Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जो अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं लेकिन कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जिन्हें भूतिया कहा जाता है। आज हम भारत के आखिरी छोर कहे जाने वाले गांव की बात कर रहे हैं। ये गांव अब वीरान हो चुका है लेकिन एक समय था जब यहां का बीच टूरिस्ट के बीच काफी फेमस था।

भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जो अपनी खूबसूरती और बीच के लिए जानी जाती हैं, ऐसा ही भारत का एक गांव भी था। जहां पर समुद्र बीच का मजा लेने हजारों लोग घूमने जाते थे। इस गांव को भारत का आखिरी छोर भी कहा जाता है और यहां से श्रीलंका बिल्कुल साफ दिखाई देता है। ऐसे में कई लोगों का ये भी कहना था कि भगवान राम भी इस गांव में आए थे, लेकिन आज ये गांव बिल्कुल वीरान पड़ा हुआ है। यहां पर दिन में तो आपको भीड़-जाम मिलेगा लेकिन रात में यहां सन्नाटा पसर जाता है। आज हम जिस गांव की बात कर रहे हैं, उसका नाम है धनुषकोडी। इसका नाम ऐसे पड़ा कि महाकाव्य के अनुसार, भगवान राम ने सीता माता को लंका से छुड़ाकर अपने धनुष के सिरे से पुल को नष्ट कर दिया था। इस प्रकार इस गांवका नाम ‘धनुषकोडी’ पड़ा, जिसका अर्थ है धनुष का अंत।

कहां पर है ये गांव

भारत के दक्षिण-पूर्वी छोर पर, तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित एक तटीय कस्बा है। यह पंबन द्वीप (Pamban Island) के पूर्वी सिरे पर स्थित है और रामेश्वरम से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। धनुषकोडी को भारत का अंतिम भू-छोर कहा जाता है, क्योंकि इसके आगे समुद्र है और श्रीलंका की दूरी यहां से काफी कम है।

क्यों कहा जाता है भूतों वाला गांव

धनुषकोडी एक समय में आबाद था और यहां पर लोग रहा करते थे लेकिन आज ये एकदम वीरान-सुनसान पड़ा हुआ है और इसके पीछे कारण है साल 1964, दिसंबर में आया भयानक चक्रवात। इस तूफान ने पूरे गांव को उजाड़कर रख दिया। इस तूफान में करीब 1800 लोग मारे गए और 200 यात्रियों से भरी ट्रेन समुद्र में डूब गई। ऐसा कहा जाता है कि उस ट्रेन का कुछ पता नहीं चला और यात्रियों का भी। आज इस गांव में उस समय पर उजड़े स्कूल, चर्च और दुकानों के कुछ अवशेष देखने को मिलते हैं। ये गांव पूरी तरह से खंडहर बन चुका है। यहां हुई इतनी मौतों की वजह से सरकार ने इसे खाली करने के लिए कहा और यही कारण है कि लोग अब इसे भूतिया गांव कहते हैं।

रात में नहीं जाते हैं लोग

दिन में इस गांव से होकर लोग आना-जाना करते हैं और कई मछुआरे यहां पर मछली पकड़ने भी आते हैं लेकिन शाम होते ही गांव बिल्कुल खाली हो जाती है। यह द्वीप अब लगभग 500 मछुआरों द्वारा बसा हुआ है जो धनुषकोडी में अपनी आजीविका के लिए पूरे शहर में फैले लगभग 50 झोपड़ियों में रहते हैं। यहां पर लोगों को दिन में आने की परमिशन दी गई है, लेकिन रात में रुकना मना है।

भारत की अंतिम सड़क

धनुषकोडी में भारत की आखिरी सड़क है, ऐसा भी कहा जाता है। यहां से श्रीलंका की दूरी मात्र 31 किमी है। अब फिर से धनुषकोडी पर्यटकों के बीच उभर रहा है और फिर से अपनी पहचान बना रहा है। अब लोग इस गांव को देखने जाने लगे हैं और समुद्र के किनारे बैठकर चाय का मजा भी लेते हैं। समुद्र के किनारे आपको 2-3 झोपड़ियां और चाय की टपरी मिल जाएंगी लेकिन शाम होने से पहले ही लौटना पड़ेगा।

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