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PNG कनेक्शन से सिलेंडर बुकिंग तक, LPG खपत में गिरावट के क्या हैं बड़े कारण?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • देश आयातित LPG और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपमेंट पर बहुत ज्यादा निर्भर है
  • इस हालात में संकट से बचने के लिए सरकार ने LPG को लेकर कुछ अहम कदम भी उठाए हैं

सितंबर 2026 के दौरान LPG की मांग में बड़ी गिरावट आई है। यह जानकारी पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के शुरुआती आंकड़ों से मिली है। हालांकि, सितंबर महीने के दौरान भारत में पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ी है। आंकड़े के मुताबिक सितंबर में पेट्रोल की बिक्री सालाना आधार पर (Y-o-Y) 7.21 प्रतिशत बढ़कर 3.64 मिलियन टन हो गई जबकि देश में सबसे ज्यादा बिकने वाले पेट्रोलियम प्रोडक्ट, डीजल की बिक्री 4.86 प्रतिशत बढ़कर 7.12 मिलियन टन हो गई। हालांकि, सितंबर में LPG की खपत सालाना आधार पर 9.15 प्रतिशत घटकर 2.64 मिलियन टन रह गई।

एलपीजी खपत में गिरावट के कारण?

फरवरी के आखिर में पश्चिम एशियर में संकट शुरू होने के बाद से भारत में LPG की खपत पर दबाव बना हुआ है। दरअसल, देश आयातित LPG और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपमेंट पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इस हालात में संकट से बचने के लिए सरकार ने LPG को लेकर कुछ अहम कदम भी उठाए हैं। सरकार ने एलपीजी की निर्भरता कम करने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स (CGDs) को घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन बढ़ाने के लिए इंसेंटिव देना और LPG उपभोक्ताओं को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

हाल ही में सरकार ने ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग का अंतराल तत्काल प्रभाव से 25 दिन किया गया है। दरअसल, पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से एलपीजी आपूर्ति पर बने दबाव के बीच गैस सिलेंडर की रिफिल बुकिंग का अंतराल शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन कर दिया गया था। अब इसमें बदलाव किया गया है।

सरकार के इन उपायों की वजह से हाल के महीनों में LPG की खपत में भारी गिरावट आई है। अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान, पेट्रोल की खपत 7 प्रतिशत बढ़कर 22.67 मिलियन टन हो गई, जबकि डीजल की मांग 4.85 प्रतिशत बढ़कर 47.89 mt हो गई। छह महीने की इस अवधि में LPG की खपत 14.93 प्रतिशत घटकर 13.79 मिलियन टन रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 16.28 मिलियन टन थी।

बढ़ाए गए थे दाम

पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी आने के बाद मार्च से जून के बीच घरेलू रसोई गैस की कीमत 89 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाई गई थी। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर के भी दाम बढ़ा दिए गए थे। इसके अलावा, मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN