Source :- LIVE HINDUSTAN
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आप किसी को पसंद करें और वो भी आपको पसंद करे तो जिंदगी खूबसूरत लगने लगती है। लेकिन जब सामने वाला आपको रिजेक्ट कर दे और आप रिजेक्शन को अपने इगो पर ले लें समस्या तब शुरू होती है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 की थ्रिलर फिल्म ‘पूजा मेरी जान’ इसी खतरनाक सोच को दिखाती है। पढ़िए पूरा रिव्यू।
फिल्म: पूजा मेरी जान
ओटीटी प्लेटफॉर्म: जी5
रिलीज डेट: 2 अक्टूबर
जॉनर: थ्रिलर
एक्टर्स: मृणाल ठाकुर, हुमा कुरैशी, विक्रम सिंह चौहान
रेटिंग: 3
कहानी कुछ ऐसी है कि पूजा (मृणाल) को अनिकेत (विक्रम) सबके सामने प्रपोज करता है। इतना ही नहीं, अंगूठी भी पहना देता है। दूसरे दिन खबर आती है कि अनिकेत ने आत्महत्या कर ली है। मामला कोर्ट तक पहुंचता है और पूजा जेल। यहीं से फिल्म का दूसरा अहम हिस्सा शुरू होता है, जहां सच, आरोप और अपनी-अपनी दलीलों के बीच कहानी आगे बढ़ती है।
कैसी है फिल्म?
फिल्म का आइडिया जितना अच्छा और अलग है, उसे पर्दे पर उतने अच्छे तरीके से पेश नहीं किया गया है। कहानी में कई ऐसे मौके आते हैं, जहां दर्शकों को चौंकाया जा सकता था या सस्पेंस को और मजबूत किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं होता है।
फिल्म में सस्पेंस की कमी
अनिकेत की आत्महत्या भी ऐसा ही एक मोड़ है। यह घटना कहानी के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन जिस तरह इसे दिखाया गया है, वह दर्शकों को वह झटका नहीं दे पाता जिसकी उम्मीद इस तरह के बड़े टर्निंग पॉइंट से होती है। घटना के बाद कहानी कोर्टरूम की तरफ बढ़ती है, लेकिन यहां भी थ्रिल और सस्पेंस उस लेवल तक नहीं पहुंचता, जिसकी एक थ्रिलर से उम्मीद की जाती है।
कोर्टरूम ड्रामा
कोर्टरूम ड्रामा फिल्म का अहम हिस्सा है, लेकिन वकीलों की बहस और अदालती कार्यवाही कई जगह काफी सामान्य लगती है। यहां कहानी में नए सवाल, पलटवार और ऐसे मोड़ होने चाहिए थे, जो दर्शकों को लगातार सोचने पर मजबूर करें। इसके बजाय यह हिस्सा कई जगह धीमा पड़ जाता है। नतीजा यह होता है कि मजबूत विषय के बावजूद फिल्म का रोमांच लगातार बना नहीं रहता।
एक्टिंग
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कास्ट है। मृणाल ठाकुर और हुमा कुरैशी समेत बाकी कलाकारों ने अपने किरदारों को पूरी गंभीरता से निभाया है। कहानी जहां इमोशनली दर्शकों को पूरी तरह जोड़ने में पीछे रह जाती है, वहीं कलाकार अपनी परफॉर्मेंस से उस कमी को काफी हद तक पूरा करते हैं।
म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक भी अच्छा है। गाने और बैकग्राउंड स्कोर कहानी के माहौल को सपोर्ट करते हैं और कुछ सीन्स का असर बढ़ाते हैं। फिल्म खत्म होने के बाद भी इसका म्यूजिक याद रहता है।
देखें या नहीं?
कुल मिलाकर, ‘पूजा मेरी जान’ एक जरूरी और गंभीर मुद्दे को थ्रिलर के जरिए सामने रखने की कोशिश करती है। फिल्म का विषय आपको सोचने पर मजबूर करता है और मृणाल ठाकुर-हुमा कुरैशी की एक्टिंग मजबूत है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, कम सस्पेंस और फीका कोर्टरूम ड्रामा फिल्म के असर को कम कर देते हैं। कहानी में वह दम जरूर है, जो एक बेहतरीन थ्रिलर बना सकता था, लेकिन फिल्म उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाती।
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