Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता खत्म नहीं हुई है। पूर्व RBI गवर्नर और शिकागो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रघुराम राजन ने ये बात कही है। उन्होंने भारत की जीडीपी के बाद अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अहम चेतावनी दी। इसके साथ ही राजन ने कहा कि भारत को तेल के अलावा दवा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर भी रणनीति बनानी चाहिए।

तेल मंडार को मजबूत करने की जरूरत

ET Now से बात करते हुए रघुराम राजन ने कहा, ”भारत के कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। ऐसे में भारत को अपने रणनीतिक तेल भंडार को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि किसी भी संकट की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।” इसके साथ ही उन्होंने भारत को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान देने की सलाह दी।

रघुराम राजन ने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें भी कोयला उत्पादन बढ़ाने की क्षमता विकसित करनी होगी। हालांकि , उन्होंने यह भी कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं है क्योंकि भारत अभी भी सोलर पैनल और विंड एनर्जी इक्युपमेंट के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। उन्होंने भारतीय उद्योगों से इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की अपील की।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर के मुताबिक भारत को आयात के स्रोतों और निर्यात के मार्केट में विविधता लाने की जरूरत है। व्यापार पर राजन ने कहा कि भारत अभी साल की शुरुआत की तुलना में बेहतर स्थिति में है। बता दें कि साल की शुरुआत में अमेरिका से भारत को भारी टैरिफ की धमकियों का सामना करना पड़ा था। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि भारत पर प्रस्तावित 12.5% टैरिफ और एक्सेस कैपेसिटी जांच जैसे मुद्दे भविष्य में चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।

एफडीआई पर भी सवाल

रुपये की कमजोरी पर बोलते हुए राजन ने कहा कि यह दो वर्षों में डॉलर के मुकाबले लगभग 14% गिर चुका है। उन्होंने इस गिरावट को केवल तेल की कीमतों से जोड़ने से इनकार किया। राजन के मुताबिक भारत पर्याप्त एफडीआई यानी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित नहीं कर पा रहा है। घरेलू निवेश देश की मजबूत जीडीपी ग्रोथ के हिसाब से नहीं है। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को अगले 3 से 5 वर्षों के लिए सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि दवा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर भी रणनीति बनानी चाहिए।

राजन के मुताबिक हाल के वैश्विक संकट भारत के लिए एक वेक-अप कॉल हैं और सरकार को इससे सबक लेते हुए घरेलू उत्पादन, रणनीतिक भंडारण और विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ मजबूत आपूर्ति नेटवर्क तैयार करना चाहिए।

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