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कानूनी पचड़े से बाहर आने के बाद अडानी समूह की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड विदेश से लोन लेने की तैयारी में है। इसके जरिए अडानी ग्रीन एनर्जी 1 अरब डॉलर तक जुटाने की योजना बना रही है। ब्लूमबर्ग की एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि अडानी ग्रीन एनर्जी डॉलर में लोन लेने के लिए लेंडर्स और एडवाइजर्स के साथ शुरुआती बातचीत कर रही है। यह लोन अगले तीन महीनों में दो किस्तों में लिया जा सकता है। बता दें कि अमेरिकी कानूनी विवादों से राहत मिलने के बाद कंपनी का पहला बड़ा विदेशी कर्ज जुटाने का प्रयास होगा। पिछले महीने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर ने US सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के आरोपों को निपटाने के लिए 1.8 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई थी। इन आरोपों में कहा गया था कि उन्होंने अडानी ग्रीन एनर्जी के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी दी थी।

कितने साल के लिए लोन

यह लोन पांच साल की अवधि का होगा और इसकी ब्याज दर ग्लोबल बेंचमार्क SOFR (सिक्योर्ड ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट) के ऊपर तय की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस फंड का इस्तेमाल कंपनी अपनी विभिन्न जरूरतों, खासकर कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) और रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं के विस्तार में करेगी। हालांकि, बातचीत अभी शुरुआती स्तर पर है और अंतिम शर्तों में बदलाव संभव है। अडानी एनर्जी के प्रवक्ता ने टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया है।

अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर

अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर की बात करें तो बुधवार को एक पर्सेंट टूटकर 1470 रुपये के नीचे आ गया। बता दें कि शेयर 23 जनवरी 2026 को 767 रुपये के निचले स्तर पर था। 9 जून 2026 को अडानी ग्रीन एनर्जी 1,544.70 रुपये पर आ गया। यह शेयर के 52 हफ्ते का हाई है।

बर्नस्टीन का अडानी ग्रीन को लेकर अनुमान

हाल ही में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने अपनी रिपोर्ट में समूह की चार प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों- अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशन इकॉनमिक जोन, अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी पावर और अंबुजा सीमेंट का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में सामने आए शॉर्ट-सेलर विवाद और बाद में अमेरिका में शुरू हुई जांच के कारण कई विदेशी निवेशकों और वैश्विक कोषों ने अडानी समूह से दूरी बना ली थी।

हालांकि, अब अमेरिकी मामलों में राहत मिलने के बाद निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दे रहा है। बर्नस्टीन ने कहा कि अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) से जुड़े मामले के समाधान और अमेरिकी अभियोजकों द्वारा समूह के खिलाफ आरोप हटाने की प्रक्रिया ने समूह के शेयरों पर बना बड़ा दबाव कम कर दिया है।

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