Source :- LIVE HINDUSTAN
गौरव श्रीवास्तव के इस काले कारनामे का भंडाफोड़ किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि उसके पूर्व बिजनेस पार्टनर नील्स ट्रोस्ट ने किया है। ट्रोस्ट ने कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क की अदालतों में गौरव के खिलाफ सिविल केस दर्ज कराए हैं।
भारतीय मूल के एक बिजनेसमैन पर फर्जीवाड़ा का एक ऐसा सनसनीखेज आरोप लगा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस शख्स ने किसी और से नहीं, बल्कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और वहां के आला अधिकारियों से करीबी बढ़ाने के लिए खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बता डाला। ‘ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट’ (OCCRP) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, इस जालसाजी का मकसद इंडोनेशिया के साथ अरबों डॉलर की डिफेंस डील को हथियाना था।
खुद का नाम रखा ‘Mr G’, फाइटर जेट्स की डील में मारी एंट्री
रिपोर्ट के मुताबिक, इस शातिर बिजनेसमैन की पहचान गौरव श्रीवास्तव के रूप में हुई है। गौरव ने खुद को सीआईए का एजेंट बताते हुए इंडोनेशिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री और मौजूदा राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का भरोसा जीत लिया। उसने अपना कोडनेम ‘मिस्टर जी’ (Mr G) रख लिया था।
हद तो तब हो गई जब साल 2020 में वाशिंगटन डीसी और जकार्ता में हुई हाई-लेवल मिलिट्री मीटिंग्स में वह राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ साए की तरह मौजूद रहा। इन बैठकों में इंडोनेशिया के लिए फाइटर जेट्स और अन्य सैन्य उपकरण खरीदने पर चर्चा चल रही थी।
पूर्व बिजनेस पार्टनर ने कोर्ट में खोला राज
गौरव श्रीवास्तव के इस काले कारनामे का भंडाफोड़ किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि उसके पूर्व बिजनेस पार्टनर नील्स ट्रोस्ट ने किया है। ट्रोस्ट ने कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क की अदालतों में गौरव के खिलाफ सिविल केस दर्ज कराए हैं। ट्रोस्ट का दावा है कि उसने गौरव के सीआईए एजेंट होने के झांसे में आकर अपनी कंपनी की 50 फीसदी हिस्सेदारी उसके नाम कर दी थी।
कोर्ट में जमा कराए गए सबूतों के अनुसार, गौरव ने राष्ट्रपति प्रबोवो के भाई और ‘अर्सारी ग्रुप’ के चेयरमैन हाशिम जोजोहादिकुसुमो जैसे इंडोनेशिया के बड़े और रसूखदार उद्योगपतियों से भी नजदीकी रिश्ते बना लिए थे। फोन कॉल्स की रिकॉर्डिंग में वह साफ तौर पर खुद को सीआईए के लिए काम करने वाला बता रहा है, ताकि इंडोनेशियाई सरकार की गोपनीय बैठकों तक उसकी पहुंच आसान हो सके।
बाली बम धमाकों और ‘इमिग्रेशन ब्लैकलिस्ट’ की गढ़ी झूठी कहानियां
अपने रसूख को और मजबूत करने के लिए गौरव ने झूठी कहानियों का सहारा लिया। उसने अधिकारियों के सामने दावा किया कि:
- साल 2002 में इंडोनेशिया में हुए बाली बम धमाकों (जिसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे) के मास्टरमाइंड को पकड़वाने में उसने अहम भूमिका निभाई थी।
- राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का नाम जो अमेरिका की इमिग्रेशन ब्लैकलिस्ट में शामिल था, उसे वहां से हटवाने का काम भी उसी ने किया था।
फर्जी ‘शेल’ कंपनियों के जरिए हड़प लिए MoU
इस तगड़ी जालसाजी के दम पर गौरव साल 2020 में इंडोनेशियाई सरकार से फाइटर जेट्स की खरीद के लिए तीन ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LOI) हासिल करने में कामयाब रहा। इसके बाद 2021 और 2022 में उसने दो और बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट्स के लिए समझौते (MoU) भी साइन करवा लिए। 2020 से 2022 के बीच गौरव से जुड़ी चार कंपनियों ने इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और एक सरकारी डिफेंस कंपनी के साथ कुल पांच शुरुआती रक्षा समझौते किए।
प्रस्तावित डिफेंस डील:
- 36 F-15 फाइटर जेट्स की बिक्री
- UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर
- C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट
- इंडोनेशिया के लिए एक मिलिट्री कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना
13.9 अरब डॉलर की असली डील से खुला राज
साल 2022 में अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इंडोनेशिया को करीब 13.9 अरब डॉलर की कीमत पर 36 F-15 फाइटर जेट्स बेचने की मंजूरी दे दी। लेकिन खेल तब बिगड़ा जब अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी ने इस आधिकारिक डील का एलान किया। इस सरकारी दस्तावेज में गौरव श्रीवास्तव की किसी भी कंपनी का नामोनिशान तक नहीं था।
OCCRP की जांच में सामने आया कि जिन चार कंपनियों के जरिए गौरव अरबों डॉलर की डिफेंस डील करने का दावा कर रहा था, वे सभी फर्जी थीं, जिन्होंने जिंदगी में कभी डिफेंस सेक्टर में कोई काम ही नहीं किया था। फिलहाल यह पूरा मामला अमेरिकी अदालतों में है और इस अंतरराष्ट्रीय ठगी की परतें लगातार खुल रही हैं।
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