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शेयर बाजार में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) के शेयरों में एक बड़ा भूचाल देखने को मिला। दोपहर के कारोबार में कंपनी के शेयर अचानक 10% तक टूट गए और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ₹355 के निचले स्तर पर पहुंच गए। टाटा मोटर्स के इस हिस्से में ही लक्जरी कार ब्रांड ‘जैगुआर लैंड रोवर’ (JLR) का बिजनेस भी शामिल है। जेएलआर के ‘इन्वेस्टर डे’ के दौरान कंपनी ने आने वाले समय (वित्त वर्ष 2027) के लिए जो रोडमैप और आंकड़े पेश किए, उससे निवेशक और बाजार के विशेषज्ञ खुश नजर नहीं आए। इसके अलावा दिग्गज ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज ने भी इस शेयर को ‘अंडरपरफॉर्म’ (कमजोर प्रदर्शन) की रेटिंग देते हुए इसका टारगेट प्राइस घटाकर ₹335 कर दिया, जिसने आग में घी का काम किया।

JLR का भविष्य का प्लान और आंकड़े

कंपनी ने निवेशकों के सामने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी योजनाएं रखीं। पिछले कुछ समय की चुनौतियों के बाद कंपनी ने आने वाले समय में सुधार की उम्मीद जताई है।

कमाई का लक्ष्य:- कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 में अपनी कुल कमाई (Revenue) £26 बिलियन (लगभग 26 अरब पाउंड) रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष के £23 बिलियन से 13% अधिक है।

मुनाफे में सुधार:- कंपनी को उम्मीद है कि उसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन (EBIT Margin) पिछले साल के लगभग 0% के मुकाबले सुधरकर 4% पर पहुंच जाएगा।

लागत में कटौती:- JLR ने अगले दो सालों में करीब £1.7 बिलियन की बचत करने और अपने उत्पादन को 3 लाख वाहनों के स्तर पर वापस लाने का लक्ष्य रखा है।

आखिर क्यों आई शेयर में इतनी बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशक कंपनी के बड़े-बड़े दावों और मौजूदा जमीनी हकीकत के बीच के अंतर से डरे हुए हैं। कंपनी के इतिहास को देखें तो पहले यह चिप (सेमीकंडक्टर) की कमी से जूझ रही थी और उसके बाद एक बड़े साइबर अटैक ने इसके उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि, कंपनी ने वापसी की कोशिश की है, लेकिन अभी भी कई मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी हैं।

भारी निवेश और कम कैश:- JLR भविष्य के लिए करीब £18 बिलियन के भारी-भरकम निवेश की बात कर रही है, लेकिन वर्तमान में उसके पास नकदी (Cash Flow) की कमी है। पिछले साल कंपनी का फ्री कैश फ्लो करीब £2.2 बिलियन नेगेटिव में था।

वैश्विक चुनौतियां:- ऑटोमोबाइल सेक्टर इस समय चीन के कमजोर बाजार, नए टैक्स/टैरिफ की आशंकाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में बदलाव की भारी लागत से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में इतने बड़े निवेश को संभालना जोखिम भरा लग रहा है।

कड़े मुकाबले में सही एग्जीक्यूशन:- ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि टाटा मोटर्स का पूरा दारोमदार इस बात पर टिका है कि वह अपनी लागत को कितना कम कर पाती है और अपनी नई गाड़ियों (विशेषकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) को बाजार में कितनी सफलता से लॉन्च करती है। जब तक ये योजनाएं हकीकत में बदलती नहीं दिखतीं, तब तक निवेशकों के लिए जोखिम बना रहेगा।

शेयर परफॉर्मेंस

TMPV (Tata Motors Passenger Vehicles) के शेयर में बुधवार को भारी दबाव देखने को मिला और यह करीब 8.10% टूटकर ₹361.70 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में शेयर ने ₹31.90 की गिरावट दर्ज की, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।

बाजार का मिजाज:- बाजार इस बात से परेशान नहीं है कि डिमांड कम है, बल्कि चिंता इस बात की है कि बड़े निवेश के बीच कंपनी का मुनाफा और नकदी का स्तर बहुत कमजोर बना हुआ है। यही वजह है कि निवेशकों ने मुनाफावसूली और बिकवाली का रास्ता चुना।

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