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डींगें हांकता रहा पाकिस्तान, US-ईरान डील में बाजी मार ले गया छोटू सा मुस्लिम देश; डिप्लोमेसी का नया उस्ताद कौन?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान ने इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी लड़ाई और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की टिप्पणियों का हवाला देते हुए स्विट्जरलैंड में अमेरिकी अधिकारियों के साथ सीधे बातचीत शुरू करने की अपनी योजना को फिलहाल टाल दिया है।

पश्चिम एशिया में तनाव खत्म करने और ईरान अमेरिका जंग रोकने के लिए हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते ने वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा बदलाव दिखाया है। हालांकि पाकिस्तान आधिकारिक मध्यस्थ के रूप में सामने था और वह लंबे समय से दोनों देशों के बीच शांति स्थापना के लिए डील कराने की डींगे हांक रहा था लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुस्लिम वर्ल्ड का ही एक छोटा सा देश इस पूरी डील का असली ‘पावर ब्रोकर’ बनकर उभरा है। जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई ईरान-अमेरिका की बातचीत बेपटरी हो गई थी, तब उस छोटे से देश यानी कतर ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक भरोसेमंद सेतु की भूमिका निभाई और बैकडोर डिप्लोमेसी का नया उस्ताद बनकर उभरा।

संकट के समय वॉशिंगटन का भरोसा

अप्रैल में इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने और राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान के प्रस्ताव को “कचरा” बताने के बाद, अमेरिका ने कतर को आगे आने के लिए कहा। दरअसल, कतर की स्थिति एकदम अलग है। यह ना सिर्फ अमेरिका का एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी है बल्कि कतर में मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा, अल उदेद (Al Udeid) स्थित है। इसी रणनीतिक स्थिति के कारण वह वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के लिए एक भरोसेमंद बैकचैनल बन गया।

जोखिम भरी और गुप्त कूटनीति

जब समझौता टूटने की कगार पर था, तब कतर के वरिष्ठ वार्ताकारों अली अल-थवाड़ी और हमद अल-कुबैसी की टीम ने गुप्त रूप से तेहरान की यात्रा की। इस दौरान अमेरिकी बमबारी और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच कतर के मध्यस्थ तेहरान में फंस गए थे, लेकिन उन्होंने पीछे हटने के बजाय बातचीत जारी रखी। इस ‘रोलर कोस्टर राइड’ जैसे माहौल में भी कतर ने सीधे युद्ध को रोकने और समझौते की रूपरेखा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया।

क्षेत्रीय नेताओं के साथ समन्वय और ट्रंप पर प्रभाव

कतर ने अकेले ये कूटनीतिक काम नहीं किया, बल्कि उसने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेताओं के साथ मिलकर ट्रंप को इस बात के लिए राजी किया कि वे सैन्य हमले टाल दें और कूटनीति को समय दें। कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी ने अन्य क्षेत्रीय नेताओं के साथ सीधे ट्रंप से संपर्क साधा, जिसके बाद ट्रंप ने गंभीर बातचीत चलने की बात कहते हुए हमला स्थगित कर दिया।

17 घंटे का अंतिम ‘मैराथन’ और दबाव की रणनीति

समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कतरी वार्ताकारों ने तेहरान में 17 घंटे की मैराथन बैठक की। इस दौरान उन्होंने तेहरान पर दबाव बनाने के लिए एक चतुर रणनीति अपनाई। उन्होंने ईरानी अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर ट्रंप के एक विशेष कार्यक्रम (उनके 80वें जन्मदिन के उत्सव) से पहले समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिकी हमलों का जोखिम नाटकीय रूप से बढ़ जाएगा। जब ईरानी अधिकारी शब्दों के फेरबदल पर अड़े थे, तब कतर ने वार्ता से हटने की धमकी दे डाली। इस तरह कतर ने आखिरकार तेहरान को झुकने पर मजबूर कर दिया।

समझौते से क्या फ़ायदा होगा?

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खत्म करने के लिए हुए अंतरिम समझौते से होर्मुज समुद्री मार्ग फिर से खुल जाएगा और दोनों दुश्मन देश तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए फिर से साथ आएंगे। दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इससे ईरान को त्वरित लाभ भी होगा और वह फिर से अपना तेल किसी रोक-टोक के बिना बेच सकेगा। ईरान को तेल से होने वाली नई कमाई के अलावा, दोनों पक्ष कमोबेश उसी स्थिति में वापस आ गए हैं, जहां वे साढ़े तीन महीने पहले थे-यानी इजरायल और अमेरिका द्वारा युद्ध शुरू किए जाने से पहले। इस युद्ध में पूरे क्षेत्र में हज़ारों लोग मारे गए, वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हुआ और अमेरिकी अर्थव्यवस्था हिल गई।

कम हो सकती है महंगाई

अमेरिका और ईरान 60 दिन की बातचीत के दौर में शामिल होंगे। उनके सामने मुख्य सवाल यह होगा कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2015 के उस परमाणु समझौते से बेहतर समझौता हासिल कर पाएंगे, जिसे उन्होंने आठ साल पहले रद्द कर दिया था। ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना, शायद उसका सबसे मजबूत हथियार साबित हुआ। दुनिया के व्यापारिक तेल की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी जलमार्ग से होती थी।इसकी वजह से दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ गईं, खाने-पीने की चीज़ें और खाद जैसे दूसरे उत्पाद महंगे हो गए, तथा अमेरिका में कांग्रेस के लिए मध्यावधि चुनाव से पहले वहां महंगाई दर चार प्रतिशत तक पहुंच गई।शांति समझौता होने से ये कम होगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN