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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/10/10/1200x900/Rajnikanth_Dk_1791626783825_4PSP_1791626787798_JKs5_d49e038d-12f1-49eb-b755-a611fd00d6d0_CAtH.jpgJailer 2: रजनीकांत की फिल्म जेलर-2 की रिलीज से पहले जान लीजिए कितनी बढ़ने वाली हैं कीमतें।
सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर-2’ सिनेमाघरों में 15 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही है। फिल्म का पहला पार्ट सुपरहिट रहा था। साल 2023 में बनी यह फिल्म करीब 200 करोड़ रुपये की लागत में बनी थी और इसने 650 करोड़ रुपये का ग्रॉस ग्लोबल कलेक्शन किया था। अब पार्ट-2 को लेकर दर्शकों में काफी एक्साइटमेंट है। इसी बीच फिल्म की टिकटों की कीमत बढ़ाए जाने की खबर आई है। जानकारी के मुताबिक फिल्म की टिकटें 15 से 21 अक्टूबर के बीच महंगी मिलेंगी? टिकटों की कीमत कितनी बढ़ाई गई है और यह कहां लागू होगी? चलिए जानते हैं।
टिकटों पर बढ़ाए गए इतने रुपये
दरअसल आंध्र प्रदेश सरकार ने रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ की टिकटों की कीमतें राज्य के सभी सिनेमाघरों में 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले 7 दिनों के लिए बढ़ाने की इजाजत दी है। शुक्रवार को जारी किए गए इस आदेश के मुताबिक सिंगल स्क्रीन थिएटर्स को हर रोज 5 शो के लिए एंट्री फीस पर 50 रुपये बढ़ाने की इजाजत मिली है। वहीं मल्टीप्लेक्स को स्टैंडर्ड फीस से 75 रुपये ज्यादा चार्ज करने की इजाजत दी गई है। यह बढ़ोतरी 15 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक लागू रहेगी।
लोगों को लेनी पड़ेंगी महंगी टिकट
सरल शब्दों में कहें तो आंध्र प्रदेश के भीतर पहले हफ्ते में जेलर-2 देखने जाने वालों को टिकट पर अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। बता दें कि आंध्र प्रदेश में टिकटों के दाम सरकार तय करती है। इसके तहत राज्य सरकार सभी सिनेमाघरों को बताती है कि वह किस फिल्म/शो के लिए अधिकतम कितने रुपये टिकट पर ले सकते हैं। क्योंकि मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन थिएटर्स के खर्चे और लागत अलग-अलग हैं, ऐसे में दोनों के लिए आमतौर पर अलग-अलग प्राइजिंग तय की जाती है।
सरकार से लेनी पड़ती है इजाजत
सरकार द्वारा तय की गई कीमत के ऊपर अगर कोई फिल्म का शो अपनी टिकट बेचना चाहता है, तो उसके लिए पहले सरकार से इजाजत लेनी होती है। आंध्र प्रदेश भारत के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां थिएटर की टिकटों की कीमतें सरकार तय करती है। इसके पड़ोसी राज्य तेलंगाना में भी मिलता जुलता, लेकिन अलग रेग्युलेशन सिस्टम लागू है। बाकी ज्यादातर राज्यों में टिकटों की कीमत बाजार तय करता है। यानि मेकर्स और थिएटर्स मालिक वह कीमत वसूल सकते हैं जो उन्हें लगता है कि दर्शक भुगतान करने को तैयार होंगे।
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