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‘आतंकियों को कौन दे रहा शह, जनरलों पर कार्रवाई कब?’ पाकिस्तान की टेरर पॉलिसी पर ANP चीफ ने दागे सवाल

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अवामी नेशनल पार्टी के प्रमुख ऐमल वली खान ने पाकिस्तान की सेना और राजनीतिक नेतृत्व पर आतंकवादी समूहों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार सच में आतंकवाद खत्म करने के लिए गंभीर नहीं है।

पाकिस्तान की अवामी नेशनल पार्टी (ANP) के प्रमुख ऐमल वली खान ने पाकिस्तान के सैन्य सिस्टम और राजनीतिक नेतृत्व पर आतंकवादी समूहों को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि देश के ताकतवर फैसले लेने वाले लोग, खासकर सेना के जनरलों, को आतंकवाद बढ़ाने में उनकी कथित भूमिका के लिए जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया जा रहा। खान का कहना है कि सरकार सच में आतंकवाद खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध नहीं है और उसकी नीतियों ने ही आतंकवाद को जिंदा रखा है।

एएनपी की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब खैबर पख्तूनख्वा (KP) में इमरजेंसी लागू करने को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर को संविधान के तहत केपी में इमरजेंसी का ऐलान किया और इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया। केंद्र सरकार का कहना है कि बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और आतंकवादी घटनाओं में बढ़ोतरी की वजह से यह कदम जरूरी था। फेडरल अधिकारियों का आरोप है कि PTI सरकार प्रांत में आतंकियों को रोकने में नाकाम रही। PTI ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक कदम है।

PML-N नेताओं पर सीधा आरोप

अब ऐमल वली खान ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के प्रमुख नेताओं का नाम लेकर आरोप लगाया। उन्होंने नवाज शरीफ, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राणा सनाउल्लाह का जिक्र करते हुए कहा कि ये लोग आतंकवादी समूहों को सपोर्ट करते रहे हैं या उनकी मदद करते रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर आतंकवाद एक प्रांतीय सरकार को हटाने की वजह बन सकता है, तो यही नियम पूरे राजनीतिक और शासन सिस्टम पर भी लागू होना चाहिए।

उन्होंने पूछा कि आतंकवाद के बने रहने की जिम्मेदारी सिर्फ एक राज्य सरकार पर क्यों डाली जा रही है, जबकि सेना और दूसरे ताकतवर संस्थानों की भूमिका जांच के दायरे से बाहर रखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के प्रति सरकार के रवैये से अरबों-खरबों रुपये जुड़े हुए हैं। खान का आरोप है कि सरकार की नीतियां आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं, न कि उसे खत्म करने की असली कोशिश दिखाती हैं।

इमरजेंसी को बहाना और नाटक बताया

एएनपी प्रमुख ने केपी में गवर्नर रूल और इमरजेंसी लगाने के प्रस्ताव को ‘बहाना और नाटक’ करार दिया। उन्होंने काउंटर टेररिज्म के नाम पर चुनी हुई प्रांतीय सरकार को हटाने या सस्पेंड करने का विरोध किया। उनका कहना है कि ऐसे कदमों से प्रांत की सुरक्षा समस्याएं हल नहीं होंगी, बल्कि राजनीतिक स्थिति और बिगड़ सकती है। एएनपी पहले भी केपी में गवर्नर रूल या इमरजेंसी का विरोध कर चुकी है।

18वें संशोधन और NFC अवॉर्ड पर चेतावनी

एएनपी चीफ ने यह भी आरोप लगाया कि केपी में इमरजेंसी, प्रांतीय स्वायत्तता को कमजोर करने की बड़ी योजना का हिस्सा हो सकती है। उनका कहना है कि इससे 2010 में पास हुए 18वें संवैधानिक संशोधन को कमजोर किया जा सकता है और नेशनल फाइनेंस कमीशन (NFC) अवॉर्ड में दखल दिया जा सकता है।

18वें संशोधन ने संघीय सरकार से प्रांतों को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए थे, जबकि NFC अवॉर्ड फेडरेशन और प्रांतों के बीच धन के बंटवारे को तय करता है। खान ने चेतावनी दी कि इमरजेंसी शासन मौजूदा संघीय व्यवस्था में बदलाव का बहाना बन सकता है। इसमें नए प्रांत और प्रशासनिक यूनिट बनाने की कोशिश भी शामिल हो सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN