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UPI पर 0.4% चार्ज से घटेंगे लेनदेन? आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा- जानिए

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, फिलहाल यूपीआई लेनदेन में किसी बड़ी गिरावट के संकेत नहीं दिख रहे हैं
  • ऐसे में अब सवाल यह है कि यह नया चार्ज यूपीआई के इस्तेमाल और कारोबारियों पर कितना असर डालेगा

RBI on UPI Charge: यूपीआई पर 0.4 फीसदी एमडीआर यानी चार्ज लगाने की खबर के बाद लोगों के मन में सवाल है कि क्या इससे यूपीआई से होने वाले लेनदेन कम हो जाएंगे? इस सवाल पर अब भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपनी राय साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि मामूली शुल्क लगाए जाने से यूपीआई लेनदेन की संख्या पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

दरअसल, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ यूपीआई लेनदेन पर 0.4 फीसदी एमडीआर लगाने का ऐलान किया है। यह चार्ज ग्राहकों से नहीं, बल्कि कारोबारियों से लिया जाएगा। आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, फिलहाल यूपीआई लेनदेन में किसी बड़ी गिरावट के संकेत नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में अब सवाल यह है कि यह नया चार्ज यूपीआई के इस्तेमाल और कारोबारियों पर कितना असर डालेगा।

पिछले महीने किया गया था ऐलान

बता दें कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई (NPCI) ने पिछले महीने यूपीआई पेमेंट को लेकर एक बड़ा ऐलान किया था। इसके तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ यूपीआई पेमेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाने की बात कही गई थी। यह शुल्क ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि व्यापारियों यानी दुकानदारों और कारोबारियों से लिया जाएगा।

बैंकों से मिलने वाले कर्ज पर RBI

बैंकों से मिलने वाले कर्ज को लेकर भी आरबीआई गवर्नर ने भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बैंकों की कर्ज देने की रफ्तार मजबूत बनी रह सकती है। इससे देश में कारोबार और दूसरी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, आरबीआई की नजर एनबीएफसी यानी गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों पर भी बनी हुई है।मल्होत्रा ने कहा कि हाल के दिनों में बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा नकदी देखने को मिली है। हालांकि, यह स्थिति लंबे समय तक रहने की उम्मीद नहीं है। आरबीआई इस बात पर भी नजर रख रहा है कि ज्यादा नकदी की वजह से एनबीएफसी की कर्ज की गुणवत्ता पर कोई खराब असर न पड़े। फिलहाल केंद्रीय बैंक को ऐसी किसी बड़ी समस्या की आशंका नहीं है।

इन मुद्दों पर भी RBI ने दिया जवाब

विदेशों में रहने वाले भारतीयों से मिलने वाली जमा राशि को लेकर भी आरबीआई गवर्नर ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खास अदला-बदली सुविधा के तहत प्रवासी भारतीयों से करीब 133 अरब डॉलर की जमा राशि जुटाई गई है। उनके मुताबिक, यह भारत की अर्थव्यवस्था और उसकी बुनियादी ताकत में भरोसे को दिखाता है। आरबीआई को उम्मीद है कि बैंक इस पैसे का इस्तेमाल सोच-समझकर करेंगे।

इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर चल रही चुनौतियों का असर भारत में आने वाले विदेशी निवेश और पैसे के फ्लो पर भी पड़ा है। मल्होत्रा ने कहा कि इसी वजह से कैपिटल का फ्लो कुछ कम हुआ है और चालू खाते पर जो दबाव बना है, वह अस्थायी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भारत का पेमेंट बैलेंस फिर से सरप्लस की स्थिति में लौट सकता है।

वहीं, टाटा संस और एनबीएफसी लाइसेंस से जुड़े सवाल पर आरबीआई गवर्नर ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उनसे टाटा संस के एनबीएफसी लाइसेंस वापस करने के रिक्वेस्ट और उसे शेयर बाजार में लिस्ट कराने से जुड़े नियमों को लेकर सवाल पूछा गया था। हालांकि, उन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

(भाषा इनपुट के साथ)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN