Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Getty Images
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) घर पर किया जा सकने वाला एक यूरिन टेस्ट का परीक्षण कर रही है.
इससे ब्लैडर कैंसर के 10 में से 9 से ज़्यादा मामलों का पता लगा सकता है. ताज़ा निष्कर्षों से यह बात सामने आई है.
यूरोपियन यूरोलॉजी ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंगम और डायग्नोस्टिक्स कंपनी नॉनाकस ने किया. इसमें इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के सात अस्पतालों में क़रीब 1,000 मरीज़ शामिल हुए.
रिसर्चरों को उम्मीद है कि इससे तत्काल और अधिक इनवेसिव प्रक्रिया, जिसे सिस्टोस्कोपी कहा जाता है, की ज़रूरत वाले मरीज़ों की संख्या कम हो सकती है. इसमें मूत्रमार्ग के रास्ते ब्लैडर के अंदर एक छोटा कैमरा डाला जाता है.
अगर बड़े स्तर पर किया जाने वाला परीक्षण सफल रहा, तो हर साल हज़ारों मरीज़ों को इन जांचों से बचाया जा सकता है.
मरीज़ों के लिए ज़्यादा सुविधाजनक
ब्रिटेन में हर साल तीन लाख से अधिक सिस्टोस्कोपी की जाती हैं और कुछ इलाक़ों में मरीज़ों की लंबी वेटिंग लिस्ट है.
यूरिन टेस्ट सिस्टोस्कोपी का विकल्प नहीं है, लेकिन यह डॉक्टरों को उन मरीज़ों की पहचान करने में मदद कर सकता है, जिनमें ब्लैडर कैंसर का जोखिम ज़्यादा है.
ऐसे मरीज़ों को तत्काल सिस्टोस्कोपी के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है, बजाय इसके कि उन्हें लंबे समय तक इंतज़ार करना पड़े.
एनएचएस के इस परीक्षण में पाया गया कि गैलीज यूरिन टेस्ट ने ब्लैडर कैंसर के 92% मामलों की पहचान की.
निगेटिव रिजल्ट का मतलब था कि इस बात की 99% से अधिक संभावना है कि मरीज़ को ब्लैडर कैंसर नहीं है.
यह टेस्ट ब्लैडर कैंसर की ओर से यूरिन में छोड़े गए किसी भी जेनेटिक मटीरियल की जांच करता है. इसे मूल रूप से यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्मिंगम ने कैंसर रिसर्च यूके की फंडिंग से विकसित किया था.
यह 23 जीन में ब्लैडर कैंसर से जुड़े 450 से अधिक डीएनए म्यूटेशन की जांच करता है.
स्टडी के को-राइटर और बर्मिंगम यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर रिचर्ड ब्रायन ने कहा कि इस साइंस को विकसित करने और इसकी जांच करने में कई साल बिताने के बाद, बड़ी संख्या में वास्तविक मरीज़ों के बीच इसके “बहुत आशाजनक शुरुआती प्रदर्शन” को देखना उत्साहजनक था.
एक लाइसेंसिंग समझौते के तहत इस टेस्ट का व्यावसायीकरण नोनकस ने किया है. यह कंपनी अपने राजस्व का एक हिस्सा यूनिवर्सिटी और कैंसर रिसर्च यूके को देती है.
कैंसर रिसर्च यूके की मिशेल मिशेल ने कहा, “बहुत से लोग ब्लैडर कैंसर के निदान के लिए जितना इंतज़ार करना चाहिए, उससे ज़्यादा समय तक इंतज़ार कर रहे हैं और इस समस्या से निपटने के तरीक़े तलाशना बेहद ज़रूरी है.
“इस टेस्ट के लिए अभी शुरुआती दौर है और आगे और रिसर्च की ज़रूरत है, लेकिन यह ज़रूरी है कि हम कैंसर का पता लगाने या उसे ख़ारिज करने में मदद करने के लिए तेज और कम इनवेसिव तरीक़ों की तलाश जारी रखें.”
ब्लैडर कैंसर 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में ज़्यादा आम है और इसका मुख्य लक्षण यूरिन में ख़ून आना है.
ब्लैडर कैंसर कितना गंभीर है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितना बड़ा है और क्या यह शरीर के किसी दूसरे हिस्से में फैल चुका है.
कैंसर का समय रहते पता चलना और इलाज होना जान बचाता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
SOURCE : BBC NEWS




