइए शेयर में गिरावट की वजह और बैंक के नतीजों की पूरी डिटेल्स जानते हैं

इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक (Equitas Small Finance Bank) के शेयरों में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान शेयर दिन के उच्चतम स्तर ₹69.65 से गिरकर ₹52.04 तक पहुंच गया। इस तरह शेयर में दिन के ऊपरी स्तर से करीब 25.3% की गिरावट आई। बैंक के शेयर 20% के लोअर सर्किट पर भी पहुंच गए। हैरानी की बात यह है कि बैंक ने सितंबर तिमाही में मुनाफे में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की थी। इसके बावजूद निवेशकों ने शेयरों में बिकवाली की। इसकी सबसे बड़ी वजह बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (MD & CEO) पीएन वासुदेवन का पद छोड़ने का फैसला रहा। उनके इस्तीफे की खबर ने बैंक के नतीजों से जुड़ी सकारात्मक खबरों पर दबाव बना दिया।

Equitas SFB के शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?

बैंक ने एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि पीएन वासुदेवन ने निजी और सामाजिक कार्यों पर ध्यान देने के लिए पद छोड़ने की इच्छा जताई है। हालांकि, उनके उत्तराधिकारी के कार्यभार संभालने तक वह MD & CEO के पद पर बने रहेंगे। बैंक के बोर्ड ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और नए प्रमुख की तलाश शुरू करने के लिए नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी को जिम्मेदारी सौंपी है। नए उम्मीदवार की तलाश बैंक के भीतर और बाहर, दोनों जगह की जाएगी।

नए MD & CEO की नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य संबंधित नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी के अधीन होगी, यानी बैंक के अगले प्रमुख की नियुक्ति और नेतृत्व में बदलाव को लेकर निवेशकों को अभी आगे की जानकारी का इंतजार करना होगा। बाजार में इस तरह की खबरों पर प्रतिक्रिया इसलिए भी तेज हो सकती है, क्योंकि बैंक के भविष्य की रणनीति, कारोबार की निरंतरता और प्रबंधन की स्थिरता को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है। हालांकि, शेयर में गिरावट को केवल एक वजह से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।

2007 से Equitas से जुड़े रहे हैं पीएन वासुदेवन

पीएन वासुदेवन का Equitas के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। वह 2007 में माइक्रोफाइनेंस संस्था के रूप में इसकी शुरुआत से ही इससे जुड़े रहे हैं। उनके नेतृत्व में संस्था ने 2016 में स्मॉल फाइनेंस बैंक के रूप में अपना सफर शुरू किया। बैंक के बोर्ड ने संस्था की ग्रोथ और विकास में उनके योगदान को स्वीकार किया है। ऐसे में उनके पद छोड़ने की खबर को निवेशकों ने बैंक के लिए एक बड़े नेतृत्व बदलाव के तौर पर देखा।

Equitas SFB के Q2 नतीजे कैसे रहे?

शेयरों में गिरावट के बीच बैंक के सितंबर तिमाही के नतीजे मजबूत रहे। Equitas Small Finance Bank का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही के ₹24 करोड़ से बढ़कर ₹218 करोड़ हो गया। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। NII वह रकम है, जो बैंक को ब्याज से होने वाली कमाई और ब्याज के रूप में किए गए भुगतान के अंतर से मिलती है।

ग्रॉस NPA 2.29% 2.42%, जून तिमाही
नेट NPA 0.70% 0.
प्रमुख आंकड़े सितंबर तिमाही पिछले साल/जून तिमाही
नेट प्रॉफिट ₹218 करोड़ ₹24 करोड़, सालाना आधार पर
नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ₹1,026 करोड़ ₹774 करोड़, सा71%, जून तिमाही
ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹402 करोड़ ₹405 करोड़, जून तिमाही

बैंक की NII में सालाना आधार पर 32.6% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, ग्रॉस NPA और नेट NPA में जून तिमाही के मुकाबले मामूली सुधार देखने को मिला। NPA यानी बैंक के ऐसे कर्ज जिनकी किस्त या ब्याज का भुगतान तय समय पर नहीं हो रहा है। हालांकि, सभी आंकड़े सकारात्मक नहीं रहे। बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट जून तिमाही के ₹405 करोड़ से घटकर ₹402 करोड़ रह गया। इसमें तिमाही आधार पर 0.7% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, टैक्स खर्च पिछले साल की समान तिमाही के ₹9.4 करोड़ से बढ़कर ₹69.34 करोड़ हो गया। इसलिए मुनाफे में तेज उछाल के साथ बैंक की अन्य वित्तीय स्थितियों को भी समझना जरूरी है।

अनिल कुमार शर्मा को फिर बनाया जाएगा पार्ट-टाइम चेयरमैन

बैंक के बोर्ड ने अनिल कुमार शर्मा को दोबारा पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी भी दी है। उनका नया कार्यकाल 25 अप्रैल 2027 से 24 अप्रैल 2030 तक तीन साल का होगा। हालांकि, यह नियुक्ति भी RBI और अन्य संबंधित नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी पर निर्भर करेगी।

निवेशक अब किन बातों पर रखें नजर?

Equitas SFB के शेयरों में आई तेज गिरावट ने दिखाया कि मजबूत तिमाही नतीजे भी प्रबंधन से जुड़ी अनिश्चितता के असर को हमेशा कम नहीं कर पाते। निवेशकों के लिए अब कुछ अहम बातों पर नजर रखना जरूरी होगा।

  • नए MD & CEO की नियुक्ति: बैंक किसे अगला प्रमुख बनाता है और नियुक्ति को कब मंजूरी मिलती है।
  • आगे के तिमाही नतीजे: NII और नेट प्रॉफिट में बढ़ोतरी कितनी टिकाऊ रहती है।
  • असेट क्वालिटी: GNPA और NNPA में सुधार आगे भी जारी रहता है या नहीं।
  • ऑपरेटिंग प्रॉफिट और खर्च: मुनाफे में बढ़ोतरी के साथ परिचालन लाभ और टैक्स खर्च की दिशा क्या रहती है।

Equitas SFB के सितंबर तिमाही के नतीजे मुनाफे और NII के लिहाज से मजबूत रहे, लेकिन पीएन वासुदेवन के पद छोड़ने की खबर ने शेयर पर दबाव बढ़ा दिया। आगे शेयर की चाल में नए नेतृत्व की नियुक्ति, बैंक के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार की प्रतिक्रिया अहम भूमिका निभा सकते हैं।

नोट:- शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। यह खबर केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसे शेयर खरीदने या बेचने की सलाह न मानें। निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें या वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN