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No-Cost EMI स्कीम वास्तव में मुफ्त होती है? खरीदारी से पहले पढ़ें यह खबर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • No- Cost EMI: मोबाइल, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और दूसरे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए कंपनियां और बैंक अक्सर नो-कॉस्ट ईएमआई का ऑफर देते हैं
  • नो-कॉस्ट ईएमआई को मुफ्त मानने की गलती न करें
  • खरीदारी से पहले नकद कीमत, छूट, कुल ईएमआई पेमेंट, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क की तुलना करें

अमेजन हो या फ्लिपकार्ट या फिर मीशो ही क्यों न हो, लगभग सभी ई-कॉमर्स कंपनियों पर फेस्टिव ऑफर शुरू हो गए है। इसमें प्रोडक्ट्स पर 80% तक की छूट ग्राहकों को लुभाती है। वहीं, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां और विक्रेता लगातार “No-Cost EMI” यानी बिना लागत वाली किस्त स्कीम का प्रचार भी कर रहे हैं। मोबाइल, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और दूसरे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए कंपनियां और बैंक अक्सर नो-कॉस्ट ईएमआई का ऑफर देते हैं।

क्या नो-कॉस्ट ईएमआई पूरी तरह मुफ्त होती है?

सुनने में यह ऑफर बहुत सुविधाजनक लगता है। महंगा सामान बिना किसी अतिरिक्त बोझ के किस्तों में, लेकिन असल में यह स्कीम पूरी तरह मुफ्त नहीं होती। इसकी भरपाई ग्राहक को दी जाने वाली छूट से की जाती है और अंतिम पेमेंट ग्राहक ही करता है।

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसमें ग्राहक को अलग से ब्याज चुकाना नहीं पड़ता, लेकिन प्रोसेसिंग फीस, सुविधा शुल्क, टैक्स और कैश डिस्काउंट छोड़ने जैसी शर्तें खरीदारी को महंगा बना सकती हैं। ऐसे में लोन लेने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच करना जरूरी है।

कैसे काम करता है यह खेल?

मान लीजिए आप एक लाख रुपए की कोई वस्तु खरीद रहे हैं। कैश पेमेंट पर आपको 6,000 रुपये की छूट मिल सकती है, लेकिन अगर आप नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते हैं, तो यह छूट आपको नहीं मिलेगी। यही छूट असल में आपकी ब्याज बन जाती है। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस, प्री-क्लोजर चार्ज और जीएसटी जैसे चार्जेज भी आपको चुकाने पड़ सकते हैं। यानी जो स्कीम “बिना लागत” कही जाती है, उसमें ग्राहक की जेब से कई तरह के खर्च निकलते हैं।

सिर्फ ईएमआई नहीं, कुल खर्च देखें

जीरो-कॉस्ट ईएमआई या नो-कॉस्ट ईएमआई लेने से पहले प्रोसेसिंग फीस, अन्य शुल्क और लागू टैक्स की जानकारी लें। यह भी पता करें कि समय से पहले लोन चुकाने पर कोई चार्ज लगेगा या नहीं। कई बार ब्याज का खर्च उत्पाद की कीमत में शामिल हो सकता है। इसलिए ईएमआई पर मिलने वाली कीमत की तुलना कैश भुगतान की कीमत से जरूर करें।

लोन एग्रीमेंट की शर्तें ध्यान से पढ़ें

लोन स्वीकार करने से पहले एग्रीमेंट में लॉक-इन पीरियड, समय से पहले लोन बंद करने के शुल्क, देरी से भुगतान की पेनाल्टी और ईएमआई बाउंस होने पर लगने वाले चार्ज की जांच करें। यह भी समझें कि जीरो-कॉस्ट ऑफर के कारण नकद खरीदारी पर मिलने वाला डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस या त्योहारों का विशेष ऑफर तो नहीं छूट रहा है।

कैश खरीदारी है फायदेमंद

कैश खरीदारी आमतौर पर ज्यादा फायदेमंद होती है। इसमें विक्रेता की ओर से मिलने वाली छूट का सीधा फायदा ग्राहक को मिलता है और सामान सस्ता पड़ता है। हालांकि, कुछ मामलों में विक्रेता खुद ब्याज की राशि वहन करता है, तब ग्राहक पर सीधा बोझ नहीं पड़ता। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता।

क्या करें ग्राहक?

नो-कॉस्ट ईएमआई को मुफ्त मानने की गलती न करें। खरीदारी से पहले नकद कीमत, छूट, कुल ईएमआई भुगतान, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क की तुलना करें। अगर नकद खरीदारी में ज्यादा बचत हो रही है, तो उसे प्राथमिकता दें। जल्दबाजी में लिए गए फैसले से बचें और अपनी जरूरत व बजट के अनुसार ही ईएमआई या कैश पेमेंट चुनें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN