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देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE का बहुप्रतीक्षित IPO आखिरकार आगे बढ़ गया है। NSE ने SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है और यह भारत के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार NSE का वैल्युएशन करीब ₹5 लाख करोड़ के आसपास माना जा रहा है। IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होने की संभावना है, जिसमें मौजूदा शेयर होल्डर्सअपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। इश्यू का साइज लगभग ₹30,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

SBI बन सकता है सबसे बड़ा सेलर

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, IPO में हिस्सेदारी बेचने वालों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ा शेयरधारक विक्रेता हो सकता है। SBI और उसकी सहयोगी कंपनी SBI Caps पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि वे NSE IPO में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचेंगी।

भारतीय स्टेट बैंक अपने 2.475 करोड़ शेयर बेचकर लगभग 4,950 करोड़ रुपये जुटा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि एसबीआई ने ये शेयर बहुत कम कीमत पर खरीदे थे। ये औसतन सिर्फ 0.80 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीदे गए थे। यानी इनकी कुल खरीद लागत करीब 1.98 करोड़ रुपये थी, जबकि अब इनकी बिक्री से 4,950 करोड़ रुपये मिलेंगे।

₹2 करोड़ का निवेश बना हजारों करोड़

NSE की शुरुआती फंडिंग में शामिल कई संस्थागत निवेशकों ने बहुत कम कीमत पर शेयर खरीदे थे। वर्षों में NSE का वैल्युएशन तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से शुरुआती निवेशकों का मामूली निवेश अब हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति में बदल चुका है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार SBI समेत शुरुआती निवेशकों को IPO के जरिए हजारों करोड़ रुपये का लाभ मिल सकता है।

NSE दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज

NSE दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज माना जाता है और भारत में इसके 13 करोड़ से अधिक यूनिक निवेशक जुड़े हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में एक्सचेंज ने करीब ₹18,700 करोड़ की आय और ₹10,300 करोड़ से अधिक का शुद्ध लाभ दर्ज किया।

IPO में कौन-कौन बेचेंगे हिस्सेदारी: SBI के अलावा स्टेट बैंक, एलआईसी, Temasek Holdings और Canada Pension Plan Investment Board जैसे बड़े निवेशक भी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।

इन पर भी होगी पैसों की बारिश

यह मुनाफा सिर्फ एसबीआई को ही नहीं, बल्कि दूसरी सरकारी संस्थाओं को भी हो रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने ये शेयर औसतन 0.54 रुपये में खरीदे थे। अब ये शेयर करीब 2,197 करोड़ रुपये के बिकेंगे, जबकि इनकी लागत मात्र 59 लाख रुपये थी। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ने 0.46 रुपये प्रति शेयर की दर से खरीदा था। अब इसकी बिक्री से 2,178 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि निवेश सिर्फ 50 लाख रुपये था।

बीमा कंपनियों में न्यू इंडिया एश्योरेंस और नेशनल इंश्योरेंस ने शेयर 0.32 रुपये में खरीदे थे। न्यू इंडिया को अब 2,100 करोड़ रुपये मिलेंगे, और नेशनल को 1,200 करोड़ रुपये।वहीं, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस ने 0.50 रुपये में खरीदा, अब 1,200 करोड़ रुपये मिलेंगे।जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (जीआईसी) ने थोड़ा महंगा (5.26 रुपये प्रति शेयर) खरीदा, फिर भी उसे 2,131 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि लागत करीब 5.6 करोड़ रुपये थी।

विदेशी निवेशकों ने बाद में काफी ऊंची कीमत पर शेयर खरीदे, लेकिन उन्हें भी अच्छा मुनाफा होगा। एमएस स्ट्रैटेजिक ने 66.54 रुपये, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स ने 62.38 रुपये और कनाडा पेंशन प्लान ने सबसे महंगा 324.13 रुपये प्रति शेयर पर खरीदा था।

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