Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- होम लोन (Home Loan) लेने वालों के लिए ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी लंबे समय में बड़ा आर्थिक असर डाल सकती है
- जब बैंक होम लोन की ब्याज दर बढ़ाते हैं, तो कर्ज लेने वालों के सामने 2 विकल्प होते हैं
- आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं
होम लोन (Home Loan) लेने वालों के लिए ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी लंबे समय में बड़ा आर्थिक असर डाल सकती है। जब बैंक होम लोन की ब्याज दर बढ़ाते हैं, तो कर्ज लेने वालों के सामने दो विकल्प होते हैं। पहला हर महीने ज्यादा EMI चुकाकर लोन की पुरानी अवधि बनाए रखें। दूसरा EMI को लगभग पहले जितना रखते हुए लोन चुकाने की अवधि बढ़वा लें। पहली स्थिति में हर महीने बजट पर दबाव बढ़ता है, जबकि दूसरी में कर्ज चुकाने में ज्यादा समय लगता है और कुल ब्याज का खर्च बढ़ सकता है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।
कौन-सा विकल्प आपके लिए बेहतर रहेगा?
इसका जवाब आपकी सैलरी, हर महीने के खर्च, दूसरे कर्ज, बचत और होम लोन की बची हुई अवधि पर निर्भर करता है। इस पर लाइव मिंट ने एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस (Godrej Housing Finance) के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO मेहरनोश टाटा बताते हैं कि जिन लोगों की आमदनी स्थिर है और जिनके मासिक बजट में पर्याप्त गुंजाइश है, वे EMI बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, जिनके लिए हर महीने ज्यादा किस्त चुकाना मुश्किल है, उनके लिए लोन की अवधि बढ़ाना व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
₹50 लाख के होम लोन पर 0.25% ब्याज का फर्क
मान लीजिए आपने 20 साल के लिए ₹50 लाख का होम लोन लिया है और आपकी ब्याज दर 8.50% सालाना है। अब बैंक ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर देता है। ऐसे में आपकी EMI और कुल ब्याज का खर्च कैसे बदलेगा, इसे इन आंकड़ों से समझ सकते हैं।
उदाहरण:- ₹50 लाख का होम लोन, 20 साल की अवधि
पहले ब्याज दर- 8.50%
मासिक EMI- ₹43,391
बढ़ी हुई ब्याज दर- 8.75%
मासिक EMI- ₹44,186
हर महीने अतिरिक्त EMI- ₹795
20 साल में कुल ब्याज (पहले)- ₹54.14 लाख
20 साल में कुल ब्याज (बाद में)- ₹56.05 लाख
ये उदाहरण में दिए गए आंकड़े हैं। वास्तविक EMI और ब्याज का खर्च बकाया मूलधन, बची हुई अवधि और लोन की शर्तों के अनुसार अलग हो सकता है।
इस उदाहरण में ब्याज दर बढ़ने के बाद EMI हर महीने ₹795 बढ़ जाती है। पहली नजर में यह रकम बहुत बड़ी नहीं लग सकती, लेकिन लंबे समय तक भुगतान करने पर कुल ब्याज में करीब ₹1.91 लाख का अंतर आ सकता है। इसलिए ब्याज दर में बदलाव होने पर केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि EMI कितनी बढ़ रही है। यह भी समझना जरूरी है कि नए हिसाब से पूरे लोन पर कितना ब्याज चुकाना पड़ेगा।
विकल्प 1:- EMI बढ़ाएं और लोन की अवधि वही रखें
अगर आपकी सैलरी नियमित आती है और जरूरी खर्चों के बाद हर महीने पर्याप्त रकम बचती है, तो EMI बढ़ाना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे आप लोन की मूल अवधि को बनाए रख सकते हैं और बढ़ी हुई ब्याज दर के बावजूद कर्ज चुकाने की रफ्तार पर नियंत्रण रख सकते हैं।
होम लोन में EMI का एक हिस्सा मूलधन और दूसरा हिस्सा ब्याज चुकाने में जाता है। जब मूलधन तेजी से कम होता है, तो आगे लगने वाला ब्याज भी कम हो सकता है। इसलिए अधिक EMI चुकाने से लंबे समय में कुल ब्याज के खर्च को सीमित रखने में मदद मिलती है।
हालांकि, EMI बढ़ाने से पहले यह जरूर देखें कि आपके पास घर के जरूरी खर्च, बच्चों की पढ़ाई, बीमा, दूसरे लोन और अचानक आने वाली जरूरतों के लिए पर्याप्त पैसा बच रहा है या नहीं।
किन लोगों के लिए यह विकल्प सही हो सकता है?
