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NPS में निवेश करने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! PM मोदी से जांच की मांग, ये है पूरा मामला

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर NPS ट्रस्ट के कामकाज की CAG से जांच कराने की मांग की है
  • संगठन ने करीब ₹17,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश, UPS पूल कॉर्पस में ₹800 करोड़ की राशि के निवेश में कथित देरी और संभावित हितों के टकराव पर सवाल उठाए हैं

NPS Investment: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन और रिटर्न को लेकर नया विवाद सामने आया है। ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर NPS ट्रस्ट के कामकाज की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पेंशन फंड के मैनेजमेंट में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं, लापरवाही और हितों के टकराव से जुड़ी समस्याएं हैं। हालांकि, ये आरोप कर्मचारी संगठन की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

पटेल ने मांग की है कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से NPS ट्रस्ट का ऑडिट कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शेयर बाजार के कमजोर प्रदर्शन के कारण कई कर्मचारियों के NPS निवेश पर निगेटिव रिटर्न का असर पड़ा है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों के योगदान पर कम से कम 8.25% सालाना रिटर्न की गारंटी देने पर विचार करना चाहिए। यह दर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े ब्याज के संदर्भ में रखी गई है, लेकिन NPS पर ऐसी गारंटी फिलहाल लागू होने की पुष्टि नहीं है।

स्टार्टअप में ₹17,000 करोड़ निवेश पर सवाल

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, AINPSEF ने अपने पत्र में NPS Day यानी 1 अक्टूबर 2026 को वैकल्पिक निवेश फंड (AIF), प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल और स्टार्टअप में करीब 17,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना पर सवाल उठाए हैं। पटेल के मुताबिक, इस तरह के निवेश में जोखिम हो सकता है और कर्मचारियों को मिलने वाले रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने Alteria Capital और Trifecta Capital जैसी संस्थाओं का उल्लेख करते हुए निवेश संबंधी फैसलों की जांच कराने की मांग की है।

पत्र में यह भी दावा किया गया है कि NPS ट्रस्ट ने उस दिन Trifecta और Alteria से जुड़े निवेश के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रतीकात्मक चेक प्रस्तुत किया था। कर्मचारी संगठन का सवाल है कि जब कर्मचारियों के पेंशन फंड पर न्यूनतम रिटर्न सुनिश्चित नहीं है, तो इतनी बड़ी रकम जोखिम वाले निवेश विकल्पों में लगाने का आधार क्या है? इस मामले में निवेश की वास्तविक शर्तों, मंजूरियों और जोखिम प्रबंधन की जानकारी सामने आना अहम होगा।

₹800 करोड़ निवेश में देरी से नुकसान का आरोप

पत्र में एक अन्य मुद्दा 800 करोड़ रुपये की उस राशि का है, जिसे वित्त मंत्रालय ने 8 जुलाई 2026 को UPS (Unified Pension Scheme) पूल कॉर्पस में जमा किया था। पटेल का आरोप है कि यह रकम 16 जुलाई तक निवेश नहीं की गई, जिससे ब्याज के रूप में 2 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। उन्होंने पूछा है कि इस कथित नुकसान की भरपाई कौन करेगा और इसके लिए किसकी जवाबदेही तय होगी।

AINPSEF ने NPS ट्रस्ट, पेंशन फंड मैनेजरों और सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों को दी जाने वाली फीस पर भी सवाल उठाए हैं। पत्र के अनुसार, कर्मचारियों के पेंशन फंड से हर साल NPS ट्रस्ट को करीब 50 करोड़ रुपये, पेंशन फंड मैनेजरों को लगभग 2,000 करोड़ रुपये और रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों को करीब 250 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। संगठन का आरोप है कि इतनी बड़ी फीस के बावजूद निवेश के नतीजों और जवाबदेही की पर्याप्त समीक्षा नहीं हो रही है। इन रकमों और दावों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

NPS ट्रस्ट में हितों के टकराव का आरोप

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, मनजीत सिंह पटेल ने NPS ट्रस्ट के अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा की विभिन्न संस्थाओं में भूमिकाओं को लेकर भी हितों के टकराव की आशंका जताई है। पत्र में CRISIL और K-Fintech से जुड़ी भूमिकाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पेंशन फंड की निगरानी, बेंचमार्क और रिकॉर्ड प्रबंधन से जुड़े पदों के बीच संभावित हितों के टकराव की जांच होनी चाहिए। हालांकि, यह संगठन की ओर से लगाया गया आरोप है, जिसे किसी नियम के उल्लंघन का सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

पत्र में MARS (Minimum Assured Return Scheme) लागू नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है। पटेल के मुताबिक, CAG की 2020 की रिपोर्ट में सुझाए गए उपायों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने जनवरी 2026 में MARS के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट या उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की भी मांग की है।

UPS पेंशन पाने में देरी का मुद्दा भी उठाया

AINPSEF ने दावा किया है कि UPS के तहत पेंशन पाने वाले कुछ कर्मचारियों की फाइलें छोटी-मोटी कमियों, जैसे पिन कोड या ईमेल पते की त्रुटियों के कारण वापस की जा रही हैं। संगठन के अनुसार, इससे कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन मिलने में देरी हो रही है। उसने संबंधित अधिकारियों से प्रक्रिया आसान बनाने और लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने की मांग की है।

PM मोदी से AINPSEF की 6 बड़ी मांगें

कर्मचारी संगठन ने प्रधानमंत्री से मुख्य रूप से छह कदम उठाने की अपील की है, जो नीचे दी गई हैं।

1- CAG से जांच:- NPS ट्रस्ट के कामकाज, निजी सलाहकारों की नियुक्ति और AIF निवेश का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए।

2- NPS ट्रस्ट को भंग करना:- संगठन ने ट्रस्ट को तत्काल भंग कर पेंशन फंड की निगरानी किसी वैधानिक सार्वजनिक संस्था या CAG को सौंपने की मांग की है।

3- नुकसान की भरपाई:- UPS पूल कॉर्पस की 800 करोड़ रुपये की राशि के निवेश में कथित देरी से हुए नुकसान की भरपाई की जाए।

4- 8.25% न्यूनतम रिटर्न:- कर्मचारियों के योगदान पर EPFO की तर्ज पर न्यूनतम रिटर्न सुनिश्चित किया जाए।

5- NPS या UPS चुनने का विकल्प:- कर्मचारियों को सेवा अवधि के दौरान दोनों योजनाओं में से अपनी पसंद चुनने की सुविधा मिले।

6- हितों के टकराव पर रोक:- संबंधित अधिकारियों और निजी संस्थाओं के बीच संभावित हितों के टकराव को दूर कर जवाबदेही तय की जाए।

फिलहाल, ये मांगें कर्मचारी संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र का हिस्सा हैं। NPS ट्रस्ट या संबंधित नियामक की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और सरकार की ओर से किसी कार्रवाई की पुष्टि होने के बाद ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। NPS में निवेश बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए 8.25% रिटर्न की मांग को मौजूदा गारंटी के रूप में नहीं समझना चाहिए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN