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डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के करीब पहुंच सकता है, आप पर क्या पड़ेगा असर?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Dollar Vs INR:  2026 में रुपया औसतन हर महीने करीब 1% कमजोर हुआ है
  • अगर यही रफ्तार जारी रही तो अगले 6 महीनों में डॉलर के मुकाबले 100 रुपये का स्तर भी छू सकता है
  • आइए समझें रुपये में गिरावट की वजह और आम आदमी पर होने वाले असर को…

भारतीय रुपया अगले तीन से छह महीनों में रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास बना रह सकता है। रॉयटर्स के 35 करेंसी एक्सपर्ट्स के सर्वे के मुताबिक, अगले तीन महीने में रुपया 96.10 रुपये प्रति डॉलर और मार्च के अंत तक 96.50 रुपये तक कमजोर हो सकता है। वहीं, 2026 में रुपया औसतन हर महीने करीब 1% कमजोर हुआ है। अगर यही रफ्तार जारी रही तो अगले छह महीनों में डॉलर के मुकाबले 100 रुपये का स्तर भी छू सकता है।

आज भी रुपया हुआ कमजोर

आज यानी मंगलवार को भी शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 4 पैसे कमजोर होकर 96.39 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने रुपये पर दबाव बनाया।

हालांकि, घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी ने रुपये की गिरावट को सीमित किया। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में 4,699.14 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।

क्यों गिर रहा रुपया

रुपये पर विदेशी पूंजी की लगातार निकासी का दबाव है। इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से करीब 29 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। वहीं, 2026 में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 7% कमजोर हो चुका है। एक्सपर्ट्स के अनुमान हैं कि एक साल बाद रुपया 97.50 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच सकता है।

हालांकि, सर्वे में शामिल किसी भी एक्सपर्ट्स ने अगले एक साल में रुपये के 100 के पार जाने का अनुमान नहीं लगाया। BofA, यूओबी और Barclays ने सितंबर 2027 के अंत तक रुपये का अनुमान 99 रुपये प्रति डॉलर लगाया है।

कमजोर रुपये से आप पर क्या पड़ेगा असर

रुपये की कमजोरी से सबसे ज्यादा नुकसान कच्चे तेल के आयात पर होता है। कच्चे तेल का आयात बिल में बढ़ोतरी होगी और विदेशी मुद्रा ज्यादा खर्च करना होगा। इससे पेट्रोल-डीजल के महंगे होने के आसार बढ़ जाते हैं। रुपया कमजोर हो तो कैपिटल गुड्स के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर को भी नुकसान होता है। क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक गु्ड्स आयात का आयात महंगा पड़ेगा।

खाद की कीमतों पर असर: भारत बड़ी मात्रा में जरूरी फर्टिलाइजर्स और केमिकल्स का आयात करता है। रुपये की कमजोरी से खाद और रसायन भी महंगे होंगे। आयात करने वालों को यह अधिक दाम में कम सामान मिलेगा। इससे इस क्षेत्र को सीधा नुकसान होगा। वहीं रुपये की कमजोरी का नकारात्मक असर जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर पर दिखाई देगा। इससे यह महंगा होगा और आयात पर भी इसका असर आएगा।

RBI के हस्तक्षेप से मिला सपोर्ट

रुपये को संभालने के लिए RBI ने बाजार में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया है। 25 सितंबर तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 750 अरब डॉलर था। अगस्त में RBI की नेट फॉरवर्ड डॉलर देनदारियां बढ़कर रिकॉर्ड 200 अरब डॉलर पहुंच गईं।

केनरा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री माधवांकुट्टी ने कहा कि अगले कुछ महीनों में रुपया कमजोर रह सकता है। उनके मुताबिक, जब अमेरिकी ट्रेजरी जैसे सुरक्षित निवेश पर करीब 5.25% रिटर्न मिल रहा है, तो विदेशी निवेशकों के भारत में निवेश करने का आकर्षण कम होता है।

आरबीएल बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री अनिता रंगन के अनुसार, RBI रुपये को एक सीमित दायरे में रखकर धीरे-धीरे कमजोर होने देना चाहेगा, लेकिन जब तक विदेशी पूंजी नहीं आती, रुपये पर दबाव बना रहेगा।

इनपुट्स: रॉयटर्स, पीटीआई

SOURCE : LIVE HINDUSTAN