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EMI के कम होने की छोड़ दीजिए उम्मीद, बड़ा संकेत दे दिया RBI

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक ने आज करीब चार साल में पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है और आगे भी बढ़ोतरी करने का संकेत दिया है
  • अगर RBI आगे भी रेपो रेट बढ़ाता है तो इसका असर बैंक लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है

अगर आप आने वाले दिनों में लोन सस्ता होने या EMI कम होने की उम्मीद कर रहे हैं तो आपके लिए यह खबर मायूस करने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज करीब चार साल में पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है और आगे भी बढ़ोतरी करने का संकेत दिया है। RBI का रुख यह संकेत देता है कि महंगाई पर कंट्रोल उसकी प्राथमिकता है और इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कम हो गई है।

रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत का इजाफा

RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार यानी आज रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने नीति रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इस बदलाव से संकेत मिल रहा है कि महंगाई का दबाव बना रहा तो आने वाले समय में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

आम लोगों पर क्या असर होगा?

अगर RBI आगे भी रेपो रेट बढ़ाता है तो इसका असर बैंक लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। खासकर नए होम लोन और फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI बढ़ने की संभावना रहेगी। दूसरी ओर, बैंक FD और अन्य जमा पर ब्याज दरें भी बढ़ा सकते हैं।

हाल फिलहाल रेपो रेट में कटौती की उम्मीद नहीं

आज गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि निकट अवधि में रेपो रेट में कटौती का विकल्प फिलहाल सामने नहीं है। आगे की कार्रवाई आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई-विकास के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। इसका मतलब है कि अगली बैठक में RBI के सामने रेपो रेट बढ़ाने या मौजूदा दर पर रोक बनाए रखने का विकल्प रहेगा।

RBI ने क्यों बढ़ाया रेपो रेट?

छह सदस्यों वाली MPC ने रेपो रेट बढ़ाने के पक्ष में सर्वसम्मति से मतदान किया। यह दिसंबर 2024 में संजय मल्होत्रा के RBI गवर्नर बनने के बाद पहली दर बढ़ोतरी है। RBI का मुख्य फोकस अब बढ़ती महंगाई, कमजोर रुपये और वैश्विक स्तर पर बदली ब्याज दरों की स्थिति पर है।

महंगाई ने बढ़ाई RBI की चिंता

अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई। यह RBI के 2 से 6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के ऊपरी हिस्से की ओर बढ़ रही है। कमजोर मानसून से आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने का जोखिम भी है।

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। गवर्नर ने कहा कि महंगाई के दबाव के शुरुआती संकेत अब ज्यादा व्यापक होते दिख रहे हैं और कोर महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है।

रुपये की कमजोरी भी बड़ी चिंता

भारतीय रुपया इस साल करीब 7 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। रुपये में गिरावट से कच्चे तेल और दूसरी आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है, जिससे घरेलू महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। वहीं 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी करीब तीन साल के हाई पर पहुंच गई।

आगे कितनी बढ़ सकती है ब्याज दर?

RBI ने अभी आगे की दर बढ़ोतरी के लिए कोई निश्चित संख्या या समयसीमा नहीं दी है। गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई डेटा पर निर्भर होगी। हालांकि, बाजार विशेषज्ञ RBI के नए रुख को काफी सख्त मान रहे हैं। एमके ग्लोबल की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा के मुताबिक मौजूदा चक्र में रेपो रेट में कुल 75 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी हो सकती है। नोमुरा की सोनल वर्मा ने भी RBI के फैसले और नीति रुख में बदलाव को ‘हॉकिश’ बताया है।

GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया

महंगाई पर चिंता के बावजूद RBI ने आर्थिक विकास को लेकर अपना अनुमान बढ़ाया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी। RBI के मुताबिक मजबूत घरेलू खपत और निवेश गतिविधियों से आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल रहा है।

बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त पैसा निकालेगा RBI

RBI बैंकिंग सिस्टम में मौजूद सरप्लस लिक्विडिटी को कम करने पर भी जोर दे रहा है। सितंबर में बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी करीब 11 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।

इनपुट्स: ब्लूमबर्ग

SOURCE : LIVE HINDUSTAN