Source :- LIVE HINDUSTAN
बीते साल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को स्थगित कर दिया था। भारत ने कहा है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं दिया जाएगा।
पाकिस्तान सिंधु जल समझौते के निलंबित होने से बुरी तरह बौखलाया हुआ है। अलग अलग वैश्विक मंचों पर रोने के बाद भी जब पाकिस्तान की दाल नहीं गली, तब उसने अब एक नया नाटक शुरू किया है। मंगलवार को पाकिस्तान ने इसे लेकर एक ‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस’ बुलाई थी। यहां पाकिस्तान के कई नेताओं ने सिंधु जल संधि को दोबारा लागू करने की बात कही। लेकिन हास्यास्पद यह रहा कि पाकिस्तान इस कार्यक्रम में भारत का नाम तक नहीं ले पाया।
दरअसल पाकिस्तान को बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से करारी हार मिली थी और वह इस हार को अब तक भूल नहीं पाया है। ऐसे में भारत का खौफ लाजमी है और इसीलिए पाकिस्तानी मंत्रियों ने सीधे तौर पर भारत का नाम नहीं लिया और भारत के लिए ‘ताकतवर देश’ शब्द का प्रयोग किया। पाकिस्तान के एक सांसद मुसादिक मलिक ने कहा कि कोई ताकतवर देश अपनी मर्जी से किसी समझौते को रद्द नहीं कर सकता।
मलिक ने अपने बयान में कहा, “सिंधु जल समझौते ने दोनों परमाणु शक्तियों के बीच तीन युद्ध देखे हैं, फिर भी यह टिका रहा। अंतरराष्ट्रीय कानून की परीक्षा तब होती है जब वह कमजोर देश की रक्षा करे।” उन्होंने आगे कहा, “अंतरराष्ट्रीय संधियों की क्या कीमत जाएगी अगर कोई ताकतवर देश सुबह सोकर उठे और कह दे कि यह समझौता मुझ पर लागू नहीं होता और वह एकतरफा इसे सस्पेंड कर दे? इतिहास में ऐसे रवैये से नरसंहार हुए हैं।”
अपने गिरेबान में नहीं झांक रहा पाकिस्तान
हालांकि पाकिस्तान शायद यह भूल गया है कि भारत ने इस समझौते को यू हीं नहीं निलंबित किया। यह पाकिस्तान की करतूतों का ही परिणाम है कि भारत को यह कदम उठाना पड़ा। दरअसल बीते साल अप्रैल में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने यह समझौता स्थगित कर दिया था। इस हमले में पाक के पाले हुए आतंकियों ने पहलगाम में घूमने आए पर्यटकों को धर्म पूछ पूछकर बेरहमी से मार डाला। हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने न सिर्फ सिंधु जल संधि को स्थगित किया, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर जैसा अभियान चलाकर पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। भारत ने स्पष्ट किया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। तब से पाकिस्तान का रोना जारी है। इसे लेकर ही पाकिस्तान ने मंगलवार को एक ‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस’ बुलाई।
खूब रोए पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री
इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार भी रोए। उन्होंने यहां अपने संबोधन में बेतुकी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि स्थगित करने के भारत के फ़ैसले को खारिज करता है और यह अब भी वैध और प्रभावी है। ‘रेडियो पाकिस्तान’ की खबर के अनुसार डार ने दावा किया कि ‘कोई भी पक्ष एकतरफा तौर पर ऐसी संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता, जिसमें ऐसा कोई प्रावधान न हो।’ बता दें कि दोनों देशों ने सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर किए थे।
बिलावल भुट्टो जरदारी का अलग ही राग
इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी भी पहुंचे थे। यहां लोगों को संबोधित करते हुए जरदारी ने कहा कि सिंधु नदी सौदेबाजी या बातचीत का विषय नहीं है। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री जरदारी ने जलमार्गों के ‘हथियार के रूप में इस्तेमाल’ के खिलाफ एक नए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जलमार्गों का इस्तेमाल किसी देश पर दबाव बनाने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता और यह सिद्धांत पूरी दुनिया में लागू होना चाहिए।
सिंधु की तुलना होर्मुज से
जरदारी ने सिंधु नदी की तुलना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कर दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज, स्वेज नहर, पनामा नहर, नील नदी, टिगरिस नदी, यूफ्रेटिस नदी और सिंधु नदी जैसे सभी प्रमुख जलमार्ग चर्चा का विषय होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह होर्मुज बंद रहने की स्थिति में अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित नहीं हो सकती, वैसे ही सिंधु जल संधि की बहाली के बिना भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी संघर्षविराम लंबे समय तक कैसे कायम रह सकता है।
क्यों इतना रो रहा पाकिस्तान?
सिंधु जल समझौते के रुकने से पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ गई है। भारत द्वारा नदियों के पानी का हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा न करने के कारण पाकिस्तान पूरी तरह बेबस हो चुका है। उसे पता ही नहीं चल पाता कि भारतीय नदियों में कितना पानी आ रहा है, जिससे वह समय पर बाढ़ या सूखे से निपटने के कदम उठा पाए। वहीं पाकिस्तान की लगभग पूरी खेती और हाइड्रो पावर इसी सिंधु नदी के भरोसे चलती हैं। अब भारत के इस कदम से पाकिस्तान दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर है।
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