- जिनकी सैलरी स्थिर है और भविष्य में आय बढ़ने की संभावना है।
- जिनके मासिक बजट में अतिरिक्त EMI चुकाने की गुंजाइश है।
- जो लोन की अवधि बढ़ाने के बजाय तय समय पर कर्ज चुकाना चाहते हैं।
- जिनके पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड है।
विकल्प 2: EMI वही रखें और लोन की अवधि बढ़वा लें
अगर आपकी आमदनी सीमित है या पहले से दूसरे लोन की किस्तें चल रही हैं, तो EMI बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में बैंक से लोन की अवधि बढ़ाने के विकल्प पर बात की जा सकती है। इसका फायदा यह है कि हर महीने की किस्त पर तत्काल दबाव कम हो सकता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। लोन ज्यादा समय तक चलता रहेगा, इसलिए आपको लंबे समय तक ब्याज चुकाना पड़ सकता है।
दिए गए उदाहरण के अनुसार, ₹50 लाख के होम लोन में EMI को पहले के स्तर पर बनाए रखने और अवधि बढ़ाने पर कुल चुकाई जाने वाली रकम लगभग ₹59.41 लाख तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में अवधि करीब 12–13 महीने बढ़ सकती है। इसलिए सिर्फ EMI कम रखने के लिए लोन की अवधि बढ़ाने का फैसला नहीं करना चाहिए। बैंक से दोनों विकल्पों का नया रीपेमेंट शिड्यूल लेकर तुलना करना ज्यादा समझदारी होगी।
EMI बढ़ाना बेहतर या अवधि बढ़ाना? ऐसे करें फैसला
| तुलना का आधार | EMI बढ़ाना | लोन की अवधि बढ़ाना |
|---|---|---|
| हर महीने का खर्च | बढ़ेगा | अपेक्षाकृत स्थिर रह सकता है |
| कर्ज चुकाने का समय | मूल अवधि के अनुसार | बढ़ सकता है |
| कुल ब्याज | सामान्यतः कम रखने में मदद | बढ़ सकता है |
| मासिक बजट पर दबाव | ज्यादा | कम |
| किसके लिए उपयोगी | स्थिर आय और अतिरिक्त बचत वाले | सीमित बजट या अनियमित आय वाले |
यह तुलना सामान्य स्थिति पर आधारित है। वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि बैंक ब्याज दर बदलने के बाद EMI में बदलाव करता है, अवधि बढ़ाता है या दोनों में संशोधन करता है।
RBI के नियम: ब्याज दर बढ़ने पर आपके पास क्या विकल्प?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2023 में फ्लोटिंग रेट वाले EMI आधारित लोन के लिए एक फ्रेमवर्क जारी किया था। इसके तहत रेगुलेटेड लेंडर्स को ब्याज दर में बदलाव का EMI या लोन की अवधि पर पड़ने वाला असर बताना होता है और उधारकर्ताओं को उपलब्ध विकल्पों की जानकारी देनी होती है।
इन विकल्पों में आम तौर पर शामिल हैं।
- EMI बढ़ाना: लोन की अवधि को मूल समय के करीब बनाए रखने के लिए।
- अवधि बढ़ाना: मासिक किस्त को संभालने योग्य स्तर पर रखने के लिए।
- दोनों में बदलाव: EMI और अवधि के बीच संतुलन बनाना।
- प्रीपेमेंट करना: अतिरिक्त रकम देकर बकाया मूलधन कम करना।
- फिक्स्ड ब्याज दर का विकल्प: अगर बैंक की नीति और लोन की शर्तें इसकी अनुमति देती हैं।
ध्यान रखें कि फिक्स्ड रेट पर जाने की सुविधा, उसके चार्ज और लागू शर्तें हर लेंडर में अलग हो सकती हैं। इसलिए कोई विकल्प चुनने से पहले बैंक से लिखित जानकारी लेना बेहतर है।
क्या होम लोन का कुछ हिस्सा पहले चुका देना चाहिए?
अगर आपके पास बोनस, अतिरिक्त कमाई या बचत के रूप में कुछ रकम उपलब्ध है, तो आप आंशिक प्रीपेमेंट पर विचार कर सकते हैं। इससे बकाया मूलधन कम होता है और आगे लगने वाले ब्याज को घटाने में मदद मिल सकती है। लेकिन, इसके लिए अपनी पूरी बचत इस्तेमाल करना सही नहीं होगा। नौकरी जाने, मेडिकल जरूरत या किसी दूसरी आपात स्थिति में नकदी की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए प्रीपेमेंट से पहले पर्याप्त इमरजेंसी फंड बनाए रखना जरूरी है। अगर आपके पास फिक्स्ड ब्याज दर पर जाने का विकल्प है, तो उसकी ब्याज दर, कन्वर्जन फीस और दूसरी शर्तों की तुलना भी करें। सिर्फ भविष्य में EMI स्थिर रखने की उम्मीद में अतिरिक्त खर्च उठाना हमेशा फायदेमंद नहीं होता।
होम लोन लेने वालों के लिए सबसे जरूरी सलाह
ब्याज दर बढ़ने के बाद EMI बढ़ानी है या लोन की अवधि, इसका कोई एक जवाब सभी लोगों के लिए सही नहीं है। अगर आपकी आय स्थिर है और बजट में पर्याप्त जगह है, तो EMI बढ़ाकर मूलधन जल्दी चुकाना लंबे समय में फायदेमंद हो सकता है। वहीं, अगर मासिक खर्च पहले से ज्यादा हैं, तो अवधि बढ़ाकर तत्काल आर्थिक दबाव कम करना बेहतर हो सकता है।
फैसला लेने से पहले बैंक से दोनों विकल्पों में EMI, बची हुई अवधि और कुल ब्याज का लिखित हिसाब मांगें। इसके बाद अपनी आय, जरूरी खर्च और इमरजेंसी बचत को ध्यान में रखकर निर्णय लें। सबसे अच्छा विकल्प वही है, जिसमें आपकी मासिक आर्थिक स्थिति भी संभली रहे और पूरे लोन की लागत भी कंट्रोल में रहे।
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