Source :- LIVE HINDUSTAN
https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/10/19/1200x900/Theatre_Technology_1792399768685_rJDm_1792399903401_Yf9z_db18fb99-f74f-4edf-999b-867ab672cfe8_Lu4Y.pngअब सिनेमाघरों में भी कई वराइटी आ चुकी है, लेकिन ज्यादातर लोगों को इनके बीच का फर्क नहीं पता। तो चलिए आज समझ लेते हैं थिएटर्स की पूरी एबीसीडी।
वक्त के साथ फिल्ममेकिंग बहुत बदल चुकी है और साथ ही फिल्मों को दिखाने का तरीका भी बदला है। आज के थिएटर्स वैसे नहीं रहे, जैसे एक वक्त पर हुआ करते थे। आज पर्दे से लेकर साउंड क्वालिटी और सिटिंग अरेंजमेंट तक सब कुछ बदल चुका है। जहां एक तरफ ये थिएटर और मल्टीप्लेक्स मालिकों को कमाई के अलग-अलग ऑप्शन्स देता है, वहीं ऑडियंस को भी एंटरटेनमेंट के नए और ज्यादा प्रभावी ऑप्शन्स मिल जाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि अभी भारत में कितने तरह के थिएटर्स उपलब्ध हैं और इनमें फर्क क्या होता है।
IMAX
सामान्य सिनेमाघरों के अलावा अभी यह भारत का सबसे लोकप्रिय प्रीमियम फॉर्मेट बना हुआ है। इसमें एक विशाल कर्विश स्क्रीन होती है, जिस पर हाई-रिजॉल्यूशन प्रोजेक्शन के जरिए फिल्म चलाई जाती है। इस टेक्नोलॉजी वाले थिएटर्स में फिल्म देखने को और भी खास बना देता है इसका पेटेंटेड साउंड सिस्टम। भारत में अभी 2 तरह के IMAX हैं। पुराने डिजिटल सिस्टम और मॉर्डन 4K लेजर प्रोजेक्शन वाले। इस तकनीक वाले थिएटर्स मुंबई के PVR Palladium या हैदराबाद का Prasad Cinema वगैरह हैं।
डॉल्बी सिनेमा
यह टेक्नोलॉजी भारत के नॉर्मल ऑडी को भी डिमांडिंग बना देता है। दरअसल यह तकनीक थिएटर के कई अलग-अलग पहलुओं पर काम करती है। एक तरफ जहां डॉल्बी साउंड सिनेमाघर के भीतर साउंड को 360 डिग्री फील देता है, वहीं दूसरी तरफ Dolby Vision 4K लेजर और शानदार कंट्रास्ट के साथ विजुअल्स को सुपर इंप्रेसिव बना देता है।
PXL / EPIQ
पिछले कुछ वक्त में PVR और INOX जैसी भारतीय मल्टीप्लेक्स चेन्स ने अपने खुद के जाइंट स्क्रीन ब्रांड्स शुरू किए हैं। इनमें भी एक्स्ट्रा-लार्ज स्क्रीन, लेजर प्रोजेक्शन और बेटर साउंड सिस्टम मिलता है।
4DX / MX4D
नॉर्मल और IMAX तक स्क्रीन्स से भी एक कदम आगे बढ़कर इस तरह के सिनेमाघरों में आपको रियल लाइफ मूवी एक्सपीरियंस मिलता है। एक तरफ जहां आप हर चीज 3D में देख रहे होते हैं, वहीं दूसरी तरफ हर सीन और सिचुएशन के मुताबिक आपकी सीटें हिलती-डुलती हैं। हॉल में हवा के झोंके, पानी की बौछारें, धुंध, कड़कती बिजली के फ्लैश और यहां तक कि तरह-तरह की खुशबू जैसे रियल-टाइम इफेक्ट्स छोड़े जाते हैं।
ScreenX
यह टेक्नोलॉजी थिएटर में फिल्म देखने के अनुभव को और भी खास बना देता है। इसमें सिर्फ सामने से ही नहीं, बल्कि हॉल की दाहिनी और बाईं दीवारों पर भी स्क्रीन होती है। यह 270-डिग्री का पैनोरैमिक व्यू देता है, जिससे दर्शक को लगता है कि वह फिल्म के अंदर ही खड़ा है।
2D / 3D
इस तरह के सिनेमाघरों में फिल्में या तो 2D या 3D में फिल्में दिखाई जाती हैं। इस तरह के ऑडी में 3D स्क्रीनिंग के लिए अलग से चश्मा दिया जाता है। इस तरह के ऑडी में फिल्म देखने पर लगता है जैसे चीजें असल में आपके सामने हो रही हों।
14-D / 360 डिग्री डोम थिएटर्स
इस तरह के थिएटर्स खासतौर पर थीम पार्क्स या चिड़ियाघरों में लगाए जाते हैं। हाल ही में इस तरह का थिएटर इंदौर के चिड़ियाघर खुला है। इसे भारत का पहला 14-D वर्चुअल थिएटर बताया जा रहा है। ऐसे थिएटर्स छोटे ड्यूरेशन के वर्चुअल रियलिटी या एजुकेशनल शो के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
Director’s Cut / Gold Class / Insignia
अगर आप पैसे खर्च करने में संकोच नहीं करते, लेकिन लग्जरी मूवी वॉचिंग एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो इस कैटेगरी के थिएटर्स आपके लिए हैं। यहां आलीशान फुल्ली-रिक्लाइनर लेदर सीट्स, कम्फर्ट और पर्सनल अटेंडेंट और बटलर सर्विस मिलती है। दर्शक सीट पर लगे टैबलेट या कॉल बटन से लाइव शेफ-क्यूरेटेड फूड ऑर्डर कर सकते हैं।
Playhouse / Kiddles
ये बच्चों के लिए खासतौर पर डिजाइन किए गए थिएटर्स होते हैं। इस तरह के थिएटर्स में रंग-बिरंगी सीटें, इन-हॉल स्लाइड और बच्चों के अनुकूल मेनू दिया जाता है। इन थिएटर्स में बच्चे खुलकर बिना पाबंदी के एन्जॉय कर पाते हैं।
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