Source :- LIVE HINDUSTAN
फ्रांस में एक भारतीय युवक पर ऐसे ऑनलाइन गिरोह के संचालन के आरोप में मुकदमा शुरू किया गया है, जो कम उम्र की लड़कियों को यौन गतिविधियों में शामिल होने और खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए मजबूर करता था।
फ्रांस की राजधानी पेरिस की विशेष आपराधिक अदालत में भारतीय नागरिक रोहन राणे (29) के खिलाफ नाबालिगों से जुड़े गंभीर आरोपों की सुनवाई सोमवार को शुरू हो गई। उस पर आरोप है कि उन्होंने डिस्कॉर्ड पर एक ऑनलाइन गिरोह चलाया, जो छोटी उम्र की लड़कियों को यौन गतिविधियों में शामिल होने और खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए मजबूर करता था। अदालत ने पूरी सुनवाई बंद कमरे में करने का आदेश दिया है।
फ्रांस-24 के अनुसार, रोहन पर आरोप है कि उसने एक ऑनलाइन गिरोह चलाया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह गिरोह मैसेजिंग प्लेटफॉर्म डिस्कॉर्ड पर सक्रिय था और इसका नाम सीवीएलटी (CVLT) था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस समूह के सदस्य नव-नाजी, नकारात्मक और चरम विचार रखते थे। रोहन को इस नेटवर्क का प्रमुख बताया जा रहा है। आरोपों के अनुसार, गिरोह छोटी उम्र की लड़कियों को निशाना बनाता था। ये लड़कियां ज्यादातर अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड और कुछ अन्य देशों में रहती थीं। उनकी उम्र करीब 12 से 18 साल बताई गई है। जांच का दावा है कि उन्हें ऑनलाइन फंसाया जाता था और फिर धमकी देकर यौन गतिविधियों में शामिल होने तथा खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए मजबूर किया जाता था। इन घटनाओं के वीडियो भी बनाए और बांटे जाते थे।
रोहन पढ़ाई के लिए फ्रांस आया था। उसने दक्षिण-पूर्वी शहर एंटीबेस के एक बिजनेस स्कूल में दाखिला लिया था। बाद में उसने फिटनेस कोच का काम भी किया। आरोप है कि 2019 से 2021 के बीच ये काम उसकी छात्र वाली जगह से ही किए गए। फ्रांसीसी पुलिस ने अमेरिकी एजेंसियों की सूचना पर अप्रैल 2021 में एंटीबेस में उसे गिरफ्तार किया था। उसके बाद से वह हिरासत में है। उस पर कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें नाबालिगों के खिलाफ यातना और बर्बर कृत्य, संगठित तरीके से जबरन वसूली, नाबालिगों को भ्रष्ट करने और बाल यौन शोषण वाली सामग्री रखने व बांटने के आरोप शामिल हैं। फ्रांसीसी अदालत में अगर वह दोषी पाया गया, तो उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
सुनवाई बंद कमरे में इसलिए रखी गई, क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसा अनुरोध किया था। अदालत ने कहा कि इस समूह पर पहले भी पीड़ितों और गवाहों को डराकर चुप कराने की कोशिश करने और अमेरिकी अभियोजकों को धमकी देने के आरोप हैं। इसलिए पीड़ितों की सुरक्षा के लिए कार्यवाही सार्वजनिक नहीं की गई। मामले में पांच अमेरिकी महिलाएं दीवानी पक्ष के रूप में शामिल हुई हैं। उनकी उम्र अभी 18 से 21 साल के बीच है। उनसे वीडियो लिंक के जरिए बयान लिए जाने की उम्मीद है। सुनवाई शुक्रवार, 9 अक्टूबर तक चलने की संभावना है। फैसला कब आएगा, यह अभी साफ नहीं है।
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