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देश पर कब्जे के लिए… विरोध-प्रदर्शन के पीछे इस्लाम; फ्रांस में अशांति पर ट्रंप का बड़ा दावा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के लिए बड़े पैमाने पर प्रवास और इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन स्कूलों की समस्या को लेकर नहीं, बल्कि एक समय के महान देश पर कब्जे की कोशिश है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के लिए बड़े पैमाने पर प्रवास और इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने साफ कहा कि यह आंदोलन स्कूलों की समस्या को लेकर नहीं है, बल्कि उनके अनुसार यह एक बड़े राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलाव की कोशिश है। ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट लिखी। इसमें उन्होंने कहा कि फ्रांस में जो हो रहा है, वह बेकाबू बड़े पैमाने पर प्रवास से कम नहीं है। यह स्कूलों के बारे में नहीं है। यह इस्लाम के बारे में है, जो एक समय के महान देश पर कब्जा करना चाहता है।

ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में अगले महीने मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। ट्रंप और उनके राजनीतिक आंदोलन के सदस्य यूरोप की कई सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं को प्रवास से जोड़ते रहे हैं। वे सीमा सुरक्षा को सख्त करने और प्रवास पर नियंत्रण की बात बार-बार करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति से पहले कमेंटेटर ग्लेन बेक ने सोमवार को कहा था कि फ्रांस में हो रही अशांति बाकी पश्चिमी देशों के लिए साफ चेतावनी है। उनके समर्थकों ने प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और इन्हें प्रवास तथा सांस्कृतिक बदलाव से जोड़कर पेश किया।

फ्रांस में क्यों हो रहा प्रदर्शन?

बता दें कि फ्रांस में ये प्रदर्शन स्कूलों की बिगड़ती हालत को लेकर शुरू हुए थे। छात्रों और उनके संगठनों का कहना है कि शिक्षकों की भारी कमी है, कक्षाओं में छात्रों की संख्या बहुत अधिक है, स्कूल की इमारतें खराब हो रही हैं और कई जगहों पर स्कूल का दिन बहुत लंबा हो गया है। उन्होंने नर्सों और अन्य सहयोगी कर्मचारियों की कमी पर भी चिंता जताई है। उनका दावा है कि शिक्षा पर खर्च कम होने और संसाधन न मिलने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ये विरोध 17 सितंबर को पेरिस के उपनगर क्रेतेइल से शुरू हुए। इसके बाद आंदोलन तेजी से देश के दूसरे हिस्सों में फैल गया।

कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन

मार्सिले, ल्योन, लिल, स्ट्रासबर्ग और टूर्स समेत कई बड़े शहरों में छात्र सड़कों पर उतरे। कई स्कूलों में तालाबंदी हुई और कक्षाएं बाधित रहीं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से शिक्षकों की भर्ती बढ़ाने, कक्षाओं में भीड़ कम करने और स्कूलों की मरम्मत के लिए पैसा देने की मांग की। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को देश भर में करीब 2 लाख 56 हजार लोगों ने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। इनमें अकेले पेरिस में करीब 56 हजार लोग शामिल थे। वहीं आयोजकों ने बताया कि पूरे देश में लगभग 4 लाख 50 हजार लोग सड़कों पर आए।

कुछ शहरों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें आईं। फ्रांस के अधिकारियों का कहना है कि अशांति शुरू होने के बाद 24 स्कूलों को जला दिया गया या उनमें तोड़फोड़ की गई। इन घटनाओं में 78 शिक्षा कर्मचारी घायल हुए। अधिकारियों ने हिंसा की निंदा की है और कहा है कि स्कूलों को नुकसान पहुंचाना शिक्षा की मांगों को कमजोर करता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN