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भोजपुरी का वंदे मातरम, 115 साल पहले 7 देशों के गायकों ने मिलकर गाया था बिहार का यह गाना

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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भोजपुरी में सिर्फ बोल्ड गाने ही नहीं बनते हैं। कई देशभक्ति गीत भी बनते हैं। आइए आपको एक देशभक्ति गीत के बारे में बताते हैं जो 115 साल पुराना है। 

बिहार के लोकगीतों की बात हो और ‘बटोहिया’ का जिक्र न हो, ऐसा हो नहीं सकता। कई लोग इस गाने को ‘सुंदर सुभूमि भैया’ के नाम से भी जानते हैं। इसे भोजपुरी का वंदे मातरम भी कहते हैं। क्यों? वो समझने के लिए हमें साल 1911 में जाना होगा। उस समय बिहार के सारण जिले में रघुबीर नारायण नाम के एक विद्वान और वकील रहते थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें अपनी मातृभाषा में लिखने की सलाह दी। उन्होंने रघुबीर नारायण से कहा कि वह अपनी भाषा में लिखें और अपनी मिट्टी की आवाज बनें। इस बात का उन पर गहरा असर हुआ। इसके बाद उन्होंने भोजपुरी में ‘बटोहिया’ गीत लिखा, जो धीरे-धीरे लोगों के दिलों में बस गया।

इस गाने का मतलब क्या है?

भोजपुरी में ‘बटोही’ का मतलब होता है यात्री या राहगीर। ‘बटोहिया’ उसी यात्री को प्यार से बुलाने का तरीका है। लेकिन इस गीत के पीछे सिर्फ अपनी मातृभूमि की खूबसूरती का बखान नहीं है, बल्कि अपनों से दूर रहने का दर्द भी छिपा है। अंग्रेजों के शासन के दौरान बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहुत से गरीब मजदूरों को काम के लिए दूसरे देशों में भेज दिया गया था। वहां उन्हें बागानों में काम करना पड़ता था। इन मजदूरों को ‘गिरमिटिया मजदूर’ कहा जाता था। वे अपने घर, परिवार और देश से हजारों मील दूर रहने को मजबूर थे। ‘बटोहिया’ गीत में एक ऐसे ही मजदूर के दर्द को दिखाया गया है।

गाने में क्या कहते हैं मजदूर?

विदेश में रह रहा एक मजदूर जब भारत की ओर जाने वाले यात्री को देखता है, तो उससे अपने देश का हाल जानने की गुजारिश करता है। वह चाहता है कि यात्री भारत जाए और उसकी प्यारी मातृभूमि को देखकर आए। गीत की पंक्तियां हैं: ‘जाऊ-जाऊ भैया रे बटोही, हिंद देखी आउ…’ इसका मतलब है कि हे यात्री भाई, तुम भारत जरूर जाना और मेरे प्यारे देश को देखकर आना। इन शब्दों में उस इंसान का दर्द छिपा है, जो अपने देश को याद तो करता है, लेकिन चाहकर भी वहां लौट नहीं सकता।

गाने में भारत की खूबसूरती का भी जिक्र

गीत में आगे भारत की खूबसूरती का भी जिक्र किया गया है। इसमें देश को एक ऐसी धरती बताया गया है, जिस पर हर किसी को गर्व होना चाहिए। ‘सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से…’ इन पंक्तियों में भारत की सुंदरता का बखान किया गया है। गीत में हिमालय को देश के रक्षक की तरह बताया गया है, जबकि तीन दिशाओं में फैला समुद्र भारत की प्राकृतिक खूबसूरती को और खास बनाता है।

भगवान राम, माता सीता और भगवान कृष्ण की कहानियों का भी जिक्र

लेकिन इस गीत की खासियत सिर्फ भारत की नदियों, पहाड़ों और समुद्र का जिक्र करना नहीं है। इसमें देश की संस्कृति और परंपराओं की झलक भी मिलती है। गीत में चारों वेदों के ज्ञान के साथ भगवान राम, माता सीता और भगवान कृष्ण की कहानियों का जिक्र है। इसके अलावा गौतम बुद्ध, महावीर और कबीर जैसे महान लोगों की शिक्षाओं की झलक भी देखने को मिलती है। यानी इस गीत के जरिए रघुबीर नारायण ने भारत की खूबसूरती के साथ-साथ उसकी संस्कृति और विरासत को भी सामने रखा।

इसलिए कहलाता है ‘भोजपुरी का वंदे मातरम’

धीरे-धीरे यह गीत बिहार के गांवों में लोकप्रिय हो गया। लोगों को इसमें अपने देश के लिए प्यार और गर्व की भावना दिखाई दी। यही वजह है कि इसे ‘भोजपुरी का वंदे मातरम’ भी कहा जाने लगा। उस दौर में जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था, तब इस गीत ने लोगों को अपनी भाषा, संस्कृति और देश की अहमियत याद दिलाई। समय के साथ यह गीत भले ही पहले जितना सुनाई देना बंद हो गया हो, लेकिन इसकी अहमियत आज भी बनी हुई है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने भी इसे अपनी यादों और अपनी जड़ों से जोड़कर रखा।

7 देशों के 11 गायकों ने गाया है यह गाना

बताया जाता है कि भारत, सूरीनाम, हॉलैंड, मॉरीशस, त्रिनिदाद, गुयाना और फिजी समेत सात देशों के 11 गायकों ने मिलकर इस गीत को गाया था। इनमें उन गिरमिटिया मजदूरों की पीढ़ियों से जुड़े लोग भी शामिल थे, जिनके पूर्वज कभी काम की तलाश में अपना देश छोड़कर दूर-दराज के देशों में चले गए थे। भले ही उनकी कई पीढ़ियां विदेश में ही बस गईं, लेकिन भारत से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ। ‘बटोहिया’ जैसे गीत उन्हें अपने पुरखों की मिट्टी, उनकी भाषा और उनकी संस्कृति की याद दिलाते रहे। यही इस गीत की सबसे बड़ी खूबी है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN