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फिल्म जिसमें किया गया काली माता का अपमान! भारतीय को भी गलत ढंग से दिखाया गया

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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आज आपको बताएंगे एक ऐसी फिल्म के बारे में जिसमें भारतीयों को बहुत गलत ढंग से दिखाया गया। भारत सरकार ने स्क्रिप्ट में बदलाव करने का सुझाव दिया तो डायरेक्टर ने इसे दूसरे देश में शूट किया।

आज की तारीख में अगर किसी विदेशी फिल्म में भारतीयों या फिर भारतीय संस्कृति का अपमान कर दिया जाए तो हंगामा हो जाता है। लेकिन एक फिल्म ऐसी है, जिसमें ना सिर्फ भारतीय देवी-देवताओं को गलत ढंग से दिखाया गया है, बल्कि भारतीयों का भी अपमान किया गया है। शॉकिंग बात तो यह है कि इसमें अमरीश पुरी जैसे बड़े भारतीय एक्टर्स ने भी काम किया था। इतना ही नहीं, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट भी रही और इसकी IMDb पर रेटिंग 7.5 है। तो चलिए जानते हैं कौन सी है यह फिल्म और क्या है यह पूरा किस्सा।

शूटिंग करने पहले भारत आए थे फिल्ममेकर्स

जुरासिक पार्क, शिंडलर्स लिस्ट, जॉज़ और ईटी जैसी आइकॉनिक फिल्में बना चुके निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग को साल 1984 में एक ऐसी फिल्म बनानी थी, जिसमें भारतीयों को वह एक खास ढंग से दिखाना चाहते थे। वह इस फिल्म की शूटिंग करने इंडिया आए और उन्होंने जयपुर में सिटी पैलेस और आमेर फोर्ट पर रेकी की थी। लेकिन जब इसकी स्क्रिप्ट सामने आई तो वही हुआ जिसकी उम्मीद थी। भारतीय सरकार ने उन्हें यहां पर इस तरह की फिल्म शूट करने की इजाजत ही नहीं थी।

भारतीयों को वहशी-जंगलियों जैसा दिखाया

दरअसल इस फिल्म में भारतीयों को सांप खाते हुए, इंसान की आंखें, कीड़े मकौड़े खाते हुए और यहां तक कि बंदर का दिमाग खाते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं, इस फिल्म में काली माता को एक बुरी देवी के तौर पर दिखाया गया है। हालांकि मेकर्स ने सुरक्षा के लिहाज से छोटे-मोटे बदलाव किए थे, लेकिन भारतीय बैकड्रॉप में दिखाई गई यह देवी काली मां हैं, यह आप साफतौर पर समझ सकते हैं। भारत सरकार ने इजाजत नहीं दी, लेकिन विदेशी निर्देशक स्टीवन जिद्दी थे और उन्होंने भी ठान लिया कि वह फिल्म इसी तरह बनाएंगे।

नहीं मिली इजाजत, फिर भी बनाई फिल्म

दरअसल उन्हें ऐतिहासिक तौर पर ठीक नहीं दिखना था, वह तो चाहते थे कि भारतीयों को एक बुरे और काले जादू वाली दुनिया के तौर पर दिखाया जाए जहां इंसानों की बलि दी जाती है। तो इसके लिए वह यहां इजाजत नहीं मिलने पर वो श्रीलंका पहुंच गए और फिर जंगल वाले सीन्स उधर शूट करने के बाद महलों वाले सीन्स के लिए उन्होंने ब्रिटेन का रुख किया। लेकिन स्पीलबर्ग इस बात को नहीं माने कि स्क्रिप्ट में बदलाव करने चाहिए। भारत सरकार पहले ही भांप गई थी कि मेकर्स भारतीयों को नस्लभेदी ढंग से दिखाना चाह रहे हैं, लेकिन फिर भी यह फिल्म बनी और रिलीज हुई।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN