Source :- LIVE HINDUSTAN
Income Tax Return Filing 2026: अगर आपने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 31 जुलाई की आखिरी तारीख से पहले अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर दिया था, लेकिन बाद में उसमें कोई गलती या जानकारी छूटने का पता चला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इनकम टैक्स कानून ऐसे मामलों में पात्र टैक्सपेयर्स को रिटर्न में सुधार करने का मौका देता है। इसे रिवाइज्ड रिटर्न कहा जाता है। इसकी मदद से टैक्सपेयर्स अपनी पहले से दाखिल ITR में हुई गलतियों को ठीक कर सकते हैं। इसमें इनकम की जानकारी छूट जाना, गलत डिडक्शन क्लेम करना, बैंक खाते की गलत डिटेल देना या अन्य रिपोर्टिंग संबंधी गलतियों को ठीक किया जा सकता है।
कैसे फाइल करें रिवाइज्ड रिटर्न?
नवराज ग्लोबल एडवाइजर्स के टैक्स कंट्रोवर्सी एंड डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन टैक्स एक्सपर्ट निशांत शंकर के अनुसार, अगर बेसिक आईटीआर तय समय सीमा के अंदर दाखिल की गई है, तो इनकम टैक्से अधिनियम 1961 की धारा 139(5) के तहत उसे ठीक किया जा सकता है।
सभी जानकारी कर लें पहले चेक
इसके लिए टैक्सपेयर्स को ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करनी होगी। हालांकि, उन्होंने सलाह दी है कि रिवाइज्ड रिटर्न भरते समय सभी जानकारियां पूरी तरह सही और वैरिफाई होनी चाहिए। बार-बार रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने या बड़ी गलती होने पर टैक्स विभाग की ओर से एक्स्ट्रा जांच की संभावना बढ़ सकती है।
रिवाइज्ड रिटर्न भरने से पहले क्या करें चेक?
एक्सपर्ट का कहना है कि रिवाइज्ड आईटीआर जमा करने से पहले कुछ अहम डॉक्यूमेंट का मिलान जरूर कर लें। इनमें फॉर्म 16 एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) और फॉर्म 26AS शामिल हैं। इन डॉक्यूमेंट्स में दर्ज इनकम, टैक्स क्रेडिट और अन्य फाइनेंशियल जानकारी का सही मिलान करने के बाद ही रिवाइज्ड रिटर्न सबमिट करें।
आज के समय में इनकम टैक्स विभाग डेटा मैचिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिजिटल वेरिफिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में रिटर्न में दी गई हर जानकारी का सटीक और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। सही जानकारी के साथ रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से भविष्य में टैक्स नोटिस या विवाद की आशंका भी काफी कम हो जाती है।
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