Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- रेलवे बोर्ड ने रिटायर्ड रेलवे कर्मचारियों के लिए रिटायर्ड एम्प्लॉईज लिबरलाइज्ड हेल्थ स्कीम से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में इसकी जानकारी दी है
- इसमें स्कीम में शामिल होने, रेलवे और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज, इमरजेंसी में मेडिकल सुविधा और UMID कार्ड से जुड़ी जरूरी बातें बताई गई हैं
रेलवे से रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा एक अहम फैसला लेना जरूरी है। रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी रेलवे की मेडिकल सुविधाओं का लाभ लेना चाहते हैं या हर महीने पेंशन के साथ 1,000 रुपये फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) लेना चाहते हैं, इसका विकल्प उन्हें चुनना होता है। रेलवे बोर्ड ने रिटायर्ड रेलवे कर्मचारियों के लिए रिटायर्ड एम्प्लॉईज लिबरलाइज्ड हेल्थ स्कीम (RELHS) से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQs) में इसकी जानकारी दी है। इसमें स्कीम में शामिल होने, रेलवे और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज, इमरजेंसी में मेडिकल सुविधा और UMID कार्ड से जुड़ी जरूरी बातें बताई गई हैं। आइए जानते हैं डिटेल….
मेडिकल सुविधा या ₹1,000 भत्ता, क्या है बेहतर विकल्प?
रेलवे कर्मचारियों के पास रिटायरमेंट के बाद दो विकल्प होते हैं। पहले विकल्प में कर्मचारी RELHS के तहत बिना FMA के मेडिकल सुविधा ले सकते हैं। इसमें लागू रेलवे नियमों के मुताबिक जीवनभर मेडिकल सुविधाएं मिलती हैं। रेलवे अस्पतालों में नियमित ओपीडी में इलाज कराने की सुविधा भी मिलती है। दूसरे विकल्प में कर्मचारी RELHS के साथ हर महीने ₹1,000 मेडिकल अलाउंस ले सकते हैं। हालांकि, इस विकल्प में रेलवे अस्पतालों में नियमित ओपीडी इलाज की सुविधा नहीं मिलती। इमरजेंसी और तय नियमों के तहत कुछ पुरानी बीमारियों के इलाज में छूट मिल सकती है।
रेलवे बोर्ड के मुताबिक, जो कर्मचारी ऐसे शहर में रहते हैं या रहने की योजना बना रहे हैं, जहां रेलवे की मेडिकल सुविधा उपलब्ध है, उनके लिए बिना FMA वाला विकल्प बेहतर हो सकता है। वहीं, ग्रामीण इलाके में स्थायी रूप से रहने वाले और 50 किलोमीटर के दायरे में रेलवे की मेडिकल सुविधा नहीं होने वाले कर्मचारियों के लिए FMA का विकल्प उपयोगी हो सकता है। बता कि दोनों विकल्पों के बीच बदलाव का मौका केवल एक बार मिलता है। इसलिए फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए।
RELHS में शामिल होने के लिए कितना देना होगा?
इस स्कीम में शामिल होने के लिए कर्मचारी को एक बार योगदान देना होता है। इसकी राशि रिटायरमेंट के समय के आखिरी बेसिक पे या 7वें वेतन आयोग के पे लेवल के आधार पर तय निर्धारित राशि में से जो कम होगी, उसके मुताबिक होगी। यह रकम रिटायरमेंट से मिलने वाली राशि या डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी से काटी जाती है।
रिटायरमेंट से पहले करें ये जरूरी काम
रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे रिटायरमेंट से करीब तीन महीने पहले पर्सनल ब्रांच में RELHS का विकल्प फॉर्म जमा कर दें। साथ ही यह भी जांच लें कि जरूरी योगदान कट गया है और UMID कार्ड बन गया है। कर्मचारियों को अपने पति या पत्नी और एलिजिबल डिपेंडेंट फैमिली के मेंबर का नाम भी UMID में जुड़वाना चाहिए। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर सही होना जरूरी है। पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO), आधार और UMID की जानकारी भी सुरक्षित रखें।
रेलवे और प्राइवेट अस्पतालों में कैसे मिलेगा इलाज?
RELHS के एलिजिबल लाभार्थी देश के किसी भी रेलवे अस्पताल या हेल्थ यूनिट में इलाज करा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर रेलवे डॉक्टर मरीज को दूसरे रेलवे अस्पताल या लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में रेफर कर सकते हैं। रेफरल के आधार पर तय नियमों के तहत कैशलेस इलाज मिल सकता है। सामान्य रेफरल 30 दिन और कैंसर के इलाज का रेफरल 90 दिन तक मान्य रहता है। जानलेवा इमरजेंसी में रेफरल का इंतजार किए बिना लिस्टेड अस्पताल में इलाज कराया जा सकता है। वहीं, गैर-लिस्टेड प्राइवेट अस्पताल में इमरजेंसी इलाज कराने पर बिल, डिस्चार्ज समरी और जांच रिपोर्ट संभालकर रखनी चाहिए। रिइंबर्समेंट का दावा इलाज पूरा होने के छह महीने के भीतर संबंधित चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (CMS) कार्यालय में जमा करना होता है। नॉन-लिस्टेड अस्पताल में अपनी मर्जी से कराए गए सामान्य नियोजित इलाज का खर्च वापस नहीं मिलता।
क्या फिजिकल UMID कार्ड जरूरी है?
नहीं, अलग से फिजिकल UMID कार्ड बनवाना जरूरी नहीं है। कर्मचारी HMIS ऐप के जरिए अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन कर सकते हैं। चाहें तो UMID पोर्टल से कार्ड का प्रिंट भी रख सकते हैं। रेलवे कर्मचारियों को सलाह है कि रिटायरमेंट से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी कर लें और अपनी जरूरत, रहने की जगह तथा परिवार की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखकर मेडिकल सुविधा का विकल्प चुनें। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अंतर या विवाद की स्थिति में संबंधित रेलवे नियम और पॉलिसीज ही मान्य होंगी।
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