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क्यों रेलवे कर्मचारियों को ₹17951 और दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों को ₹6908 बोनस? जानिए वजह

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • रेलवे बोर्ड के अनुसार, एलिजिबल कर्मचारियों को 17,951 रुपये बोनस मिलेगा
  • यह भुगतान सैलरी की तरह ही प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा
  • हालांकि, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) के कर्मचारी इस बोनस के दायरे में शामिल नहीं हैं

Railway Bonus 2026: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे के एलिजिबल नॉन-गजेटेड एम्प्लॉइज को सालाना बोनस देने का ऐलान किया है। सरकार के फैसले के मुताबिक, कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड के अनुसार, एलिजिबल कर्मचारियों को 17,951 रुपये बोनस मिलेगा। यह भुगतान सैलरी की तरह ही प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। हालांकि, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) के कर्मचारी इस बोनस के दायरे में शामिल नहीं हैं। वहीं, दूसरे केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए अभी सालाना बोनस का ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रेलवे कर्मचारी और दूसरे केंद्रीय कर्मचारी, दोनों को बोनस दिया जाता है, तो रेलवे कर्मचारियों को 17,951 रुपये और दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों को सिर्फ 6,908 रुपये ही क्यों मिलते हैं? आखिर दोनों के बोनस में इतना अंतर कैसे आता है? आइए समझते हैं।

रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन और दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों को 30 दिन का बोनस

रेलवे और दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस में अंतर की सबसे बड़ी वजह बोनस कैलकुलेशन के लिए तय दिनों की संख्या है। बता दें कि रेलवे के एलिजिबल कर्मचारियों को 78 दिनों के हिसाब से बोनस दिया जाता है।वहीं, दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों को सालाना बोनस कैलकुलेशन 30 दिनों के हिसाब से की जाती है। दोनों मामलों में बोनस कैलकुलेशन के लिए मैक्सिमम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये तय है। लेकिन दिनों की संख्या अलग होने के कारण मिलने वाली रकम में बड़ा अंतर आ जाता है।

रेलवे कर्मचारियों का बोनस कैलकुलेशन

रेलवे कर्मचारियों के बोनस की गणना 78 दिनों के आधार पर की जाती है। इसके लिए अधिकतम वेतन सीमा 7,000 रुपये रखी गई है।

फॉर्मूला इस प्रकार है:

बोनस = 7,000 रुपये × 78 ÷ 30.4

इस हिसाब से अधिकतम बोनस की रकम करीब 17,961 रुपये बनती है। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने पात्र रेलवे कर्मचारियों को 17,951 रुपये बोनस देने की घोषणा की है। बता दें कि रेलवे में बोनस की गणना केवल दिनों और सैलरी लिमिट के आधार पर ही नहीं होती। इसमें कर्मचारियों की संख्या और रेलवे के कामकाज से जुड़े आउटपुट-इनपुट रेशियो को भी ध्यान में रखा जाता है। इसमें माल ढुलाई के नेट टन किलोमीटर और नॉन-गजेटेड एम्प्लॉइज की संख्या जैसे आंकड़े शामिल होते हैं।

दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों को 6,908 रुपये बोनस कैसे मिलता है?

दूसरे केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए बोनस की गणना 30 दिनों के आधार पर होती है। यहां भी बोनस के लिए अधिकतम वेतन सीमा 7,000 रुपये ही रखी गई है।

इसका फॉर्मूला है:

बोनस = 7,000 रुपये × 30 ÷ 30.4

इस हिसाब से बोनस की रकम करीब 6,908 रुपये बनती है। यही वजह है कि रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाले बोनस और दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस में काफी अंतर दिखाई देता है।

बता दें कि 6,908 रुपये की यह गणना तय वेतन सीमा और 30 दिनों के आधार पर है। दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 का बोनस अभी घोषित होना बाकी है।

बोनस की सैलरी लिमिट 7,000 रुपये ही क्यों ?

सालाना बोनस की गणना के लिए अधिकतम सैलरी लिमिट केंद्र सरकार समय-समय पर तय करती है। फिलहाल यह सीमा 7,000 रुपयेहै, जिसे वित्त वर्ष 2014-15 में निर्धारित किया गया था। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में महंगाई काफी बढ़ गई है। ऐसे में बोनस की गणना के लिए अब भी पुरानी वेतन सीमा का इस्तेमाल करना कर्मचारियों के लिए डिसएडवांटेजस है। संगठनों की मांग है कि मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए इस सीमा में बढ़ोतरी की जाए। बता दें कि इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने सितंबर में वित्त मंत्रालय को लेटर लिखकर बोनस की सैलरी लिमिट 7,000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये करने की मांग की थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN