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NPS Diwas 2026: NPS में देरी पड़ सकती है भारी? एक्सपर्ट ने बताया 25 और 40 की उम्र में निवेश का असल फर्क

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • रिटायरमेंट के लिए NPS में निवेश शुरू करने की उम्र आपके पूरे फाइनेंशियल प्लान को प्रभावित कर सकती है
  • 25 साल की उम्र में शुरुआत करने पर कंपाउंडिंग और लंबे इंवेस्टमेंट हॉरिजन का फायदा मिलता है, जबकि 40 की उम्र में शुरुआत करने वालों को समान रिटायरमेंट कॉर्पस के लिए ज्यादा देना पड़ सकता है

NPS Diwas 2026: हर इंसान के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग का समय अलग हो सकता है, लेकिन निवेश जितनी जल्दी शुरू किया जाए, उतना फायदा लंबे समय में मिल सकता है। मतलब कि जितना जल्दी आप इंवेस्टमेंट शुरू करेंगे, उतना ही ज्यादा आप उसका लाभ भी उठा सकेंगे। जहां एक तरफ 25 साल की उम्र में NPS शुरू करने वाले व्यक्ति के पास पैसा बढ़ने और कंपाउंडिंग का लाभ लेने के लिए कई दशक होते हैं। वहीं, दूसरी तरफ 40 साल की उम्र में शुरुआत करने पर रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने के लिए समय कम बचता है, इसलिए मासिक निवेश ज्यादा रखना पड़ सकता है। 1 अक्टूबर को NPS दिवस के मौके पर एक्सपर्ट ने अलग-अलग उम्र में नेशनल पेंशन सिस्टम की प्लानिंग को समझाया है। आइए इस प्लानिंग को जरा विस्तार से समझते हैं।

25 साल की उम्र में शुरुआत का क्या फायदा?

PPFAS पेंशन फंड मैनेजर्स के CEO पृथ्वीनाथ रेड्डी के मुताबिक, कम उम्र में NPS शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा लंबा इंवेस्टमेंट हॉरिजन है। युवा निवेशक लंबे समय तक इक्विटी जैसे ग्रोथ-ओरिएंटेड असेट्स में निवेश रख सकते हैं और बाजार के छोटे उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए उनके पास ज्यादा समय होता है। हालांकि, असेट एलोकेशन सिर्फ उम्र देखकर तय नहीं होना चाहिए। एक्सिस पेंशन फंड (Axis Pension Fund) के MD & CEO सुमित शुक्ला के अनुसार रिस्क एपेटाइट, रिटायरमेंट गोल, इनकम और व्यक्ति की पूरी फाइनेंशियल स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

40 की उम्र में NPS शुरू कर रहे हैं तो क्या?

अगर किसी ने 40 साल की उम्र तक रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) शुरू नहीं की है, तो इसका मतलब यह नहीं कि बहुत देर हो गई। लेकिन समान रिटायरमेंट कॉर्पस (Retirement Corpus) हासिल करने के लिए उसे अपेक्षाकृत ज्यादा रकम निवेश करनी पड़ सकती है। जैसे-जैसे रिटायरमेंट (Retirement) करीब आता है, पोर्टफोलियो में अपेक्षाकृत स्टेबल असेट्स का हिस्सा बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। वहीं, 25 साल की उम्र में कम रकम से शुरुआत करके इनकम बढ़ने के साथ कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़ाना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है।

सैलरी कम है तो कैसे शुरू करें इंवेस्टमेंट?

युवा नौकरीपेशा लोगों के सामने अक्सर शुरुआती सालों में कम सैलरी और कई दूसरे खर्च होते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि बड़ी रकम का इंतजार करने के बजाय छोटी लेकिन नियमित कॉन्ट्रिब्यूशन से शुरुआत करना बेहतर हो सकता है। हालांकि, एमरजेंसी फंड और जरूरी हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस जैसी बुनियादी फाइनेंशियल जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सैलरी बढ़ने के साथ NPS कॉन्ट्रिब्यूशन को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।

होम लोन और बच्चों की पढ़ाई के बीच रिटायरमेंट न भूलें

30-40 की उम्र में होम लोन, बच्चों की एजुकेशन और परिवार के दूसरे खर्च रिटायरमेंट इंवेस्टमेंट पर दबाव डाल सकते हैं। ऐसे समय में NPS पूरी तरह बंद करने के बजाय कॉन्ट्रिब्यूशन को कुछ समय के लिए कम किया जा सकता है और बड़ी लायबिलिटी खत्म होने के बाद इसे बढ़ाया जा सकता है। रिटायरमेंट ऐसा फाइनेंशियल गोल है, जिसके लिए भविष्य में लोन मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। सैलरीड एम्पलॉयी के लिए एम्पलॉयर NPS कॉन्ट्रिब्यूशन भी रिटायरमेंट प्लानिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

पहले तय करें कितना रिटायरमेंट कॉर्पस चाहिए?

NPS में हर महीने कितना निवेश करना है, यह केवल आज की इनकम देखकर तय नहीं करना चाहिए। पहले अनुमान लगाएं कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने कितने खर्च की जरूरत होगी और इंफ्लेशन को ध्यान में रखकर कुल कॉर्पस कितना होना चाहिए। इसके बाद लक्ष्य के हिसाब से मंथली कॉन्ट्रिब्यूशन तय की जा सकती है। रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) को समय-समय पर रिव्यू करना भी जरूरी है, क्योंकि इनकम, फैमली रिस्पॉन्सिबिलिटी और फाइनेंशियल गोल्स बदल सकते हैं।

NPS को EPF, PPF और म्युच्युअल फंड्स (Mutual Funds) का विकल्प मानना जरूरी नहीं है। EPF और PPF अपेक्षाकृत स्थिर निवेश का आधार दे सकते हैं, जबकि म्युच्युअल फंड्स (Mutual Funds) अलग-अलग फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। NPS का मुख्य उद्देश्य रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि में कॉर्पस (Corpus) तैयार करना है। इसलिए इन सभी निवेश विकल्पों को एक-दूसरे के मुकाबले चुनने के बजाय फाइनेंशियल प्लान (Financial Plan) में उनकी अलग-अलग भूमिका तय करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN