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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसले का ऐलान कर दिया है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह लगातार दूसरी बार 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल न तो लोन सस्ता होगा और न ही आपकी EMI कम होगी। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा।
वहीं FD की ब्याज दरें भी मौजूदा स्तर पर बनी रह सकती हैं। बता दें तीन दिनों तक चली बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा नीतिगत दरों पर फैसला सुना दिया है। अभी इसके बाद दोपहर 12 बजे उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी।
वैश्विक चुनौतियों पर RBI की नजर
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, प्रमुख व्यापार मार्गों और सप्लाई चेन में रुकावटें, वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताएं अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा, “हम इन चुनौतियों का सामना करने और उनसे निपटने में सक्षम हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और इन झटकों को न्यूनतम नुकसान के साथ झेलने की स्थिति में है।”
महंगाई पर बढ़ी चिंता
RBI ने माना कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों और आयात लागत में बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
पिछली बार क्या हुआ था
पिछली मौद्रिक नीति बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था। इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5 फीसदी और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर 5.50 फीसदी पर कायम रखी गई थी।
RBI ने अप्रैल की समीक्षा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। वहीं खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान बढ़ाकर 4.6 फीसदी कर दिया गया था।
क्यों अहम है आज का फैसला?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी और महंगाई के दबाव ने RBI की चुनौती बढ़ा दी है। दूसरी ओर, देश में मांग और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। यही वजह है कि RBI को महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
ऐलान से पहले क्या थी एक्सपर्ट्स की राय
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ का मानना है कि RBI फिलहाल इंतजार और निगरानी की रणनीति अपना सकता है। उनके अनुसार तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में कमजोरी से महंगाई का खतरा बना हुआ है, इसलिए केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम नहीं उठाएगा।
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट भी रेपो रेट में किसी बदलाव की संभावना नहीं देखती। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया संकट का अर्थव्यवस्था पर पूरा असर अभी स्पष्ट नहीं है।
कोटक महिंद्रा एएमसी के फिक्स्ड इनकम प्रमुख अभिषेक बिसेन के मुताबिक खुदरा महंगाई अभी 3.48 फीसदी पर नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन थोक महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हैं।
उनका कहना है कि बाजार भले ही भविष्य में ब्याज दर बढ़ने की संभावना देख रहा हो, लेकिन फिलहाल RBI रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बनाए रख सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक महंगाई के अनुमान बढ़ा सकता है और विकास दर के अनुमान में हल्की कटौती कर सकता है।
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