Source :- LIVE HINDUSTAN
दुनिया भर में Layoffs और नौकरी की अनिश्चितता की खबरें सुर्खियों में हैं, महिला ने ChatGPT और AI टूल्स की मदद से अपनी सैलरी 10 लाख से बढ़ाकर 80 लाख रुपए सालाना कर ली। जानिए कैसे:
एक तरफ दुनिया भर में कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ एक महिला की सफलता की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस महिला ने किसी बड़े कॉलेज की डिग्री या महंगे कोर्स की मदद से नहीं, बल्कि ChatGPT और दूसरे AI टूल्स की मदद से अपनी सैलरी 70 लाख सालाना बढ़ा ली। सबसे खास बात यह है कि उसने यह उपलब्धि सिर्फ एक साल के अंदर हासिल की और उसे एक हाई-पेइंग वर्क फ्रॉम होम नौकरी भी मिल गई। महिला का कहना है कि उसने सिर्फ रिज्यूमे भेजने के बजाय AI की मदद से ऐसे प्रोजेक्ट बनाए जो कंपनियों की असली समस्याओं को हल कर सकते थे। यही रणनीति उसकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।
इस महिला का नाम रितु मौर्या है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी करियर जर्नी शेयर करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने AI टूल्स का सही इस्तेमाल करके एक साल के भीतर अपनी सैलरी में 8 गुना बढ़ोतरी हासिल की। रितु के अनुसार, आज के समय में सिर्फ रिज्यूमे या डिग्री के भरोसे नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है। कंपनियां अब ऐसे लोगों को ज्यादा महत्व दे रही हैं जो अपनी स्किल्स को प्रैक्टिकल तरीके से दिखा सकें।
अपनी ड्रीम कंपनी को पहचानें
रितु का कहना है कि सबसे पहले उन्होंने उन कंपनियों की सूची तैयार की जहां वह काम करना चाहती थीं। इसके बाद उन्होंने उन कंपनियों के जॉब डिस्क्रिप्शन को ध्यान से पढ़ा और समझा कि कंपनियां आखिर किस तरह की स्किल्स और अनुभव वाले लोगों को तलाश रही हैं। उनके मुताबिक अधिकांश लोग सिर्फ जॉब पोर्टल पर अप्लाई कर देते हैं, लेकिन यह समझने की कोशिश नहीं करते कि कंपनी को वास्तव में किस समस्या का समाधान चाहिए।
ChatGPT से लिया प्रोजेक्ट आइडिया
जब उन्हें जॉब रोल की जरूरतें समझ आ गईं तो उन्होंने ChatGPT की मदद ली। ChatGPT से उन्होंने पूछा कि संबंधित भूमिका के लिए कौन-से प्रोजेक्ट्स बनाए जा सकते हैं जो उनकी स्किल्स को बेहतर तरीके से दिखा सकें। AI ने उन्हें कई प्रोजेक्ट आइडिया दिए, जिनमें से उन्होंने सबसे उपयोगी और प्रभावी प्रोजेक्ट्स चुने।
AI टूल्स की मदद से बनाए रियल प्रोजेक्ट्स
सिर्फ आइडिया लेने तक ही बात नहीं रुकी। रितु ने ChatGPT और दूसरे AI डेवलपमेंट टूल्स की मदद से उन प्रोजेक्ट्स को तैयार भी किया। उन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट बनाए जो कंपनियों के सामने उनकी क्षमता को सीधे तौर पर दिखा सकें। उनका कहना है कि कंपनियां अब केवल यह नहीं देखतीं कि उम्मीदवार ने क्या पढ़ाई की है, बल्कि यह भी देखती हैं कि वह रियल समस्याओं को कैसे हल कर सकता है।
पहली कोशिश में परफेक्ट नहीं होता कोई प्रोजेक्ट
रितु ने बताया कि शुरुआती प्रोजेक्ट्स उतने अच्छे नहीं थे जितने बाद में बने। उन्होंने लगातार उनमें सुधार किया, नए फीचर्स जोड़े और फीडबैक के आधार पर उन्हें बेहतर बनाया। उनके मुताबिक कई लोग पहली बार में रिजल्ट नहीं मिलने पर हार मान लेते हैं, लेकिन सफलता पाने के लिए लगातार सुधार करते रहना जरूरी है।
Hiring Managers को सीधे भेजा काम
रितु की रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा यही था। उन्होंने सिर्फ नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया बल्कि अपने तैयार किए गए प्रोजेक्ट्स को सीधे Hiring Managers तक पहुंचाया। जब किसी कंपनी के सामने उम्मीदवार का वास्तविक काम पहुंचता है तो उसके इंटरव्यू के लिए चुने जाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यही तरीका रितु के लिए भी फायदेमंद साबित हुआ।
LinkedIn ने भी निभाई बड़ी भूमिका
रितु ने अपने प्रोजेक्ट्स और उपलब्धियों को LinkedIn पर भी शेयर किया। इससे उनकी प्रोफाइल की पहुंच बढ़ी और कई कंपनियों की नजर उन पर पड़ी। आज LinkedIn सिर्फ नौकरी खोजने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा मंच बन चुका है जहां लोग अपनी विशेषज्ञता और काम को दुनिया के सामने पेश कर सकते हैं। रितु मौर्या की कहानी उन लोगों के लिए बड़ी सीख है जो सिर्फ रिज्यूमे भेजकर नौकरी मिलने का इंतजार करते हैं। आज के समय में अपनी स्किल्स को प्रोजेक्ट्स के जरिए दिखाना, LinkedIn पर एक्टिव रहना और AI टूल्स का सही इस्तेमाल करना करियर ग्रोथ का नया फॉर्मूला बनता जा रहा है।
क्यों बदल रहा है नौकरी पाने का तरीका?
AI के आने के बाद नौकरी बाजार तेजी से बदल रहा है। अब सिर्फ डिग्री या अनुभव ही सफलता की गारंटी नहीं हैं। कंपनियां ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं जो नई तकनीकों का इस्तेमाल करके तेजी से काम कर सकें और बेहतर परिणाम दे सकें। एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में ऐसे लोगों की सैलरी में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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