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अब जाएगी नेतन्याहू की सत्ता? अरब नेता की विपक्ष से बड़ी अपील, इजरायल में बढ़ी सियासी हलचल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इजरायल में 27 अक्टूबर के चुनावों के बाद राजनीतिक गतिरोध बन गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन और गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट, दोनों को बहुमत नहीं मिल सका।

27 अक्टूबर के चुनावों के बाद इजरायल में राजनीतिक गतिरोध बन गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन और गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट, दोनों को बहुमत नहीं मिल सका। इस अनिश्चितता के बीच जॉइंट लिस्ट के प्रमुख यूसुफ जबरीन ने विपक्षी दलों से नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए अरब दलों के साथ मिलकर काम करने की अपील की है। जबरीन ने कहा कि वे आइजेनकोट के गुट के साथ मिलकर वैकल्पिक सरकार बनाने और 120 सदस्यों वाली संसद (नेसेट) पर नियंत्रण पाने के लिए तैयार हैं। उनकी पार्टी को चुनाव में 11 सीटें मिलीं।

अरब पार्टियों के पास सरकार बनाने की चाबी

बता दें कि नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जिससे उन्हें बहुमत नहीं मिला। आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी ‘चेंज’ ब्लॉक को 48 सीटें मिलीं। इस स्थिति में जॉइंट लिस्ट और रा’आम समेत अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं। अब ये पार्टियां सरकार बनाने के लिए बहुत जरूरी हो गई हैं। लेकिन विपक्ष और अरब पार्टियों के बीच समझौता आसान नहीं है। आइजेनकोट और उनके साथी अरब दलों के साथ काम करने में हिचकिचा रहे हैं।

उन्होंने शर्तें भी रखी हैं, जैसे इजरायल को यहूदी देश मानना और अनिवार्य राष्ट्रीय सेवा को स्वीकार करना। जॉइंट लिस्ट ने संकेत दिया है कि वह सरकार में शामिल होने के बजाय बाहर से समर्थन देना पसंद करेगी। जबरीन ने कहा कि जब तक वेस्ट बैंक पर इजरायल का कब्जा जारी है, उनकी पार्टी किसी सरकार का हिस्सा नहीं बन सकती।

नीति बदलने का मौका है

जबरीन का कहना है कि चुनाव परिणाम अरब आबादी और फिलिस्तीनियों के प्रति इजरायल के रवैये को बदलने का मौका देते हैं। उन्होंने इसे ऐतिहासिक पल बताया और उम्मीद जताई कि विपक्षी पार्टियां अरब समूहों के साथ काम करने के लिए सहमत होंगी। उन्होंने साफ-साफ कहा कि यह नीति बदलने और अरब समुदाय व फिलिस्तीनी लोगों के प्रति नजरिया बदलने का मौका है। यह सच में ऐतिहासिक पल है। हमें उम्मीद है कि विपक्ष में भी इसके लिए साथी मिलेंगे। हमें लगता है कि यह बदलाव की शुरुआत हो सकती है। जबरीन ने आगे कहा कि अरब समुदाय को इजरायल में लंबे समय से भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि नेतृत्व बदलने से ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने और फिलिस्तीनी नेतृत्व के साथ नई बातचीत शुरू करने में मदद मिल सकती है।

नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर निर्भर सरकार को नकारा

बता दें कि नई चुनी गई संसद 10 नवंबर को शपथ लेगी। नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि वे बड़ी राष्ट्रीय सरकार बनाने के लिए तैयार हैं, लेकिन अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों पर निर्भर सरकार का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अगली सरकार का नेतृत्व करने का जनता का जनादेश मिला है। उन्होंने कहा कि इजरायली मतदाता ऐसी सरकार नहीं चाहते जो रा’आम और जॉइंट लिस्ट पर निर्भर हो। उन्होंने इन पार्टियों पर आतंकवाद का समर्थन करने और यहूदी देश को नकारने का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने कहा कि पहले दिन से ही हमने बड़ी राष्ट्रीय सरकार बनाने के लिए हाथ बढ़ाया है। यहूदी जनता में साफ बहुमत ने लिकुड को सबसे बड़ी पार्टी चुना और मुझे प्रधानमंत्री के रूप में अगली सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना।

इस बीच विपक्षी पार्टियां वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश जारी रखे हुए हैं। आइजेनकोट के गुट के सभी नेताओं ने उनकी कोशिश का समर्थन करने का वादा किया है। अरब पार्टियों ने भी संकेत दिया है कि वे समर्थन कर सकती हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN