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दिल्ली के पॉश इलाके सफदरगंज में बना जिमखाना क्लब इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। आज हम आपको इसके इतिहास और लग्जरी लाइफस्टाइल के बारे में बताने जा रहे हैं।

Gymkhana Club History: ब्रिटिश सरकार के कार्यकाल में क्लब और रईस लोगों की पार्टी में शामिल होना गर्व की बात मानी जाती थी। उस वक्त अंग्रेज क्लब और पार्टी हॉल में सिर्फ उन लोगों को एंट्री देते थे, जो रईस, ऊंचे खान-दान और सरकार में किसी खास पद पर तैनात हो। उस समय भारतीय लोग इन क्लबों में एंट्री नहीं ले सकते थे और बोर्ड पर साफ लिखा होता था कि भारतीय और कुत्तों के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। जिमखाना सिर्फ एक स्पोर्ट्स क्लब नहीं था बल्कि ये सत्ता, रियासतों और अंग्रेज अफसरों के सोशल नेटवर्क का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। इस क्लब में बड़ी पार्टियां, गेम और मीटिंग्स हुआ करती थीं। यहां तक कि इसकी नींव किसी राजा या सरकार ने नहीं, बल्कि कई रियासतों और ब्रिटिश अधिकारियों की मिली-जुली साझेदारी से की गई थी। आज हम आपको इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं कि जिमखाना किसने और क्यों बनवाया था। साथ ही इसका ये नाम क्यों पड़ा और आखिर अब ये इतना चर्चा में क्यों आ गया है।

किसने और क्यों बनवाया?

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 2 जुलाई 1913 को ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के नाम से हुई थी। इस क्लब को किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि अंग्रेज अफसरों, सेना अधिकारियों और एलीट वर्ग ने मिलकर बनवाया था। इसके पहले प्रेसिडेंट ब्रिटिश अधिकारी स्पेंसर हरकोर्ट बटलर बने थे, जबकि बाकी संस्थापक सदस्यों को क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप दी गई थी। उस समय भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट की जा रही थी। ऐसे में ब्रिटिश अधिकारियों को खेलने, मिलने-जुलने और सोशल गैदरिंग के लिए एक खास क्लब की जरूरत महसूस हुई। इसी वजह से दिल्ली के पॉश सफदरजंग रोड इलाके में करीब 27.3 एकड़ जमीन पर जिमखाना क्लब बनाया गया। उस दौर में इस जमीन का सालाना किराया सिर्फ 1000 रुपये तय किया गया था। हालांकि, लीज में एक अहम शर्त भी जोड़ी गई थी, जिसके तहत सरकार जरूरत पड़ने पर कभी भी यह जमीन वापस ले सकती थी।

किसने किया डिजाइन

दिल्ली जिमखाना क्लब की मौजूदा इमारत का डिजाइन ब्रिटिश आर्किटेक्ट Robert Tor Russell ने तैयार किया था। वही आर्किटेक्ट नई दिल्ली के कई फेमस ब्रिटिशकालीन ढांचों, खासकर कनॉट प्लेस के डिजाइन के लिए भी जाने जाते हैं। क्लब की इमारत 1930 के दशक में बनकर तैयार हुई थी और इसका निर्माण कॉन्ट्रैक्टर सर तेजा सिंह मलिक ने करवाया था।

अंदर है काफी लग्जरी लाइफस्टाइल

दिल्ली जिमखाना के अंदर लग्जरी फील करने के लिए हर सुविधाजनक चीजों को बनवाया गया था। यह क्लब ब्रिटिश दौर में एलीट सोशल और स्पोर्ट्स क्लब के तौर पर बनाया गया था, इसलिए यहां स्पोर्ट्स से लेकर पार्टी और ट्रांजिट स्टे तक की सुविधाएं दी गई हैं। चलिए बताते हैं इसके अंदर क्या-क्या है-

-स्विमिंग पूल

-26 ग्रास टेनिस कोर्ट, हार्ड कोर्ट और फ्लेक्स कुशन कोर्ट

-स्क्वैश कोर्ट

-बैडमिंटन और बास्केटबॉल कोर्ट

-बिलियर्ड्स, रम्मी और ब्रिज रूम

-जिम और हेल्थ क्लब

-रेस्टोरेंट, बार और लाउंज

-लाइब्रेरी और साइबर कैफे

-बॉलरूम और पार्टी/बैंक्वेट हॉल

-43 ट्रांजिट रूम यानी गेस्ट ठहरने की सुविधा

-ब्यूटी पार्लर, बार्बर और मसाज पार्लर

स्वीमिंग पूल के पीछे दिलचस्प कहानी

जिमखाना में मौजूद स्वीमिंग पूल भी काफी लग्जरी फील देता है। दिल्ली जिमखाना क्लब का स्विमिंग पूल तत्कालीन वायसराय लॉर्ड विलिंगडन की पत्नी लेडी विलिंगडन ने बनवाया था। 1930 के दशक में क्लब और वायसराय हाउस दोनों में स्विमिंग पूल नहीं था। लेडी विलिंगडन को स्वीमिंग करने का काफी शौक था, इसलिए उन्होंने क्लब में पूल और स्क्वैश कोर्ट बनवाने के लिए उस समय करीब 21 हजार रुपये दान दिए थे। जो काफी बड़ी रकम थी। बाद में उनके सम्मान में इसका नाम Lady Willingdon Swimming Bath रखा गया था।

बिना जिम के आखिर जिमखाना क्यों पड़ा नाम?

आपने जिमखाना क्लब में मौजूद सभी चीजों की लिस्ट देख ली होगी, इसमें सबकुछ शामिल है सिर्फ जिम नहीं है। इसके बाद भी सभी लोग इसे जिमखाना क्लब के नाम से जानते हैं। इतिहासकारों का कहना है कि जिमखाना नाम फारसी और हिंदी शब्द से मिलकर बना है। गेंदखाना या जमातखाना से मिलाकर इसे बनाया गया है। गेंदखाना का मतलब है वह जगह जहां गेंद के खेल खेले जाते हों और जमातखाना का मतलब जहां लोग मिलते-जुलते हों। अंग्रेज जमातखाना या अन्य शब्दों का सही उच्चारण नहीं कर पाए और वह इसे जिमखाना बोलने लगे। बस ऐसे ही इसका नाम जिमखाना क्लब पड़ गया और तब से वही नाम लिया जाता है।

क्यों हुआ विवाद

केंद्र सरकार ने क्लब की जमीन को खाली करने का नोटिस दिया है। सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित यह इलाका हाई-सिक्योरिटी जोन में आता है और भविष्य में इस जमीन की जरूरत सरकारी कामों के लिए पड़ सकती है। सरकार का कहना है कि इस इलाके की जमीन रक्षा और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण इस्तेमाल के लिए चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा कि अगर जिमखाना क्लबपरिसर खाली नहीं भी करता है, तब भी सरकार कानून के दायरे में रहकर ही आगे की कार्रवाई करेगी।

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