Source :- LIVE HINDUSTAN

Petrol Diesel Rates: पेट्रोल-डीजल महंगा होने से बस, टैक्सी और माल ढुलाई का खर्च बढ़ सकता है। सब्जियां, दूध और अन्य खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं। ऑनलाइन डिलीवरी और परिवहन सेवाओं की लागत बढ़ सकती है। खुदरा महंगाई पर नया दबाव बन सकता है।

पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। एक बार फिर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के रीब पहुंच रहा है। वहीं, 15 मई से अब तक सरकारी तेल कंपनियां चार बार कीमतें बढ़ा चुकी हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर महंगे हो चुके हैं। एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।

कब-कब कितने बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

सबसे पहले 15 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने ₹3 प्रति लीटर की बड़ी छलांग लगाई गई थी। इसके बाद दूसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम 19 मई को बढ़े। इसमें करीब 90 पैसे की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद तीसरी बार 23 मई को पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी और चौथी बार 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये महंगा हुआ था।

अब रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि तेल कंपनियों के घाटे को देखते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम में करीब 2.5 रुपये प्रति लीटर की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। अगर ऐसा होता है तो कुल बढ़ोतरी 10 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच जाएगी।

20-20 रुपये की बढ़ोतरी की आशंका

इससे पहले भी पेट्रोल-डीजल में 20-20 रुपये की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी। तब सरकार ने फौरन पेट्रोल-डीजल से 10-10 रुपये टैक्स घटा दिए थे। अगर सरकार की इस राहत को जोड़ लें तो अब केवल 2.50 रुपये की बढ़त की गुंजाइश अब भी बाकी है।

पेट्रोल-डीजल की महंगाई से खाने-पीने की चीजें भी हो सकती हैं महंगी

क्रिसिल के अनुसार फ्यूल की कीमतों में वृद्धि का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर दूध, सब्जियों, अनाज, फल और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

एजेंसी का अनुमान है कि पेट्रोल-डीजल में अब तक हुई 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई (CPI) पर लगभग 0.36 प्रतिशत का अतिरिक्त दबाव आ सकता है। अगर कुल बढ़ोतरी 10 रुपये तक पहुंचती है तो महंगाई पर असर और बढ़कर करीब 0.48 प्रतिशत हो सकता है।

तेल कंपनियों पर अब भी भारी दबाव

हालांकि ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, लेकिन सरकारी तेल कंपनियां अभी भी भारी घाटा झेल रही हैं। उद्योग के अनुमान के अनुसार पेट्रोल और डीजल पर अंडर-रिकवरी अभी भी बनी हुई है और कंपनियों को रोजाना सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।

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