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कमाई कम फिर भी मम्मियों के पास हमेशा कैसे होते हैं पैसे? जानिए उनके 5 सीक्रेट ट्रिक्स

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीय घरों में मां की एक बात अक्सर सुनने को मिलती है पैसे बचाओ और फिर खर्च करो। बचपन की ये बातें भले ही पुरानी लगें, लेकिन पहली सैलरी मिलते ही इनकी असली कीमत समझ आने लगती है। ज्यादातर सैलरी क्लास के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। महीने के खत्म होने से पहले ही सैलरी खत्म होने लगती है। तब हमें अपनी मां की छोटी-छोटी पैसे से जुड़ी बातें याद आती है। यहां आपको मां की बताई 5 आदतों के बारे में बता रहे हैं जिसे अपनी जिंदगी में उतार सकते हैं और हर महीने ज्यादा पैसा बचाना शुरू कर सकते हैं।

1. दूसरों को देखकर खर्च करने की आदत छोड़ें

दोस्त महंगे ब्रंच पर जा रहे हैं या आसपास के लोग हर महीने नए कपड़े खरीद रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आपको भी उतना ही खर्च करना है। पीयर प्रेशर या दोस्तों को देखकर किया गया खर्च आपकी सेविंग बिगाड़ सकता है। यहां आपको शबाना का उदाहरण दे रहे हैं कि कैसे उसने समझदारी से पैसे बचाए। शबाना ने 1,500 रुपये के बाहर के ब्रंच की जगह दोस्तों के साथ 500 रुपये में घर पर नाश्ता किया और बचे 1,000 रुपये को तुरंत सेविंग में डाल दिया। यही सबसे जरूरी बात है कि कम खर्च करने से बचा पैसा अगर सेव नहीं किया, तो वह किसी दूसरे खर्च में निकल जाएगा।

क्या करें: दोस्तों के साथ बजट फ्रेंडली प्लान बनाएं, कपड़े बार-बार पहनने में झिझकें नहीं और सिर्फ दिखावे के लिए खरीदारी न करें। बची रकम को अलग सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर कर दें।

2. खर्च आने से पहले ही उसकी तैयारी करें

अचानक आने वाला बड़ा खर्च अक्सर बजट बिगाड़ देता है। मां की तरह अगर आप भी पहले से तैयारी शुरू कर दें तो महीने के अंत में पैसों की कमी नहीं होगी। मान लीजिए अगले महीने किसी फैमिली फंक्शन में 10,000 रुपये खर्च होने हैं। आखिरी हफ्ते में रकम जुटाने के बजाय इसे 4 हिस्सों में बांटकर हर हफ्ते 2,500 रुपये बचाए जा सकते हैं। इसके लिए फूड डिलीवरी, कपड़ों या गैर-जरूरी खरीदारी में थोड़ी कटौती करनी होगी।

क्या करें: अगले महीने के बड़े खर्चों की लिस्ट बनाएं और पहले से तय करें कि हर हफ्ते कितनी रकम अलग रखनी है।

3. महीने का नहीं, हफ्ते का बजट बनाएं

महीने का बजट कई बार बहुत बड़ा और मुश्किल लगता है। लेकिन जब खर्च को हफ्तों में बांट दिया जाए तो उसे कंट्रोल करना आसान हो जाता है। जरूरी खर्च और सेविंग अलग रखने के बाद अपना फ्लेक्सिबल वीकली बजट 2,000 रुपये तय किया। एक हफ्ते उसने उपलब्ध सामान से खाना बनाकर सिर्फ 1,600 रुपये खर्च किए। बचे 400 रुपये को खर्च करने के बजाय उसने सेव कर दिया।

क्या करें: हर हफ्ते खर्च की एक सीमा तय करें। जो पैसा सीमा के अंदर खर्च नहीं हुआ, उसे अगले शॉपिंग ट्रिप में उड़ाने के बजाय सेविंग में डालें।

4. छोटे खर्चों को नजरअंदाज न करें

बस 50 रुपये ही तो हैं! यही सोच कई बार महीने में हजारों रुपये खर्च करा देती है। चाय, स्नैक्स, ऑनलाइन डिलीवरी चार्ज और छोटी-छोटी गैर जरूरी खरीदारी मिलकर बड़ा खर्च बन सकते हैं। शबाना का उदाहरण लें तो उसने अपने खर्चों को ट्रैक किया तो उसे रोजाना 50 रुपये का ऐसा खर्च मिला, जिसका उसे खास फायदा भी नहीं मिल रहा था। 30 दिन तक इसे रोकने पर 1,500 रुपये की सेविंग हो सकती थी।

क्या करें: कम से कम एक हफ्ते तक हर छोटा खर्च नोट करें। फिर ऐसा एक खर्च चुनें जिसे कम किया जा सकता है और बची रकम को नियमित रूप से सेव करें।

5. पहले गुल्लक भरो, फिर खर्च करो

भारतीय मां की सबसे पुरानी और असरदार मनी की लर्निंग यही है कि पहले सेविंग करें और बाद में खर्च करें। बचपन में शबाना अपने जन्मदिन पर मिले पैसे मां की गुल्लक में डालती थी। नौकरी लगने के बाद उसने इसी आदत को नए तरीके से अपनाया। सैलरी आते ही 2,000 रुपये अलग सेविंग में ट्रांसफर करने लगी। बाद में इनकम बढ़ी तो उसने यह रकम बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दी। आज इस डिजिटल गुल्लक की जगह अलग सेविंग अकाउंट या SIP का इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या करें: सैलरी आते ही एक तय रकम ऑटोमैटिक तरीके से सेविंग या इन्वेस्टमेंट के लिए अलग कर दें। इनकम बढ़े तो सेविंग भी बढ़ाएं, सिर्फ खर्च नहीं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN