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इमरान खान पर नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो की तरह पाकिस्तान छोड़ने का बनाया जा रहा दबाव!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अचकजई के साथ तहरीक-ए-तहफुज-आइन-ए-पाकिस्तान (TTAP) के नेता सरदार अख्तर मेंगल और अल्लामा राजा नासिर अब्बास भी मौजूद थे।

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और ‘पख्तूनख्वा मिली अवामी पार्टी’ के अध्यक्ष महमूद खान अचकजई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर देश छोड़कर जाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

अचकजई ने पेशावर हाई कोर्ट में मीडिया से बात करते हुए कहा कि वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन- पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP)- पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ भी वही राजनीतिक फार्मूला दोहराने की कोशिश कर रहे हैं, जो अतीत में नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के साथ अपनाया गया था।

नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के साथ क्या हुआ?

अचकजई का इशारा पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास के दो प्रमुख घटनाक्रमों की ओर था।

नवाज शरीफ (2000): जनरल परवेज मुशर्रफ के तख्तापलट के बाद जेल में बंद नवाज शरीफ को सऊदी अरब और लेबनानी नेतृत्व की मध्यस्थता के तहत 10 साल के लिए देश छोड़कर सऊदी अरब जाने की अनुमति दी गई थी।

बेनजीर भुट्टो (1999): 1997 के चुनाव हारने और भ्रष्टाचार के मामलों के बीच बेनजीर भुट्टो ने भी देश छोड़कर लंबे समय तक दुबई और लंदन में जीवन बिताया था।

अचकजई का कहना है कि सरकार और शक्तिशाली हलके यानी सेना, अब पीटीआई संस्थापक इमरान खान को भी इसी तरह के समझौते पर दस्तखत करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि इमरान खान ने अभी ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं किया है।

खैबर पख्तूनख्वा में ‘गवर्नर शासन’ के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अचकजई के साथ तहरीक-ए-तहफुज-आइन-ए-पाकिस्तान (TTAP) के नेता सरदार अख्तर मेंगल और अल्लामा राजा नासिर अब्बास भी मौजूद थे।

विपक्षी नेताओं ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में केंद्र सरकार की ओर से लगाए गए गवर्नर शासन और इमरजेंसी के खिलाफ पेशावर हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234 के तहत 11 अक्टूबर को जारी आपातकालीन घोषणा को असंवैधानिक और अवैध घोषित करने की मांग की गई है।

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार ने आतंकवाद का बहाना बनाकर खैबर पख्तूनख्वा की निर्वाचित प्रांतीय सरकार और विधानसभा के अधिकारों को असंवैधानिक तरीके से छीन लिया है।

‘जेल में कैदियों से मिलने पर रोक तानाशाही है’

अचकजई ने जेल में बंद इमरान खान और अन्य राजनीतिक बंदियों से मुलाकात पर लगाई गई पाबंदियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी मुल्क में कैदियों को उनके वकीलों और परिजनों से मिलने से नहीं रोका जाता।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संसद को अधिकार नहीं दिए गए और चुनाव आयोग की निष्पक्षता बहाल नहीं हुई, तो विपक्षी दल जल्द ही बहुदलीय सम्मेलन बुलाएंगे और जरूरत पड़ने पर असेंबलियों से सामूहिक इस्तीफे देने का विकल्प भी खुला रखेंगे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN