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NSE IPO की लिस्टिंग कॉम्पिटिटर स्टॉक एक्सचेंज पर ही क्यों, जान लीजिए नियम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के आईपीओ का इंतजार अब खत्म होने वाला है। सेबी की हरी झंडी के बाद NSE आईपीओ की शेयर बाजार में लिस्टिंग होगी। आमतौर पर जब किसी कंपनी का मेनबोर्ड आईपीओ आता है तो उसकी लिस्टिंग बीएसई और एनएसई, दोनों इंडेक्स पर होती है। हालांकि, NSE आईपीओ सिर्फ कॉम्पिटिटर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर लिस्ट होगा। इसकी लिस्टिंग नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE पर नहीं होगी। अब सवाल है कि आखिर NSE आईपीओ सिर्फ बीएसई पर ही क्यों लिस्ट होने वाला है। आइए डिटेल जान लेते हैं।

NSE खुद को रेगुलेट नहीं कर सकता

नियमों के मुताबिक एनएसई आईपीओ की लिस्टिंग NSE के ही प्लेटफॉर्म पर नहीं हो सकती है। दरअसल, जब निवेशक किसी लिस्टेड कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो स्टॉक एक्सचेंज ट्रेडिंग एक्टिविटी पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाता है। इससे नियमों का पालन सुनिश्चित होता है और लिस्टिंग के नियम लागू किए जाते हैं। NSE के अपने शेयर NSE पर ही लिस्ट होने का मामला हितों का टकराव (conflict of interest) के कैटेगरी में आता है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए भारतीय नियम किसी स्टॉक एक्सचेंज को अपने ही ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर लिस्ट करने की इजाजत नहीं देते। यही वजह है कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के शेयर की भी लिस्टिंग उसके अपने प्लेटफॉर्म पर नहीं हुई थी। वर्तमान में बीएसई के शेयर NSE के प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करते हैं।

NSE आईपीओ की लिस्टिंग बीएसई पर

चूंकि NSE अपनी खुद की लिस्टिंग नहीं कर सकता, इसलिए कंपनी ने अपने सबसे बड़े कॉम्पिटिटर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई को चुना है। दिलचस्प बात यह है कि बीएसई ने NSE की प्रस्तावित लिस्टिंग के लिए पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

NSE के मामले में खास बात यह है कि किसी आम लिस्टेड कंपनी के उलट, NSE रेगुलेटरी काम भी करती है। एक्सचेंज ट्रेडिंग गतिविधियों पर नजर रखता है, मार्केट की निगरानी करता है और यह पक्का करता है कि लिस्टेड कंपनियां और मार्केट में शामिल निवेशक नियमों का पालन करें।

आईपीओ की डिटेल

हाल ही में NSE ने आईपीओ की मंजूरी के लिए बाजार नियामक सेबी के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल किए हैं। करीब 30,000 करोड़ रुपये के आकार वाला यह इश्यू पूरी तरह मौजूदा शेयरधारकों की बिक्री पेशकश पर आधारित होगा। एनएसई का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल पर आधारित होगा जिसमें मौजूदा शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। इस इश्यू के जरिए शेयरधारक सामूहिक रूप से एनएसई में अपनी करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे।

प्रमुख हिस्सेदारी विक्रेताओं में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शामिल है, जो 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा, जबकि एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगा। एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि उसकी सब्सिडयरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN