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₹30,213 करोड़ के IPO से कर्ज चुकाएगी Jio, जानिए क्या है प्लान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • कंपनी ने इसके लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है
  • आईपीओ के ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाएगी
  • एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 19 अक्टूबर को होगी, जबकि शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है

Jio Platforms IPO: मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अपने कर्ज को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी अपने 30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में करेगी। जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। कंपनी का लक्ष्य पूरी तरह कर्ज फ्री कंपनी बनना है। बता दें कि मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स शेयर बाजार में नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। कंपनी 30,213 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। आईपीओ के ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाएगी। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 19 अक्टूबर को होगी, जबकि शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है।

आकाश अंबानी ने क्या कहा

आकाश अंबानी ने कहा कि जियो अपने कारोबार के अगले फेज में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है और इसके लिए कर्ज कम करना अहम है। उन्होंने साफ कहा कि आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम कर्ज घटाने में लगाई जाएगी। कंपनी की इस योजना से निवेशकों का ध्यान जियो की वित्तीय स्थिति और भविष्य की ग्रोथ पर गया है।

क्या होती है नेट डेट-फ्री कंपनी

नेट डेट-फ्री कंपनी का मतलब ऐसी कंपनी से है, जिसके कुल कर्ज की तुलना में उसके पास मौजूद नकदी और नकदी जैसे रिसोर्सेज इतने हों कि उसका कुल कर्ज शून्य या उससे कम हो जाए। जियो प्लेटफॉर्म्स का टारगेट भी अपनी वित्तीय स्थिति को इस स्तर तक पहुंचाना है। हालांकि, कंपनी वास्तव में कब तक नेट डेट-फ्री बनेगी, इसकी डेडलाइन की जानकारी इस बयान में नहीं दी गई है।

जियो के आईपीओ पर निवेशकों की नजर

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के बड़े आईपीओ में शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि आईपीओ के बाद कंपनी का कर्ज कितना घटता है और इसका उसके मुनाफे पर क्या असर पड़ता है। कर्ज कम होने से कंपनी को ब्याज खर्च में राहत मिल सकती है, लेकिन निवेशकों को कंपनी की कमाई, कारोबार की ग्रोथ और आईपीओ की वैल्यूएशन पर भी ध्यान देना चाहिए। केवल कर्ज घटाने की योजना के आधार पर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN