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RBI ने बदली अपनी रणनीति, तिजोरी में लगातार बढ़ रहा सोना

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ोतरी की वजह से देश के आधिकारिक स्वर्ण भंडार का मूल्य बढ़कर 115.8 अरब डॉलर (करीब 9.9 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया है। पिछले छह महीनों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 17% रही, जो एक साल पहले इसी अवधि में 12 प्रतिशत थी। यह बढ़ोतरी सोने की कीमत बढ़ने और पारंपरिक विदेशी मुद्राओं के अलावा दूसरे तरह के रिजर्व एसेट्स (जैसे सोना) को अपनाने की वजह से हुई है। बता दें कि सोने की कीमत 2024 की शुरुआत में लगभग $2,000 प्रति औंस से बढ़कर 2026 में $4,000 प्रति औंस से ज्यादा हो गई है।

रूस-यूक्रेन जंग की वजह से बदले हालात

जानकार बताते हैं कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद यह बदलाव तेजी से हुआ। कई केंद्रीय बैंकों को जियो-पॉलिटिक्स के हालात की वजह से अपनी रिजर्व मैनेजमेंट रणनीतियों पर फिर से विचार करना पड़ा। आंकड़े बताते हैं कि युद्ध के बाद खरीदारी में तेजी आई। सबसे ज्यादा तेजी से खरीदारी यूरोप में हुई। सिर्फ पोलैंड ने दो अलग-अलग चरणों में खरीदारी की।

पोलैंड के गोल्ड रिजर्व में उछाल

पहला चरण कोविड-19 महामारी के दौरान आया, जब उनकी होल्डिंग 2019 की पहली तिमाही में 128.6 टन से बढ़कर 2020 की पहली तिमाही में 228.7 टन हो गई। लगभग तीन साल तक इसमें कोई खास बदलाव नहीं हुआ। इसके बाद, यूक्रेन और रूस के बीच जंग की वजह से पोलैंड ने खरीदारी का दूसरा प्रोग्राम शुरू किया। 2023 की पहली तिमाही में पोलैंड की हेल्डिंग 228.7 टन से बढ़कर 2026 की पहली तिमाही में 581.6 टन हो गई। इसका मतलब है कि सिर्फ तीन सालों में लगभग 353 टन की बढ़ोतरी हुई है। चीन ने भी ऐसा ही रास्ता अपनाया है। 2020 और 2022 के बीच अपने आधिकारिक रिजर्व को लगभग 1,948 टन पर स्थिर रखने के बाद चीन ने 2023 में फिर से खरीदारी शुरू की।

भारत भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। आरबीआई ने पिछले एक दशक में लगातार सोने का भंडार बढ़ाया है। वर्ष 2015 की पहली तिमाही में भारत के पास 557.8 टन सोना था, जो 2026 की पहली तिमाही तक बढ़कर 880.5 टन हो गया। इसका मतलब है कि लगभग 323 टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासतौर पर 2019 के बाद सोने की खरीदारी की रफ्तार और तेज हुई है।

भारत और चीन के अलावा, तुर्की ने अपने आधिकारिक सोने के भंडार को 2015 में 116 टन से बढ़ाकर 2026 में 535 टन कर लिया जबकि कजाकिस्तान ने अपने भंडार को 198 टन से 354 टन और उज्बेकिस्तान ने 275 टन से 416 टन तक बढ़ाया। मिस्र ने अपना भंडार 76 टन से बढ़ाकर 130 टन, कतर ने 12 टन से 115 टन, हंगरी ने सिर्फ़ 3 टन से 110 टन और सर्बिया ने 18 टन से 54 टन कर लिया। चेक गणराज्य, किर्गिस्तान और मलेशिया में भी छोटी लेकिन अहम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिका, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों के पास दुनिया का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार बना हुआ है लेकिन उन्होंने हाल के वर्षों में नई खरीदारी बहुत कम की है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN