Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका ईरान पर अपना सबसे बड़ा बम गिराने पर सोच रहा है। इस बम का नाम ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ है। यह बहुत बड़ा है और एक बड़े इलाके को तबाह कर सकता है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सबसे बड़े गैर-परमाणु बम ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (MOAB) का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है। यह बम एक बड़े इलाके में भारी तबाही मचा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान की गहरी और मजबूत भूमिगत परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने में शायद सक्षम नहीं है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB) बम को ईरानी ठिकानों पर हमले के विकल्पों में शामिल कर रही है। इसमें पिकैक्स माउंटेन पर संदिग्ध भूमिगत परमाणु सुविधा भी शामिल है।
यह बम क्या है?
बता दें कि GBU-43/B अमेरिका के हथियारों में सबसे बड़ा सामान्य (नॉन-न्यूक्लियर) बम है। इसका वजन करीब 21600 पाउंड यानी लगभग 9800 किलोग्राम है। इसे एक बड़े क्षेत्र में जबरदस्त विस्फोट करने के लिए बनाया गया है। यह बम जमीन के अंदर घुसने वाला बंकर-बस्टर नहीं है। यह हवा में फटता है और जमीन के ऊपर बड़ा धमाका करता है। इससे करीब नौ शहर ब्लॉक के बराबर क्षेत्र तबाह हो सकता है। इसे इराक युद्ध के दौरान बनाया गया था। इसका मकसद दुश्मन पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालना भी था। अमेरिका ने इस बम का इस्तेमाल पहली बार अप्रैल 2017 में अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के सुरंगों के खिलाफ किया था। तब डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में राष्ट्रपति थे।
ईरान की परमाणु साइटों को नष्ट कर सकता है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बम ईरान की मजबूत भूमिगत परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचा सकता है? अमेरिका और इजरायल का मानना है कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्से पिकैक्स माउंटेन जैसी जगहों पर छिपा रखे हैं। लेकिन बम की सतह पर तबाही मचाने की ताकत का मतलब यह नहीं कि वह जमीन के अंदर भी घुस सके। सीएनएन ने सैन्य योजनाकारों के हवाले से बताया कि ग्रेनाइट की मोटी परतों और मजबूत सुरक्षा वाली जगहों को यह बम आसानी से नष्ट नहीं कर सकता। इसकी असली ताकत बड़े खुले क्षेत्र को साफ करने में है, गहरी खुदाई में नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, MOAB एक बहुत बड़ा हथियार है जो बड़े इलाके को खाली करने में अच्छा है, लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं। इसे गहराई में घुसने के लिए नहीं बनाया गया।
अमेरिका इस पर क्यों विचार कर रहा है?
सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर अमेरिका इस पर क्यों विचार कर रहा है। दरअसल, ये योजनाएं ऐसे समय में आ रही हैं जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ संघर्ष को खत्म करने का रास्ता ढूंढ रहा है। CNN के अनुसार, ट्रंप ने सेना को और हमले के विकल्प तैयार करने को कहा है, जिसमें ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले भी शामिल हैं। MOAB को परमाणु से जुड़े लक्ष्यों के प्लान में भी रखा गया है।
बता दें कि अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इस युद्ध ने रिपब्लिकन पार्टी पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे चुनाव से पहले हमले दोबारा शुरू नहीं करेंगे, लेकिन कुछ सलाहकारों को भरोसा नहीं है कि यह वादा टिका रहेगा। वाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, प्रशासन संवेदनशील सैन्य योजनाओं पर टिप्पणी नहीं करता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप यह सुनिश्चित करने के लिए सभी विकल्प खुले रख रहे हैं कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न हो।
क्या इससे स्थिति बदलेगी?
अपनी बड़ी तबाही की क्षमता के बावजूद, MOAB ईरान के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य नतीजा देने में शायद काफी नहीं है। अधिकारियों को संदेह है कि यह गहरी दबी परमाणु सुविधा को खत्म कर सके या तेहरान को अमेरिकी मांगें मानने पर मजबूर कर सके। इसकी सबसे बड़ी ताकत मनोवैज्ञानिक प्रभाव और तनाव बढ़ाने की क्षमता में हो सकती है। साथ ही, बम के बड़े विस्फोट क्षेत्र से आम लोगों के हताहत होने की चिंता भी है, खासकर अगर इसे आबादी वाले इलाकों या ऊर्जा सुविधाओं के पास इस्तेमाल किया जाए। हालांकि ऐसी संभावनाए दिख नहीं रही है। एक तरह से कहा जाए तो अमेरिका ईरान के ऊपर साइकोलॉजिकल प्रेशर डालने की कोशिश कर रहा है।
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