Source :- LIVE HINDUSTAN
दिसंबर 2023 में गाजा में हमास के खिलाफ लड़ते हुए आइजनकोट का 25 वर्षीय बेटा मारा गया। दूसरी तरफ नेतन्याहू पर अपने बेटों को युद्ध से दूर रखने के आरोप लगते हैं। ऐसे में आइजनकोट की लोकप्रियता बढ़ी है।
इजरायल में इस साल आम चुनाव होने हैं। इससे पहले यहां की राजनीति में हलचल मची हुई है। इधर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की धड़कनें भी तेज हैं। दरअसल पहले अक्टूबर 2023 में हमास के इजरायल पर बड़े हमले और उसके बाद ईरानी जंग में अपने लक्ष्यों को हासिल करने में कामयाबी न मिलने को लेकर नेतन्याहू की लोकप्रियता घटी है। वहीं देश में कई बड़े चेहरे उन्हें चुनौती देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में इस बार संभवतः अक्टूबर में होने वाले चुनावों में नेतन्याहू को कुर्सी भी हिल सकती है और पीएम पद से हाथ धोना पड़ सकता है।
नेतन्याहू को सबसे बड़ी चुनौती दे रहे हैं इजरायली सेना यानी IDF के पूर्व चीफ गादी आइजनकोट। आइजनकोट ने बीते 30 जून को अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘याशर’ के बैनर तले आधिकारिक तौर पर चुनावी बिगुल फूंक दिया है। कैंपेन लॉन्च के मौके पर उन्होंने नेतन्याहू पर बड़े हमले किए। उन्होंने साफ संदेश दिया कि उनकी पार्टी ईमानदारी के सिद्धांत पर चलेगी और इजरायल के निर्माण के लिए वह सबको साथ ले कर चलेंगे।
कौन हैं आइजनकोट?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, गादी आइजनकोट की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह यह है कि वे पारंपरिक नेताओं जैसे बिल्कुल नहीं लगते। जहां नेतन्याहू अमेरिका से पढ़े-लिखे, एलीट वर्ग से आते हैं, वहीं 66 वर्षीय आइजनकोट मोरक्को से आए एक साधारण परिवार के घर पैदा हुए। आइजनकोट ने इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) में लगभग 40 साल बिताए हैं और 2015 से 2019 तक इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ रहे हैं। लोग उन्हें एक सच्चे देशभक्त की तरह देखते हैं जो सिर्फ लोकलुभावन बातें नहीं करता।
गाजा युद्ध में खोया जवान बेटा
गादी आइजनकोट को लोग एक और वजह से जानते हैं। दिसंबर 2023 में गाजा में हमास के खिलाफ लड़ते हुए हादी का 25 वर्षीय बेटा मारा गया। इसके ठीक बाद उनके दो भतीजों ने भी इस जंग में अपनी जान गंवाई। जहां नेतन्याहू पर अपने बेटों को युद्ध से दूर रखने के आरोप लगते हैं, वहीं आइजनकोट के लिए लोगों के मन में ऐसी छवि बनी जिसने देश के लिए अपने कलेजे के टुकड़े को खोया है। लोगों को लगता है कि हादी सैनिकों की जान की असली कीमत समझते हैं।
नेतन्याहू की कैबिनेट से दिया था इस्तीफा
7 अक्टूबर 2023 के हमास के हमले के बाद, आइजनकोट को नेतन्याहू के वॉर कैबिनेट से जुड़ने का मौका मिला। लेकिन 2024 में उन्होंने नेतन्याहू पर युद्ध की कोई सॉलिड योजना न होने का आरोप लगाते हुए कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। यही नहीं उन्होंने दूसरे मंत्रियों को एक पत्र लिखकर यह चेतावनी भी दी थी कि वे सिर्फ तात्कालिक सैन्य जीतों को बड़ी सफलता मान रहे हैं, जो इजरायल के भविष्य के लिए सही नहीं है।
हार जाएंगे नेतन्याहू?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आइजनकोट की याशर पार्टी लोकप्रियता के मामले में तेजी से आगे बढ़ रही है और सीटों के मामले में वह नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के बाद दूसरे नंबर पर आ सकती है। भले ही लिकुड ज्यादा सीटें जीते, लेकिन आइजनकोट दूसरी गठबंधन पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करेंगे। ऐसे में नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




