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जब इस एक्टर की हेयरस्टाइल को लेकर संसद में मचा था बवाल, 45 साल बाद उसी पार्टी ने बनाया राज्यसभा का मेंबर, जानें दिलचस्प

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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आपको जानकर हैरानी होगी कि एक्टर की हेयर स्टाइल को लेकर संसद तक में बहस छिड़ गई थी। नहीं हो रहा यकीन, लेकिन ये सच है।

बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार दिलीप कुमार आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वो अपनी फिल्मों और किस्सों के चलते हमेशा ही फैंस के दिलों में जिंदा रहेंगे। दिलीप इंडस्ट्री में न सिर्फ एक्टिंग बल्कि अपने स्टाइल के लिए भी जाने जाते थे। दिलीप फिल्मों में जिस तरह से अपना लुक यानी कपड़े और हेयर स्टाइल करते थे, उनके फैंस उसे कॉपी करते थे। एक दौर था जब दिलीप कुमार की हेयर स्टाइल काफी सुर्खियों में रहा। आपको जानकर हैरानी होगी कि दिलीप कुमार की हेयर स्टाइल को लेकर संसद तक में बहस छिड़ गई थी। नहीं हो रहा यकीन, लेकिन ये सच है। आइए जानते हैं क्या है पूरा किस्सा?

संसद में उठा था दिलीप की हेयर स्टाइल पर सवाल

दरअसल, साल 1950 के दशक में, ‘ट्रेजडी किंग’ दिलीप कुमार (यूसुफ खान) का हेयरस्टाइल, ड्रेसिंग स्टाइल और तौर-तरीके भारतीय नौजवानों के बीच बहुत पॉपुलर हो गए थे। कांग्रेस MP लीलावती मुंशी, जो समाज पर फिल्मों के असर के बारे में खुलकर बोलती थीं, उन्होंने कथित तौर पर संसद (पार्लियामेंट) में दिलीप कुमार के हेयरस्टाइल का मुद्दा उठाया, यह तर्क देते हुए कि इसका भारतीय युवाओं पर “बुरा असर” पड़ता है। इसके साथ ही लीलावती मुंशी ने फिल्मों में बोल्ड और किसिंग सीन सहित आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ भी कैंपेन चलाया।

नहीं लगी रोक

हालांकि, दिलीप कुमार की हेयरस्टाइल पर कोई कानूनी पाबंदी तो नहीं लगी। साथ ही फैंस के बीच उनका और उनके स्टाइल का क्रेज बरकरार रहा, लेकिन, लीलावती मुंशी के लगातार अभियान के दबाव के कारण आगे चलकर 1959 में सिनेमाई अधिनियम (Cinematograph Act) में संशोधन जरूर करना पड़ा, जिससे तत्कालीन फिल्मों से किसिंग सीन्स को हटा दिया गया। इस बात का जिक्र एक्टर की बायोग्राफी ‘दिलीप कुमार: स्टार लेजेंड ऑफ इंडियन सिनेमा – द डेफिनिटिव बायोग्राफी’ में हैं, जिसे बन्नी रूबेन ने लिखा।

उन्हीं की सीट पर बने

इस पूरी कहानी में दिलचस्प बात ये थी कि जिस पार्टी ने दिलीप कुमार की हेयर स्टाइल पर सवाल उठाया था, राज्यसभा में बहस की थी, उसी पार्टी यानी कांग्रेस ने 45 साल बाद यानी साल 2000 में दिलीप कुमार को राज्यसभा का मेंबर अपॉइंट किया। वो भी उसी सीट से, जिससे लीलावती मुंशी राज्यसभा मेंबर थीं।

फिल्मी करियर

दिलीप कुमार ने अपने फिल्मी करियर में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी। लेकिन उनकी मेगा-ब्लॉकबस्टर की फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ (Mughal-E-Azam) को आज तक कोई टक्कर नहीं दे सकता। ये फिल्म साल 1960 में रिलीज हुई थी, इस फिल्म के डायरेक्टर महान आसिफ करीम हैं, जिन्हें के. आसिफ नाम भी जाना जाता है। फिल्म में मधुबाला ने अनारकली और दिलीप कुमार ने एक सलीम की भूमिका निभाई थी। ये उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी। इसके अलावा वो ‘गंगा जमना’, ‘दीवार’, ‘अमर अकबर एंथनी’ जैसी फिल्में दी हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN